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नवाबगंज पीएचसी, सीएचसी में खुला पहला हेल्थ एंड वेल्थ सेंटर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 18 Aug 2018 04:41 PM IST
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चिकित्सीय सुविधाएं बेहतर करने की दिशा में ब्लॉक स्तर पर सीएचसी और पीएचसी में हेल्थ एंड वेल्थ सेंटर खोलने के एलान के बाद बरेली में नवाबगंज पहला सेंटर बना है। यहां की एक सीएचसी, चार पीएचसी और 29 उपकेंद्रों पर सेंटर खोले गए हैं। सीएमओ विनीत शुक्ला के मुताबिक यहां अच्छे नतीजे मिलने के बाद बाकी ब्लॉक में भी हेल्थ एंड वेल्थ सेंटर खोले जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार ग्रामीणों को अच्छा इलाज मुहैया कराना चाहती है। यही वजह है कि सीएचसी और पीएचसी को चिकित्सीय सुविधाओं के लिहाज से मजबूत किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से जारी सर्कुलर के मुताबिक यहां तैनात जीएनएम को ब्रिज कोर्स कराया जाना है। जिसके बाद वह केंद्र पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभालेगी।
डायरिया पखवाड़ा : दूध की बोतल से होता है इंफेक्शन
जन्म के छह महीने तक स्तनपान कराने के लिए डॉक्टर कहते हैं। दूध की बोतल से इंफेक्शन की आशंका रहती है। 27 जुलाई से शुरू हो रहे डायरिया पखवाड़ा के तहत आशा डोर टू डोर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। डायरिया के बाद कमजोर हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें ओआरएस और जिंक की गोलियां देंगी। इसके तहत सीएचसी और पीएचसी में ओआरएस कार्नर भी बनाया जाएगा। डायरिया के शिकार बच्चे को आशा मौके पर जिंक की आधी गोली खिलाएगी। वहीं आधी गोली उसकी मां को खिलाई जाएगी, ताकि स्तनपान के वक्त बच्चे तक दवा पहुंच जाए।
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अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार ग्रामीणों को अच्छा इलाज मुहैया कराना चाहती है। यही वजह है कि सीएचसी और पीएचसी को चिकित्सीय सुविधाओं के लिहाज से मजबूत किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से जारी सर्कुलर के मुताबिक यहां तैनात जीएनएम को ब्रिज कोर्स कराया जाना है। जिसके बाद वह केंद्र पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभालेगी।
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डायरिया पखवाड़ा : दूध की बोतल से होता है इंफेक्शन
जन्म के छह महीने तक स्तनपान कराने के लिए डॉक्टर कहते हैं। दूध की बोतल से इंफेक्शन की आशंका रहती है। 27 जुलाई से शुरू हो रहे डायरिया पखवाड़ा के तहत आशा डोर टू डोर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। डायरिया के बाद कमजोर हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें ओआरएस और जिंक की गोलियां देंगी। इसके तहत सीएचसी और पीएचसी में ओआरएस कार्नर भी बनाया जाएगा। डायरिया के शिकार बच्चे को आशा मौके पर जिंक की आधी गोली खिलाएगी। वहीं आधी गोली उसकी मां को खिलाई जाएगी, ताकि स्तनपान के वक्त बच्चे तक दवा पहुंच जाए।
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