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बरेली जोन में सपा के चहेते कई एसओ की कुर्सी खतरे में
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Wed, 11 Jan 2017 12:53 AM IST
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बरेली जोन के थानों में सपा की छाप लगे दो दर्जन से अधिक थाना प्रभारियों पर एक सप्ताह में गाज गिरने वाली है। इनके बारे में केंद्रीय खुफिया एजेंसी के अलावा स्थानीय खुफिया अफसरों ने भी रिपोर्ट भेज दी है, जिसमें इनके रहते निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाए हैं। क्योंकि इनके तैनाती के दौरान सपा, भाजपा और बसपा नेताओं के बीच में विवादित रहे हैं। ऐसे थानेदारों की सूची चुनाव आयोग ने डीजीपी को भेज दी है, जिसके आधार पर तबादले तय माने जा रहे हैं।
बरेली और रामपुर जिलों के करीब एक दर्जन थाना प्रभारी गोकशी को लेकर विवादित है। इन पर सपा नेताओं को लेकर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे हैं। यहां तक कि कई घटनाओं को लेकर सपा और भाजपा नेता आमने सामने भी हुए थे। इनके अलावा पिछले साल पंचायत चुनाव के दौरान भी विवादित बने थे। कई एसओ दलगत राजनीति के कारण एक पक्ष के होकर रह गए। ऐसे थाना प्रभारियों को नेताओं ने शासन स्तर से दबाव बनवाकर अपने इलाकों में चुनाव में फायदा लेने के उद्देश्य से रोके रखा है।
इन सभी की खुफिया एजेंसियों की ओर से पहले ही सूची तैयार कर ली गई थी। चुनाव की घोषणा और आचार संहिता लगने के बाद आयोग ने जैसे ही दागी और विवादित थाना प्रभारियों की सूची मांगी, वह सूची 72 घंटे के अंदर भेज दी गई। अब उस सूची के आधार पर बरेली, मुरादाबाद मंडल के सभी नौ जिलों के इन थाना प्रभारियों को जोन के अंदर दूसरे जिलों तथा दूसरी जोन में तैनाती की कवायद तेज हो गई है।
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इन सूची में शासनादेश के विपरीत 58 साल से अधिक उम्र के तैनात थाना प्रभारी भी शामिल हैं। इन सभी को भी हटाने की तैयारी है।
पीलीभीत में हाल ही मैं एक प्रभारी निरीक्षक ओवरऐज हो गए थे। चुनाव का एलान होने से एक दिन पहले एसपी ने उन्हें हटाकर नए प्रभारी निरीक्षक की तैनाती कर दी। बरेली शहर में एक प्रभारी निरीक्षक की ओवरऐज होने पर कुर्सी खतरे में हैं। आचार संहिता से अगले ही दिन उनकी उम्र 58 साल से ज्यादा हुई है। इसलिए अभी तक कुर्सी पर बने हुए हैं। बदायूं, शाहजहांपुर के अलावा मुरादाबाद मंडल में भी कई प्रभारी निरीक्षक चुनाव के बीच में ही ओवरऐज हो रहे हैं। इसलिए उनका हटना तय माना जा रहा है।
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बरेली और रामपुर जिलों के करीब एक दर्जन थाना प्रभारी गोकशी को लेकर विवादित है। इन पर सपा नेताओं को लेकर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे हैं। यहां तक कि कई घटनाओं को लेकर सपा और भाजपा नेता आमने सामने भी हुए थे। इनके अलावा पिछले साल पंचायत चुनाव के दौरान भी विवादित बने थे। कई एसओ दलगत राजनीति के कारण एक पक्ष के होकर रह गए। ऐसे थाना प्रभारियों को नेताओं ने शासन स्तर से दबाव बनवाकर अपने इलाकों में चुनाव में फायदा लेने के उद्देश्य से रोके रखा है।
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इन सभी की खुफिया एजेंसियों की ओर से पहले ही सूची तैयार कर ली गई थी। चुनाव की घोषणा और आचार संहिता लगने के बाद आयोग ने जैसे ही दागी और विवादित थाना प्रभारियों की सूची मांगी, वह सूची 72 घंटे के अंदर भेज दी गई। अब उस सूची के आधार पर बरेली, मुरादाबाद मंडल के सभी नौ जिलों के इन थाना प्रभारियों को जोन के अंदर दूसरे जिलों तथा दूसरी जोन में तैनाती की कवायद तेज हो गई है।
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इन सूची में शासनादेश के विपरीत 58 साल से अधिक उम्र के तैनात थाना प्रभारी भी शामिल हैं। इन सभी को भी हटाने की तैयारी है।
पीलीभीत में हाल ही मैं एक प्रभारी निरीक्षक ओवरऐज हो गए थे। चुनाव का एलान होने से एक दिन पहले एसपी ने उन्हें हटाकर नए प्रभारी निरीक्षक की तैनाती कर दी। बरेली शहर में एक प्रभारी निरीक्षक की ओवरऐज होने पर कुर्सी खतरे में हैं। आचार संहिता से अगले ही दिन उनकी उम्र 58 साल से ज्यादा हुई है। इसलिए अभी तक कुर्सी पर बने हुए हैं। बदायूं, शाहजहांपुर के अलावा मुरादाबाद मंडल में भी कई प्रभारी निरीक्षक चुनाव के बीच में ही ओवरऐज हो रहे हैं। इसलिए उनका हटना तय माना जा रहा है।