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एससी एसटी मामलों में पहले से गिरफ्तारी नहीं, फिर हंगामा क्यों

Wed, 04 Apr 2018 05:56 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 04 Apr 2018 05:56 PM IST
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When no arrest in SCST act earlier then why protest?
- फोटो : file pic
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव पर मचे बवाल के बीच सामने आया है कि मंडल में ऐसे मामलों में हर साल 25 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो रही है। दलित संगठनों का विरोध भले ही जांच के बाद एफआईआर और तत्काल गिरफ्तारी नहीं होने के फैसले पर हो, लेकिन विधि जानकारों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट का यह कोई नया फैसला नहीं है। 2010 में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 (1) बी में बदलाव करके ऐसे मामले, जिनमें सात साल तक की सजा होती है, उनमें तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी।
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अभियोजन अधिकारी अनिल कुमार बताते हैं कि एससी-एसटी के सामान्य मामलों में पांच साल तक की सजा होती है। ऐसे में इन मामलों में गिरफ्तारी नहीं बनती। पुलिस भी बाध्य नहीं है। वहीं एससी-एसटी एक्ट के साथ हत्या, दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध जुड़ने पर 10 साल या आजीवन कारावास तक की सजा होती है। इन मामलों में पुलिस तत्काल गिरफ्तारी करती है। उनके मुताबिक, नियमानुसार देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट ने पहले से चली आ रही व्यवस्था को ही दोहराया है।
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मंडल के जिलों में एससी-एसटी एक्ट के दर्ज मामले
जिला 2016 2017
बरेली 182 202
बदायूं 87 125
शाहजहांपुर 159 134
पीलीभीत 118 154

बीते साल 675 मामले हुए दर्ज
मंडल में एससी-एसटी एक्ट के 2016 में 546 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2017 में 675 मामले दर्ज कराए गए। देखा जाए तो करीब पच्चीस फीसदी मामले अधिक सामने आए। एक तबके का कहना है कि एससी-एसटी एक्ट का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।
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