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चारो दरिंदों को फांसी से भी बड़ी सजा मिले

Sat, 06 May 2017 01:20 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sat, 06 May 2017 01:20 AM IST
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Four executioners get bigger punishment than hanging
Four executioners get bigger punishment than hanging - फोटो : बरेली, अमर उजाला
दिल्ली में पांच साल पहले निर्भया कांड के चारों दरिंदों को सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा मिलने पर बुद्धजीवियों ने संतोष जताया है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग और महिलाओं का मानना है कि चारो दरिंदों ने निर्भया के साथ जैसी नृशंसता की, उसमें फांसी की सजा बहुत छोटी चीज है। चारो हत्यारों को उससे भी बड़ी सजा मिलती ताकि समाज में अच्छा संदेश जाता। अधिकांश लोगों का मानना है कि केस की सुनवाई जल्दी होने के बाद भी चारो दरिंदों को सजा मिलने में पांच साल का समय लग गया। ये सजा जल्दी मिलनी चाहिए थी। एक हत्यारा नाबालिग का सहारा लेकर सजा से बच गया। वह भी बराबर की सजा का हकदार है। 
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतोष है लेकिन सजा पांचों को मिलनी चाहिए थी। ये सब अपराधियों पर लागू होना चाहिए। घृणित कार्य करने वाले ऐसे लोगाें का समाज में रहने का हक नहीं है। देश का रिएक्शन देखते हुए बाकी अपराधियों को भी ऐसी सजा देनी चाहिए - डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, आईएमए इलेक्टेड प्रेसीडेंट 
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इस तरह के मामलों में फांसी से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। लोगाें की मानसिकता ऐसी हो गई है। वो जानते हैं कि वह हत्या कर रहे हैं तो इसके लिए उन्हें फांसी होगी। इन्हें ऐसी सजा देनी चाहिए जिससे इनको पता चले कि इन्होंने कितना बड़ा अपराध किया है।  - डॉ. जेके भाटिया, अध्यक्ष, आईएमए
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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मैं स्वागत करती हूं। लेकिन यह थोड़ा जल्दी आता तो अच्छा होता। ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लीगल सिस्टम में लोगाें को ऐसे मामलों में जल्दी न्याय मिले। ऐसी नृशंस घटना फिर न हो। महिलाआें के लिए सुरक्षित और उन्नत समाज बने।  - सुप्रिया ऐरन, पूर्व महापौर 

 निर्भया कांड में चार व्यक्तियों की सजा बहाल रखने से समाज में नारी के प्रति सम्मान बहाली व ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने का संदेश जाता है। जहां तक एक व्यक्ति को बरी किये जाने का प्रश्न है तो ये न्यायालय का विवेक है -घनश्याम शर्मा, अध्यक्ष, बरेली बार एसोसिएशन

                                                                         
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