तौल लिपिक से करोड़ों का मालिक बन गया
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बरेली। मेरठ के छोटे से गांव डूंगर का रहने वाला आदेश गुर्जर फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए लड़कों को सेना में भर्ती कराकर पांच लाख रुपये लेता था। उसकी नंबर दो की इसी कमाई ने शुगर मिल में तौल लिपिक से करोड़ों का मालिक बना दिया। पुलिस की छानबीन में पता लगा है कि आदेश रकम लेने के बाद लौटाता नहीं था। उसने बरेली, मेरठ की ही नहीं देश भर के सैकड़ों लोगों से सेना में भर्ती कराने के नाम पर लाखों रुपये ले रखे थे। भर्ती न होने पर रुपये लौटाने के बजाए वह अगली भर्ती में फिर से चांस दिलाकर लड़कों को टहलाता रहता था।आदेश के खिलाफ जानी थाने में धोखाधड़ी और जानेलवा हमले के दो मुकदमे दर्ज हैं। बरेली और पीलीभीत में छह मुकदमों में से आदेश को सिर्फ एक मामले में ही नामजद कराया गया है। जबकि सभी मामलों में लड़कों ने आदेश का नाम लिया है। लेकिन यहां की क्राइम ब्रांच एक मामले में आदेश के खिलाफ सुबूत मिलने पर भी बाकी मुकदमों में आदेश गुर्जर का नाम नहीं खोल रही है।
तीन साल पहले आदेश ने लिए थे पांच लाख
-करीब तीन वर्ष पूर्व आदेश गुर्जर ने गांव डूंगर निवासी विजेंद्र उर्फ जिंटर से भी सेना में भर्ती कराने के नाम पर पांच लाख रुपये लिए थे। उसने विजेंद्र को फर्जी कागजात के आधार पर बरेली में आयोजित भर्ती में शामिल करा दिया था। सेना ने विजेंद्र के प्रमाण-पत्रों की जांच की तो वे फर्जी पाए गए थे। इस पर सेना की ओर से विजेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया। कैंट पुलिस ने ने उसे जेल भेज दिया था। विजेंद्र एक साल पहले बरेली जेल से जमानत पर छूटकर घर पहुंचा तो उसने आदेश गुर्जर से रुपये वापसी का तगादा शुरू कर दिया था। आदेश गुर्जर छह माह तक विजेंद्र को टरकाता रहा। विजेंद्र ने दबाव बनाना शुरू किया तो उसने बीती 24 दिसंबर को साथी प्रमोद के साथ मिलकर विजेन्द्र की हत्या कर शव गंगनहर में फेंक दिया था। प्रमोद कुमार फिलहाल जमानत पर है।