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चुनावी रंजिश में कब्रिस्तान में दफन नहीं होने दी लाश

Fri, 08 Jul 2016 01:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Fri, 08 Jul 2016 01:22 AM IST
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भमोरा। बुधवार शाम करंट से किसान की मौत के बाद शव दफन करने को लेकर एक ही समुदाय के दो पक्षों में तनातनी हो गई। प्रधानी चुनाव की रंजिश में प्रधान ने गांव के मुख्य कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोक दिया तो मृतक पक्ष ने लोहार समुदाय के कब्रिस्तान में गंदगी बताकर शव दफनाने से इंकार कर दिया। पांच घंटे चली तनातनी के बाद शव को खेत में ही दफना दिया गया। इस मामले में प्रधान के पति खुद को बेदाग बता रहे हैं जबकि पुलिस भी निजी मामला बताकर पल्ला झाड़ रही है। 
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 भमोरा के 55 वर्षीय गुलफान सैफी बुधवार शाम अपनी भैंसों को चारा डाल रहे थे। तभी घर में ही लगे पानी के मोटर में करंट आने से उनकी मौत हो गई। ईद से पहले शाम को मौत होने से घर में कोहराम मच गया। बृहस्पतिवार सुबह शव दफनाने से पहले बारिश होने लगी। सुबह सात बजे गुलफान के बेटे साबिर सैफी भमोरा रेलवे स्टेशन के पास स्थित कब्रिस्तान में कब्र खोदने के लिए फावड़ा लेकर पहुंचे। थोड़ी ही देर में ग्राम प्रधान के पति कदीर अहमद वहां पहुंच गए। उन्होंने शव दफनाने से मना कर दिया। इस पर साबिर ने थाने जाकर पुलिस को सूचना दी। प्रधान के पति भी थाने पहुंच गए। उन्होंने शव को सैफी (लोहार) समुदाय के कब्रिस्तान में दफनाने को कहा। साबिर ने कहा कि वहां काफी गंदगी है, इसलिए शव नहीं दफना सकते। तब प्रधान ने कुछ लोगों को सैफी कब्रिस्तान में भेजकर गड्ढा खुदवाना शुरू कर दिया। हालांकि साबिर आदि ने गंदगी और जलभराव में शव दफन करने से इंकार करते हुए अपने खेत में ही कब्र खोद ली। पांच घंटे बाद दोपहर बारह बजे करीब शव को खेत में ही सुपुर्देखाक कर दिया गया। घटना को लेकर सैफी समुदाय में काफी रोष दिखा। वहीं पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। 
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प्रधान के खिलाफ चुनाव लड़ने की रंजिश
किसान बेटे साबिर सैफी ने कहा कि प्रधान के पति ने चुनाव का गुस्सा निकाला है। उन्होंने कहा कि साबिर ने बताया कि कदीर नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी न्याज बानो के मुकाबले कोई दूसरा मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने न्याज के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि वह हार गए और न्याज बानो जीत गईं। तभी से कदीर उनसे रंजिश मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दो साल पहले उनके चाचा ईश मोहम्मद की सास वहीदन पत्नी अलीशेर को भी स्टेशन के पास वाले कब्रिस्तान में दफनाया गया था। तब अलग कब्रिस्तान वाली बात नहीं उठाई गई थी। 
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सैफी समुदाय का अलग कब्रिस्तान है। उन लोगों के शव वहीं दफन होते हैं। अगर वहां गंदगी थी तो यह लोग पहले बता देते। मैं खुद वहां सफाई करा देता। चुनावी रंजिश जैसी कोई बात नहीं है। 

- कदीर अहमद, प्रधान के पति
जिस वक्त ये लोग थाने गए मैं क्षेत्र में संवेदनशील स्थानों पर शांतिपूर्वक तरीके ईद की नमाज पढ़वाने की व्यवस्था में लगा था। थाने आया तो पता लगा कि वे लोग चले गए। इस मामले में कोई लिखित शिकायत भी थाने में नहीं है। यह एक ही समुदाय के दो पक्षों का निजी मामला है, पुलिस का इससे कोई लेनादेना नहीं है। 
-केके यादव, एसओ भमोरा
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