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बेटे ने बाप को फावड़े से काट डाला
बरेली
Updated Wed, 07 Jan 2015 01:16 AM IST
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क्षेत्र के गांव ढ़कौरा में मंगलवार सुबह एक युवक ने अपने बुजुर्ग पिता की फावड़े से काटकर नृशंस तरीके से हत्या कर दी। वारदात से गांव में सनसनी फैल गई। भीड़ ने परिवारवालों के साथ मिलकर आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। आरोपी दिमागी तौर पर कमजोर बताया जा रहा है। बड़े भाई ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
ईश्वरी प्रसाद सुबह करीब साढ़े सात बजे सोकर उठे और बिस्तर उठाने लगे। आठ साल की बेटी खेमवती पास बैठी थी। पत्नी भानमती बड़े बेटे मुनीश के पास दूसरे मकान में गई थीं। इसी बीच बड़े से छोटा बेटा धर्मवीर आया और फावड़ा उठाकर पिता ईश्वरी प्रसाद पर ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिए। गर्दन कटने से ईश्वरी की वहीं मौत हो गई। खेमवती ने रोकना चाहा तो धर्मवीर ने कहा कि भाग जा वर्ना तेरी भी गर्दन काट दूंगा। खेमवती चिल्लाती हुई दूसरे मकान की ओर भागी। पिता पर कई वार करने के बाद धर्मवीर ने फावड़ा घर के अंदर कमरे में रख दिया। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने ईश्वरी का शव पड़ा देखकर पूछा तो धर्मवीर बोला उसे नहीं पता कि किसने मारा है? फिर वो फावड़ा उठाकर रेलवे लाइन की ओर चल दिया। खेमवती ने मां को जानकारी दी तो सभी रोते हुए घर पहुंचे। इस बीच हकीकत पता चलने पर ग्रामीणों ने मुनीश को पकड़ने के बाद बांधकर डाल दिया। एसओ सुजाउर रहीम उसे थाने ले आए। फिर शव का पोस्टमार्टम कराया गया। ईश्वरी के पांच बेटे और दो बेटियां हैं। दो बेटे और एक बेटी की वो शादी कर चुके थे।
छह महीने से वहशी बन गया था धर्मवीर
धर्मवीर पहले ठीक था। देवचरा के पास तख्तपुर की शांति से दो साल पहले उसकी शादी हुई थी। उसकी एक बेटी भी है। छह माह से धर्मवीर के व्यवहार में बदलाव शुरू हुआ। अजीबोगरीब हरकतों से परेशान शांति तीन महीने पहले मायके चली गई। मंगलवार को ससुर की हत्या की खबर सुनकर वह भाई के साथ ढकौरा आई। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले दिनों धर्मवीर ने घर के पालतू खरगोश काट डाले थे। दो आवारा कुत्तों को भी वो मार चुका है। रविवार को पूरे दिन वो हाथ में ब्लेड लिए घूमता रहा। सोमवार को चाकू और गड़ासे पर धार रखने के बाद गड़ासा लिए घूमा। लोग उसकी हरकत देखकर बचकर निकलने लगे। कुछ दिनों से घरवाले एक मानसिक चिकित्सक से उसका उपचार भी कराने लगे थे। कोई काम धंधा न करने से धर्मवीर की जेब खाली रहती थी। घरवाले भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। चर्चा थी कि इसी खुन्नस में उसने पिता की हत्या कर दी। एसओ का कहना था कि विवेचना में सच्चाई सामने आ जाएगी।
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ईश्वरी प्रसाद सुबह करीब साढ़े सात बजे सोकर उठे और बिस्तर उठाने लगे। आठ साल की बेटी खेमवती पास बैठी थी। पत्नी भानमती बड़े बेटे मुनीश के पास दूसरे मकान में गई थीं। इसी बीच बड़े से छोटा बेटा धर्मवीर आया और फावड़ा उठाकर पिता ईश्वरी प्रसाद पर ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिए। गर्दन कटने से ईश्वरी की वहीं मौत हो गई। खेमवती ने रोकना चाहा तो धर्मवीर ने कहा कि भाग जा वर्ना तेरी भी गर्दन काट दूंगा। खेमवती चिल्लाती हुई दूसरे मकान की ओर भागी। पिता पर कई वार करने के बाद धर्मवीर ने फावड़ा घर के अंदर कमरे में रख दिया। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने ईश्वरी का शव पड़ा देखकर पूछा तो धर्मवीर बोला उसे नहीं पता कि किसने मारा है? फिर वो फावड़ा उठाकर रेलवे लाइन की ओर चल दिया। खेमवती ने मां को जानकारी दी तो सभी रोते हुए घर पहुंचे। इस बीच हकीकत पता चलने पर ग्रामीणों ने मुनीश को पकड़ने के बाद बांधकर डाल दिया। एसओ सुजाउर रहीम उसे थाने ले आए। फिर शव का पोस्टमार्टम कराया गया। ईश्वरी के पांच बेटे और दो बेटियां हैं। दो बेटे और एक बेटी की वो शादी कर चुके थे।
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छह महीने से वहशी बन गया था धर्मवीर
धर्मवीर पहले ठीक था। देवचरा के पास तख्तपुर की शांति से दो साल पहले उसकी शादी हुई थी। उसकी एक बेटी भी है। छह माह से धर्मवीर के व्यवहार में बदलाव शुरू हुआ। अजीबोगरीब हरकतों से परेशान शांति तीन महीने पहले मायके चली गई। मंगलवार को ससुर की हत्या की खबर सुनकर वह भाई के साथ ढकौरा आई। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले दिनों धर्मवीर ने घर के पालतू खरगोश काट डाले थे। दो आवारा कुत्तों को भी वो मार चुका है। रविवार को पूरे दिन वो हाथ में ब्लेड लिए घूमता रहा। सोमवार को चाकू और गड़ासे पर धार रखने के बाद गड़ासा लिए घूमा। लोग उसकी हरकत देखकर बचकर निकलने लगे। कुछ दिनों से घरवाले एक मानसिक चिकित्सक से उसका उपचार भी कराने लगे थे। कोई काम धंधा न करने से धर्मवीर की जेब खाली रहती थी। घरवाले भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। चर्चा थी कि इसी खुन्नस में उसने पिता की हत्या कर दी। एसओ का कहना था कि विवेचना में सच्चाई सामने आ जाएगी।
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