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पुरबिया एक्सप्रेस और मालगाड़ी से पांच गाय कटीं
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Wed, 14 Sep 2016 12:58 AM IST
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बरेली से लखनऊ की ओर जा रही पुरबिया एक्सप्रेस और इसके पीछे आ रही मालगाड़ी से पांच गाय कटकर मर गईं। हादसे के दौरान ट्रेन में बैठे मुसाफिरों को जोरदार झटका लगा और पहिए थम गए। पीछे आ रही दो ट्रेनों को काशन देकर निकाला गया।
सोमवार रात अंतिम पहर तीन बजे बरेली से लखनऊ की ओर जा रही पुरबिया एक्सप्रेस ने पीतांबरपुर स्टेशन से एक किमी चल पाई थी। तभी जंगल में घूमने वाली चार गाय रेलवे लाइन पर आ गईं। तेज गति में जा रही ट्रेन से तीन गायों के चिथड़े उड़ गए। इनमें से एक गाय ट्रेन के इंजन में फंस गई और आधा किमी तक घसीटती चली गई। जोरदार झटके के साथ ट्रेन के पहिये नवादा वन रेलवे फाटक पर जाकर थम गए। तेज आवाज और झटके से ट्रेन में बैठे लोगों को झटका लगा और उनकी नींद खुल गई। ट्रेन में हड़कंप मच गया। यात्रियों को लगा कि ट्रेन पटरी से उतर गई है। ड्राइविंग स्टाफ ने उतरकर हाल देखा और कंट्रोल को सूचना दी। पीतांबरपुर से स्टाफ पहुंच गया और इंजन में फंसी गाय निकाली। करीब पंद्रह मिनट ट्रेन को फाटक पर रोकना पड़ा जिससे दोनों ओर काफी जाम लग गया। ट्रेन को गुजारा तो बरेली से लखनऊ की ओर जा रही मालगाड़ी के इंजन से एक और गाय टकरा गई। जोरदार आवाज के साथ मालगाड़ी बिना रुके धड़धड़ाती निकल गई। पांच गाय कटने के बाद रेल प्रशासन सतर्क हो गया और लखनऊ मेल व जनता एक्सप्रेस को कासन देकर निकाला गया। गायों के अवशेष मौके से हटवा दिए गए। पीतांबरपुर स्टेशन मास्टर मोहम्मद हनीफ ने बताया कि ट्रेनों में कोई नुकसान नहीं हुआ है, घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
एक ही जगह होते हैं हादसे, कोई साजिश तो नहीं
पीतांबरपुर स्टेशन से एक किमी आगे नवादा वन के पास करीब सात सौ गाय और नीलगाय घूमती हैं। यह गाय लाइन के आसपास के गांव और खेतों में घूमती हैं जिससे खेतों को बहुत नुकसान होता है। ग्रामीणों को संदेह है कि गायों से छुटकारा पाने के लिए कुछ खेत स्वामी इनको रेलवे लाइन की ओर हांक देते हैं और गाय दुर्घटना का शिकार हो जाती हैं। चूंकि इसी स्थान पर अक्सर गाय ट्रेनों की चपेट में आती हैं, इसलिए यह आशंका और बढ़ गई है। चूंकि गायों के साथ लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं, इसलिए साजिश की शंका से ग्रामीणों में रोष है। शिकायत पर सीओ नीति द्विवेदी का कहना था कि उनके संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है, फिर भी इस मामले की जांच करा ली जाएगी कि कोई जानबूझकर तो गायों को इधर नहीं हांक रहा।
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सोमवार रात अंतिम पहर तीन बजे बरेली से लखनऊ की ओर जा रही पुरबिया एक्सप्रेस ने पीतांबरपुर स्टेशन से एक किमी चल पाई थी। तभी जंगल में घूमने वाली चार गाय रेलवे लाइन पर आ गईं। तेज गति में जा रही ट्रेन से तीन गायों के चिथड़े उड़ गए। इनमें से एक गाय ट्रेन के इंजन में फंस गई और आधा किमी तक घसीटती चली गई। जोरदार झटके के साथ ट्रेन के पहिये नवादा वन रेलवे फाटक पर जाकर थम गए। तेज आवाज और झटके से ट्रेन में बैठे लोगों को झटका लगा और उनकी नींद खुल गई। ट्रेन में हड़कंप मच गया। यात्रियों को लगा कि ट्रेन पटरी से उतर गई है। ड्राइविंग स्टाफ ने उतरकर हाल देखा और कंट्रोल को सूचना दी। पीतांबरपुर से स्टाफ पहुंच गया और इंजन में फंसी गाय निकाली। करीब पंद्रह मिनट ट्रेन को फाटक पर रोकना पड़ा जिससे दोनों ओर काफी जाम लग गया। ट्रेन को गुजारा तो बरेली से लखनऊ की ओर जा रही मालगाड़ी के इंजन से एक और गाय टकरा गई। जोरदार आवाज के साथ मालगाड़ी बिना रुके धड़धड़ाती निकल गई। पांच गाय कटने के बाद रेल प्रशासन सतर्क हो गया और लखनऊ मेल व जनता एक्सप्रेस को कासन देकर निकाला गया। गायों के अवशेष मौके से हटवा दिए गए। पीतांबरपुर स्टेशन मास्टर मोहम्मद हनीफ ने बताया कि ट्रेनों में कोई नुकसान नहीं हुआ है, घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
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एक ही जगह होते हैं हादसे, कोई साजिश तो नहीं
पीतांबरपुर स्टेशन से एक किमी आगे नवादा वन के पास करीब सात सौ गाय और नीलगाय घूमती हैं। यह गाय लाइन के आसपास के गांव और खेतों में घूमती हैं जिससे खेतों को बहुत नुकसान होता है। ग्रामीणों को संदेह है कि गायों से छुटकारा पाने के लिए कुछ खेत स्वामी इनको रेलवे लाइन की ओर हांक देते हैं और गाय दुर्घटना का शिकार हो जाती हैं। चूंकि इसी स्थान पर अक्सर गाय ट्रेनों की चपेट में आती हैं, इसलिए यह आशंका और बढ़ गई है। चूंकि गायों के साथ लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं, इसलिए साजिश की शंका से ग्रामीणों में रोष है। शिकायत पर सीओ नीति द्विवेदी का कहना था कि उनके संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है, फिर भी इस मामले की जांच करा ली जाएगी कि कोई जानबूझकर तो गायों को इधर नहीं हांक रहा।
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