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कुनबे के लोग ही शक के दायरे में
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बरेली। महंत ओमी सिंह की हत्या को लेकर बेशुमार संपत्ति मुख्य वजह बताई जा रही है। नामजद रिपोर्ट दर्ज भले ही न कराई गई हो पर परिजन और अनुयायी खुलकर कुछ लोगों के नाम ले रहे थे। पुलिस को भी इस बारे में जानकारी दी गई है। उनके स्वर्गीय भाई हरिहर सिंह की बेटियां और उनका परिवार ही ओमी सिंह का सहारा था। खेती किसानी से मेहनत करके संपत्ति बनाई थी। खेत में ही मंदिर व आश्रम बनाया था जिसकी कीमत करोड़ में थी। क्लासिक लॉ कॉलेज के सामने उनकी आठ बीघा बेशकीमती जमीन थी। बताते हैं कि इस संपत्ति पर परिवार के ही दूसरे लोगों की नजर थी। उन्हें टीस थी कि विवाहित भतीजियों की बजाय संपत्ति उन्हें मिलनी चाहिए थी। इसे लेकर उनका ओमी सिंह से झगड़ा भी हुआ था। बाद में ओमी सिंह कोर्ट चले गए। कोर्ट में उन्होंने दूसरे पक्ष के खिलाफ वाद दायर किया जिसमें सुनवाई चल रही है। बताते हैं कि साल भर पहले उन्होंने कोर्ट के साथ ही एसएसपी दफ्तर में भी ये लिखकर दिया कि संपत्ति को लेकर कुछ लोग दुश्मन हो गए हैं। अगर उन्हें कुछ हुआ तो उसके जिम्मेदार यही लोग होंगे।
भाई की हत्या कर भतीजे ने भी दे दी थी जान
ओमी सिंह के भाई रमेश पाल की कुछ साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में खुद रमेश के बेटे राजू के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई थी। राजू को बतौर आरोपी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेजा। राजू जमानत पर बाहर आया और कुछ दिनों बाद तालाब में डूबकर उसकी मौत हो गई। चर्चा थी कि पिता की हत्या के बाद से वह अवसाद था और खुद आत्महत्या कर ली।
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भाई की हत्या कर भतीजे ने भी दे दी थी जान
ओमी सिंह के भाई रमेश पाल की कुछ साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में खुद रमेश के बेटे राजू के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई थी। राजू को बतौर आरोपी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेजा। राजू जमानत पर बाहर आया और कुछ दिनों बाद तालाब में डूबकर उसकी मौत हो गई। चर्चा थी कि पिता की हत्या के बाद से वह अवसाद था और खुद आत्महत्या कर ली।
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