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... तो माचिस में जिला जेल पहुंचती है स्कैम

बरेली Updated Sat, 04 Apr 2015 12:42 AM IST
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दीवानी न्यायालय परिसर में जेल से पेशी पर आए एक बंदी के पास माचिस की डिबिया से चार पुड़िया स्मैक बरामद हुई। पुलिस का दावा है कि उसके पिता ने डिबिया में रखकर पुड़िया दी थीं। हालांकि, कचहरी में मुलाकात करने के लिए बंदी की मां भी आई थी। बरामदगी के बाद बंदी के माता-पिता पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। न्यायालय सुरक्षा ड्यूटी में तैनात दरोगा विपिन कुमार त्यागी की तरफ से बंदी के पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, लेकिन आरोपी पकड़ में नहीं आया है।
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कोतवाली के मोहल्ला बाग वृगटान (आजमनगर) गली नंबर-3 निवासी अंशु उर्फ कासिफ को न्यायालय ड्यूटी में तैनात दरोगा विपिन कुमार त्यागी, हेड कांस्टेबल नौबहार सिंह, सिपाही योगेंद्र त्यागी अदालत में पेशी पर ले जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान अंशु के पिता हसनैन ने उसे माचिस की डिबिया दी। हसनैन की पत्नी भी साथ में थी। पुलिस कर्मियों ने शक होने पर बंदी से पूछा कि उसे पिता ने क्या दिया गया है तो उसने माचिस को मुट्ठी में बंद कर लिया। पुलिस कर्मियों ने बमुश्किल मुट्ठी खुलवाई तो माचिस की डिबिया में स्मैक मिली। पुलिस कर्मियों ने हसनैन को तलाशने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी शक्ति सिंह कचहरी पहुंच गए और बंदी से बात की। मामले में दरोगा विपिन कुमार त्यागी की तरफ से बंदी के पिता हसनैन के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि हसनैन के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा लिखकर तलाश की जा रही है। जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।  


2011 से जेल में बंद है अंशु
 अंशु उर्फ कासिफ जिला जेल से अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष दस में पेशी पर आया था। उसके खिलाफ थाना कोतवाली में धारा 8/20 का मुकद्दमा दर्ज है। उसे 500 ग्राम चरस के साथ 17 दिसंबर, 2011 को रात 9.15 बजे पकड़कर मढ़ चौकी इंचार्ज रामवीर सिंह ने जेल भेजा था। तभी से वह जेल में है। परिवारवाले उसे काफी समय तक नाबालिग घोषित कराने का प्रयास करते रहे।

नशा तो हर जेल की समस्या है
जेल प्रशासन सूत्रों की मानें तो नशा हर जेल ही समस्या है। जेलों में स्मैक पहुंचने में तमाम कोशिशों के बाद भी पाबंदी नहीं लग पाई है। तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन जेल में नशे का सामान पहुंच ही जाता है। कुछ बंदियों ने तो स्मैक को जेल में अपना धंधा बना लिया है। पेशी पर आने के दौरान स्मैक ले जाने के लिए बंदी कई तरीके अपनाते हैं। बंदी पन्नी की पुड़िया बनाकर निगल लेते हैं। मूंगफली भी स्मैक  लाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। गुप्तांग में रखकर भी स्मैक की पुड़िया बंदी ले आते हैं। पेशी से लौटते वक्त कई बंदी तो मुंह में स्मैक का गुल्ला जीभ के नीचे दबा लेते हैं। बरेली ही नहीं, यह प्रदेश के हर जेल की समस्या है।

-बंदी नशीला पदार्थ लाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन हम सर्च कराते हैं। इसलिए जेल में नशीला पदार्थ लाना आसान नहीं है। जूता चप्पल की तली में चिपकाकर भी नशीला पदार्थ लाने की कोशिश की जाती है, सबसे ज्यादा पानी से साथ पन्नी में स्मैक जेलों में पहुंचने की संभावना रहती है, अंशु भी जेल में संदिग्ध है, लेकिन उसके पास से कभी नशीला पदार्थ पकड़ा नहीं गया-आरके मिश्रा, जेल अधीक्षक, जिला कारागार
 
मुकदमा लिखाने से पीछे हट गए
बंदी के पास माचिस में स्मैक पकड़े जाने के बाद उसके पिता हसनैन के खिलाफ मुकदमा लिखाने की बात पर दो दरोगा पीछे हट गए। इंस्पेक्टर शक्ति सिंह ने उनके मुकदमा लिखाने को कहा तो कहने लगे साहब किसी और से करा लो। बाद में दरोगा विपिन कुमार त्यागी को तलाशने के बाद उनकी तरफ से मुकदमा लिखाया गया। 

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