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ननद की तरह मुझे भी पढ़ने दो
बरेली
Updated Fri, 04 Mar 2016 01:45 AM IST
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सास-ससुर दोनों ननदों को तो पढ़ा रहे हैं पर मुझसे पढ़ने के नाम पर मारपीट की जाती है। मुझे भी पढ़ना है, मैं तो इस बात पर भी तैयार हूं कि पढ़ाई घर में कर लूं लेकिन पेपर देने के लिए तो जाने की अनुमति मिले। मेरी परीक्षाएं चल रही हैं पर मुझे पेपर देने नहीं जाने दिया गया। सास-ससुर कहते हैं कि घर की बहुएं पढ़ेंगी तो बदनामी होगी। पढ़ने की इच्छा और ससुराल में हो रही प्रताड़ता की शिकायत लेकर बृहस्पतिवार को एक युवती महिला थाना पहुंची। साथ पहुंचा पति अपनी पत्नी के साथ हो रहे अत्याचार की तस्दीक कर रहा था। एसओ विजय सिरोही ने दोनों पक्षों का समझौता कराने की कोशिश की, पर मामला अभी निपटा नहीं है। फरीदपुर की इस युवती का शादी दो वर्ष पहले शाहजहांपुर के थाना तिलहर में हुई थी।
मां बोली, वादा किया था पढ़ाने का अब समधी मुकर गए...
उसके साथ थाने आई मां बोली कि गांव में अकेली मेरी बेटी ऐसी थी जो विज्ञान वर्ग से पढ़ी और 73 प्रतिशत अंक लाकर हमारा नाम किया। बोली, बेटी तो और पढ़ना चाहती थी, इसलिए हमने शादी में ही इस शर्त पर तय की थी कि उसे आगे पढ़ाया जाएगा पर समधी वादे से मुकर गए। हमने ही बेटी का एक प्राइवेट कॉलेज में दाखिला करा दिया।
छात्रा बोली, मैं तो बस पेपर देना चाहती थी
पीड़िता ने बताया कि उसका कालेज ससुराल से सिर्फ दो किलोमीटर दूर है, जिसमें उसकी ननदें भी पढ़ने जाती है। वह सिर्फ पेपर देने जाना चाहती थी पर उसे सास और ननदों ने मारापीटा। एसओ को युवती के पति ने बताया कि जब उसने पत्नी को बचाने की कोशिश की, तो छोटे भाई ने उस पर हाथ उठाया। बोला, मैं पिताजी की 25 बीघा जमीन में खेतीबाड़ी का काम करता हूं। पत्नी का साथ देने पर वह मुझे घर से बेदखल करने की धमकी देते हैं, जिस कारण बीते 15 दिन से मुझे भी पत्नी के मायके रहना पड़ रहा है।
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पीड़िता का ससुर मारपीट और पढ़ाई न करने देने के आरोपों को झूठा बता रहे हैं। एसओ ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पीड़िता को दहेज के रूप में मिले तीन लाख रुपए स्त्री धन को ससुराल पक्ष से वापस दिलवाने की बात कही है। ताकि दंपति उस रुपए से अपना खर्चा चलाते हुए अपने मुताबिक जी सके
विजय सिरोही, एसओ
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मां बोली, वादा किया था पढ़ाने का अब समधी मुकर गए...
उसके साथ थाने आई मां बोली कि गांव में अकेली मेरी बेटी ऐसी थी जो विज्ञान वर्ग से पढ़ी और 73 प्रतिशत अंक लाकर हमारा नाम किया। बोली, बेटी तो और पढ़ना चाहती थी, इसलिए हमने शादी में ही इस शर्त पर तय की थी कि उसे आगे पढ़ाया जाएगा पर समधी वादे से मुकर गए। हमने ही बेटी का एक प्राइवेट कॉलेज में दाखिला करा दिया।
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छात्रा बोली, मैं तो बस पेपर देना चाहती थी
पीड़िता ने बताया कि उसका कालेज ससुराल से सिर्फ दो किलोमीटर दूर है, जिसमें उसकी ननदें भी पढ़ने जाती है। वह सिर्फ पेपर देने जाना चाहती थी पर उसे सास और ननदों ने मारापीटा। एसओ को युवती के पति ने बताया कि जब उसने पत्नी को बचाने की कोशिश की, तो छोटे भाई ने उस पर हाथ उठाया। बोला, मैं पिताजी की 25 बीघा जमीन में खेतीबाड़ी का काम करता हूं। पत्नी का साथ देने पर वह मुझे घर से बेदखल करने की धमकी देते हैं, जिस कारण बीते 15 दिन से मुझे भी पत्नी के मायके रहना पड़ रहा है।
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पीड़िता का ससुर मारपीट और पढ़ाई न करने देने के आरोपों को झूठा बता रहे हैं। एसओ ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पीड़िता को दहेज के रूप में मिले तीन लाख रुपए स्त्री धन को ससुराल पक्ष से वापस दिलवाने की बात कही है। ताकि दंपति उस रुपए से अपना खर्चा चलाते हुए अपने मुताबिक जी सके
विजय सिरोही, एसओ