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किसी जोखिम से कम नहीं स्कूल तक का सफर

Fri, 20 Jan 2017 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 20 Jan 2017 01:01 AM IST
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No less than the risk the way to school
No less than the risk the way to school - फोटो : बरेली, अमर उजाला
एटा जैसे सड़क दुर्घटना को लेकर भले ही लोग सजग क्यों न हों, लेकिन लापरवाही इस सजगता पर भारी है। शहर में जितने भी स्कूल हैं वहां अधिकतर बच्चे ऑटो और टेंपो से जाते हैं। टेंपो की हालत बहुत अच्छी नहीं होती। वैन का पंजीकरण स्कूल वाहनाें में नहीं है और बस की फिटनेस पूरी नहीं है। अभिभावकों को केवल अपने बच्चे स्कूल भेजने से मतलब हैं, वे इन सब के बारे में कोई दिलचस्पी नहीं लेते। स्कूल भी ड्राइवरों का ड्राइविंग लाइसेंस देखकर इतिश्री कर लेते हैं। संभागीय परिवहन विभाग में इस समय 145 स्कूली बस में 13 की फिटनेस नहीं है। आरटीओ की ओर से इन्हें नोटिस जारी किया गया है।   
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बिशप कोनार्ड स्कूल में 30 बच्चाें को ले जाने के लिए खड़ी बस (यूपी25 9500) न तो पीले रंग में थी और न ही उसकी फिटनेस ठीक लग रही थी। अंदर की हालत भी अच्छी नहीं थी। ड्राइवर ने बताया कि उसकी स्कूल बस खराब हो गई है, इसलिए यह बस लाया है। अधिकतर स्कूलों के बच्चे ऑटो में जाते हैं। पिछले साल अभियान के बाद काफी हद तक स्कूली वाहनाें में सुधार हुआ था। पहले एक भी वाहन स्कूल परमिट में नहीं थे अब करीब 400 बसों ने स्कूली परमिट लिया है। लेकिन आज भी स्कूल और परिवहन विभाग वाहनों को लेकर लापरवाही बरतते हैं। डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी का कहना है कि परिवहन विभाग ऐसे स्कूल और वाहनाें के खिलाफ सख्ती करें, इसलिए इस संबंध में सभी अभिभावक मिलकर ज्ञापन देंगे।  
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वाहनाें के लिए व्यवस्था 
स्कूल बस या वैन का परमिट 
सभी वाहन सुनहरे पीले रंग में होंगे
ऑटो के दोनों तरफ जाली होनी चाहिए
दाहिनी ओर दरवाजा पैक रहेगा 
स्कूलाें के पास वैन का रूट ब्योरा होना चाहिए 
वाहन पीले रंग में रंगा हो
उसके आगे पीछे स्कूल लिखा हो
बच्चाें की संख्या निर्धारित हो
बस में फर्स्ट एड बॉक्स भी हो
स्कूल बैग रखने को सीट के नीचे जगह हो  

स्कूलाें को प्रशासन के निर्देश 
स्कूलाें को अपने और दूसरे वाहन की जानकारी रखनी है
स्कूल संचालक को चालक व उसके ड्राइविंग लाइसेंस, पता व संपर्क ब्योरा देना था
बिना लाइसेंस के चालक पर चालान होगा
स्कूल के प्रबंधक बच्चाें को दरवाजे तक छोड़ेगा

बिना परमिट के अनाधिकृत कंडम व खटारा वाहन खुलेआम स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं जिन्हें अयोग्य चालक दौड़ाते हैं। प्रशासनिक बैठकों व दूसरे माध्यमों से इस मुद्दे को गम्भीरता से उठाते रहे हैं कुछ समय निगरानी होती है खानापूरी के बाद सब कुछ उसी ढर्रे पर आ जाता है। अभिभावक भी अपने बच्चों को ऐसे वाहनों में बैठा देते हैं। 
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-खालिद जिलानी, संयोजक, पैरेंट्स फोरम
 
तीन दिन तक स्कूली वाहनाें के खिलाफ अभियान चलाकर चेकिंग की जाएगी। लेकिन सौ फीसदी वाहनाें की चेकिं ग कर पाना संभव नहीं हो पाता है, इसलिए स्कूल भी इसमें साथ दें। वे ऐसे वाहनों को बिल्कुल भी स्कूल में लगाने की इजाजत न दें जिसकी फिटनेस अच्छी न हो या फिर ड्राइवर का डीएल न बना हो। 

-आरआर सोनी, आरटीओ 

दो साल पहले जब बड़ा अभियान स्कूली वाहनाें के लिए चला तो काफी सुधार हुआ है। अब सभी के डीएल हैं और अधिकतर के पंजीकरण हैं। लेकिन इस दर्दनाक हादसे से सभी स्कूल के प्रबंधक बेहद सहमे हुए हैं। इसलिए एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। सभी स्कूल वाहनाें की जांच करेंगे। संभव होगा तो ड्राइवरों की आंख जांच भी कराई जाएगी। 
पारुष अरोरा, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
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