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लाश लेकर बरेली दौड़े तब टूटी पुलिस की नींद
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 24 Jan 2017 01:10 AM IST
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Bareilly police rushed to the corpse of the broken sleep
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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भुता के डबरा गांव में पेड़ से लटकी मिली अनीश की लाश के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज न कराने पर घर वाले भड़क गए। पोस्टमार्टम के बाद भी पुलिस ने थाने से भगाया तो वे लाश को टेंपो में रखकर दोबारा बरेली में आला अफसरों से न्याय मांगने दौड़ पड़े। इसके बाद पुलिस प्रशासन की नींद टूट तो एसपी देहात की अगुवाई में पहुंची टीम ने भंडसर में टेंपो को रोककर लाश को वापस गांव भेजा गया। इसके बाद तहरीर के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।
30 वर्षीय अनीस शनिवार को अचानक लापता हो गया था। रविवार को उसका शव गांव के बाहर खेत में यूकेलिप्टस के पेड़ से लटका मिला। घर वालों ने रीतराम के बेटे वेतव्रत, ज्ञानदेव और किशनलाल के बेटे ऋषिदेव पर हत्या का आरोप लगाकर तहरीर दी। आरोप है कि पुलिस ने घर वालों को धमकाकर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पोस्टमार्टम के बाद घर वाले ग्रामीणों के साथ थाने गए मगर इस बार भी पुलिस का रवैया वहीं रहा। इससे नाराज होकर उन्होंने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और आला अधिकारियों से गुहार लगाने शव लेकर बरेली चल दिए। इसकी सूचना पुलिस अफसरों को मिली तो एसपी देहात यमुना प्रसाद और सीओ नीति द्विवेदी खुद उन्हें मनाने निकल पड़े। भंडसर में दीवान स्कूल के पास टेंपो को रोककर पहले तो समझाने का प्रयास किया मगर वे नहीं माने तो धमका कर पुलिस ने शव अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस खुद टेंपो लेकर गांव चली गई। पिता विजय बहादुर, मां रूपवती, हरीश, नरवीर, चरन सिंह आदि का कहना था कि पुलिस इसे आत्महत्या बताकर रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। भाई नन्हें लाल यादव के अनुसार नामजद ऋषिदेव, और ज्ञानदेव से 21 जनवरी को किसी बात को लेकर अनीश का झगड़ा हो गया था। आरोप है कि तमंचा दिखाकर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।
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30 वर्षीय अनीस शनिवार को अचानक लापता हो गया था। रविवार को उसका शव गांव के बाहर खेत में यूकेलिप्टस के पेड़ से लटका मिला। घर वालों ने रीतराम के बेटे वेतव्रत, ज्ञानदेव और किशनलाल के बेटे ऋषिदेव पर हत्या का आरोप लगाकर तहरीर दी। आरोप है कि पुलिस ने घर वालों को धमकाकर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पोस्टमार्टम के बाद घर वाले ग्रामीणों के साथ थाने गए मगर इस बार भी पुलिस का रवैया वहीं रहा। इससे नाराज होकर उन्होंने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और आला अधिकारियों से गुहार लगाने शव लेकर बरेली चल दिए। इसकी सूचना पुलिस अफसरों को मिली तो एसपी देहात यमुना प्रसाद और सीओ नीति द्विवेदी खुद उन्हें मनाने निकल पड़े। भंडसर में दीवान स्कूल के पास टेंपो को रोककर पहले तो समझाने का प्रयास किया मगर वे नहीं माने तो धमका कर पुलिस ने शव अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस खुद टेंपो लेकर गांव चली गई। पिता विजय बहादुर, मां रूपवती, हरीश, नरवीर, चरन सिंह आदि का कहना था कि पुलिस इसे आत्महत्या बताकर रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। भाई नन्हें लाल यादव के अनुसार नामजद ऋषिदेव, और ज्ञानदेव से 21 जनवरी को किसी बात को लेकर अनीश का झगड़ा हो गया था। आरोप है कि तमंचा दिखाकर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।
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