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अब लड़ाई वक्फ बोर्ड या अदालत में होगी
बरेली
Updated Sun, 31 May 2015 01:25 AM IST
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कुतुबखाना मस्जिद के विवाद को लेकर हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों पक्षों में सहमति बनना मुश्किल है। ऐसे हालात में इस मस्जिद में इमाम को तैनात करने की लड़ाई का फैसला अब सुन्नी वक्फ बोर्ड या अदालत में ही होने की संभावना नजर आ रही है।
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शनिवार को डीएम का जो फैसला आया उसमें भी कहा गया था कि जो नमाजी मस्जिद में नमाज पढ़ते रहे हैं, वह यथावत पढ़ते रहेंगे। शांतिपूवर्क नमाज पढ़ने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी। अंजुमन इस्लामियां पहले ही तरह ही मस्जिद की संपत्ति के रख-रखाव को देखती रहेगी। पूर्व में इमाम की प्रक्रिया का पता लगाने के लिए डीएम ने कमेटी बना दी है। डीएम के फैसले में भी दोनों पक्षों के लिए अदालत में जाने का विकल्प खुला है। डीएम ने अपने आदेश में कहा था कि कोई भी पक्ष अदालत में जा सकता है। न्यायालय का फैसला सभी के लिए मान्य होगा। देर रात बरेलवी मसलक के विरोध के कारण डीएम की ओर सेनमाज संबंधी फैसला बदले जाने के बाद भी आदेश का अगला हिस्सा पूर्ववत है। दोनों पक्षों को इमाम के नियुक्ति के फैसले को लेकर अदालत या वक्फ बोर्ड में जाना होगा। दरगाह आला हजरत से मुफ्ती सलीम अहमद ने मस्जिद को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान भी कर दिया। उनका कहना है कि अंजुमन इस्लामियां कानून तौर पर बहुत मजबूत है। इसलिए हमें उम्मीद है कि इस लड़ाई को हम हर हाल में जीतेंगे। यह मामला वक्फ बोर्ड ले जाया जाएगा। उधर दूसरे पक्ष के लोग भी मस्जिद के विवाद को अदालत तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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चालू हो गए कुतुबखाना के सीसीटीवी कैमरे
बरेली। कुतुबखाना मस्जिद प्रकरण के बाद आईजी के निर्देश पर संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। सीओ सिटी मुकुल द्विवेदी ने बताया कि कुतुबखाना चौराहे के सीसीटीवी कैमरों को पुलिस ने सही करा दिया है। बाकी संवेदनशील इलाकों के कैमरे भी सही कराने की कोशिश की जा रही है।
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बरेली रेंज से चार सीओ, दस एसओ और तीन कंपनी पीएसी दी है। दो जोन में दस सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा का खाका तैयार किया गया है। तीन कंपनी पीएसी दो शिफ्टों में ड्यूटी करेगी। इसके अलावा मुरादाबाद रेंज से भी आईजी ने बरेली को फोर्स दी है। मुस्लिमों की मिलीजुली आबादी के एतवार से अहमद अली तालाब, मठ की चौकी, बांसमंडी, कोहाड़ापीर, कुतुबखाना संवेदनशील है। इन इलाकों में बरेलवी और देवबंदी दोनों की मसलकों के लोग रहते हैं। आजमनगर, मठ की चौकी, बानखाना, मीरा की पैंठ, बांके की छावनी, पुराना शहर समुदायों के हिसाब के बेहद संवेदशील माना जाता है। इसलिए इन इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सीओ सिटी मुकुल कुमार द्विवेदी सुरक्षा पर नजर रखे हुई हैं। सीओ ने बताया कि बाहर की फोर्स पहुंच गई है। दो शिफ्टों में ड्यूटी लगाई गई है। सभी को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।