कम नंबर वाले बन गए दरोगा जी
आवेदकों का कहना था कि शारीरिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा कराई गई। इसके बाद बोर्ड ने लिखित परीक्षा आयोजित की। 22 नवंबर को परीक्षा के अंक वेबसाइट पर भी डाल दिए गए। आपत्तियों के बाद फिर से 29 को उन्हें प्रदर्शित किया गया। इस बीच व्हाइटनर लगाकर अंक पत्रों में बड़ा खेल किया गया। बरेली के जनकपुरी के रहने वाले सिद्धार्थ का कहना था कि उसके पिछड़े वर्ग में 315 नंबर आए थे। उससे कम नंबर वाले आवेदकों को उप निरीक्षक पद के लिए पास कर दिया गया। शास्त्रीनगर के राजीव कुमार ने बताया कि वह भी पिछड़े वर्ग से हैं। उसके 306 नंबर आए हैं, लेकिन उससे कम नंबर आने वाला पास हो गया। चंचल कुमारी नाम की लड़की के सामान्य जाति वर्ग में 292 नंबर हैं, जबकि महिलाओं का इससे कम नंबरों पर चयन होना था, परंतु उसे भी फेल कर दिया गया। उनका कहना था कि मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बाद सरकार को परिणाम घोषित करने की क्या जल्दी थी। आवेदक काफी देर कलेक्ट्रेट पर हंगामा करते रहे। ज्ञापन लेने के बाद अधिकारियों ने मामला शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया तो वह शांत होकर लौट गए।