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चाइल्ड लाइन ने मासूम को कैद करा दिया
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Tue, 05 Apr 2016 01:09 AM IST
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चाइल्ड लाइन की लापरवाही की वजह से सेटेलाइट बस अड्डे पर मिली तेरह साल की लड़की को अभी आजादी मिलनी मुश्किल है। उसे फिलहाल नारी निकेतन में ही रहना पड़ेगा। चाइल्ड लाइन बरेली के जिला समन्वयक ने बताया कि पीलीभीत की चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समिति दोनों के जिम्मेदारों से बात हुई है, लेकिन कोई लड़की को लेने के लिए तैयार नहीं है। जबकि सब जानते हैं कि लड़की पीलीभीत के गागूपुर गांव की रहने वाली है।
वह दस मार्च को सेटेलाइट बस अड्डे के पास भटकती हुई मिली थी। पुलिस ने उसे आशा ज्योति केंद्र को सौंपा था। वहां से बालिका को चाइल्ड लाइन को दिया था। काउंसलिंग के दौरान लड़की ने अपने घर का पता बता दिया था। पुलिस को छानबीन में पता लगा कि 2012 में लड़की को मां ने आनाथालय में छोड़ने के बाद दूसरी शादी कर ली थी। उसके दो भाई पहले से ही अनाथालय में रह रहे हैं।पिता बाबा के भेष में गांव में ही परचून की दुकान चला रहे हैं। 2013 में वह बेटी को अकेलापन दूर करने के लिए घर ले गए। लेकिन वह उनके पास नहीं रुकी। घर से दो बार भागकर अनाथालय पहुंच गई, लेकिन यहां से जिम्मेदारों ने उसे लेने से इनकार कर दिया। पिता ने लड़की को बरेली में ही छोटे भाई के घर रखवा दिया। वहां भी लड़की का मन नहीं लगा। चाची से विवाद होने पर उसने फांसी पर लटककर जान देने की कोशिश की। किसी तरह उसकी जान बचाई गई। फिलहाल लड़की को लेकर माता-पिता में कोई भी संजीदा नहीं है। बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन की भूमिका भी लड़की को उसके घर पहुंचाने को लेकर अच्छी नहीं है।
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वह दस मार्च को सेटेलाइट बस अड्डे के पास भटकती हुई मिली थी। पुलिस ने उसे आशा ज्योति केंद्र को सौंपा था। वहां से बालिका को चाइल्ड लाइन को दिया था। काउंसलिंग के दौरान लड़की ने अपने घर का पता बता दिया था। पुलिस को छानबीन में पता लगा कि 2012 में लड़की को मां ने आनाथालय में छोड़ने के बाद दूसरी शादी कर ली थी। उसके दो भाई पहले से ही अनाथालय में रह रहे हैं।पिता बाबा के भेष में गांव में ही परचून की दुकान चला रहे हैं। 2013 में वह बेटी को अकेलापन दूर करने के लिए घर ले गए। लेकिन वह उनके पास नहीं रुकी। घर से दो बार भागकर अनाथालय पहुंच गई, लेकिन यहां से जिम्मेदारों ने उसे लेने से इनकार कर दिया। पिता ने लड़की को बरेली में ही छोटे भाई के घर रखवा दिया। वहां भी लड़की का मन नहीं लगा। चाची से विवाद होने पर उसने फांसी पर लटककर जान देने की कोशिश की। किसी तरह उसकी जान बचाई गई। फिलहाल लड़की को लेकर माता-पिता में कोई भी संजीदा नहीं है। बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन की भूमिका भी लड़की को उसके घर पहुंचाने को लेकर अच्छी नहीं है।
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