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अस्पतालों में खून निकालकर बिना जांच किए मरीजों को चढ़ा रहे डॉक्टर
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आंवला। निजी अस्पताल कमाई के लालच में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने में लगे हैं। न तो इन अस्पतालों में सुविधाएं हैं और न ही कस्बे में कोई ब्लड बैंक। फिर भी यह अस्पताल मरीजों को खून चढ़ा रहा है। जिस ब्लड ग्रुप की जरूरत होती उसे अस्पताल में ही उस ग्रुप के डोनर को बुलाकर निकाल लिया जाता है, फिर बिना किसी जांच के इसे मरीज को चढ़ा दिया जाता है। जिससे मरीज की जान को खतरा बना रहता है।
यह आरोप बृहस्पतिवार को प्रसूता पूनम की मौत के बाद उनके पति राम सिंह ने लगाए हैं। उनका कहना है कि न्यू जीवन ज्योति अस्पताल के संचालक डॉ. मनोज यादव ने उससे दो यूनिट ब्लड के पैसा लेकर स्वयं ही रक्त का इंतजाम किया था। सूत्रों के अनुसार कस्बे में दो से तीन नर्सिंग होम ऐसे हैं जहां डोनर को पैसे का लालच देकर नर्सिंग होम में ही ब्लड निकाल कर बिना जांच किए ही रोगियों को चढ़ा दिया जाता है।
आशा की बात न मानते तो बच जाती पूनम की जान
बिलारी निवासी मृतका पूनम के पति राम सिंह ने बताया कि भमोरा में तैनात आशा वर्कर के साथ वह पत्नी पूनम को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंवला लाए थे। वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन आशा ने सुरक्षित प्रसव करवाने का यकीन दिलाते हुए उन्हें जिला अस्पताल जाने से रोक दिया और जीवन ज्योति नर्सिंग होम में ले आई।
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बिना जांच किए खून चढ़ाने से रोगी की जान को खतरा हो सकता है, इस मामले को उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और कस्बे के अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी, यदि ऐसा मामला पकड़ में आया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेंद्र कुमार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी आंवला
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यह आरोप बृहस्पतिवार को प्रसूता पूनम की मौत के बाद उनके पति राम सिंह ने लगाए हैं। उनका कहना है कि न्यू जीवन ज्योति अस्पताल के संचालक डॉ. मनोज यादव ने उससे दो यूनिट ब्लड के पैसा लेकर स्वयं ही रक्त का इंतजाम किया था। सूत्रों के अनुसार कस्बे में दो से तीन नर्सिंग होम ऐसे हैं जहां डोनर को पैसे का लालच देकर नर्सिंग होम में ही ब्लड निकाल कर बिना जांच किए ही रोगियों को चढ़ा दिया जाता है।
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आशा की बात न मानते तो बच जाती पूनम की जान
बिलारी निवासी मृतका पूनम के पति राम सिंह ने बताया कि भमोरा में तैनात आशा वर्कर के साथ वह पत्नी पूनम को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंवला लाए थे। वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन आशा ने सुरक्षित प्रसव करवाने का यकीन दिलाते हुए उन्हें जिला अस्पताल जाने से रोक दिया और जीवन ज्योति नर्सिंग होम में ले आई।
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बिना जांच किए खून चढ़ाने से रोगी की जान को खतरा हो सकता है, इस मामले को उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और कस्बे के अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी, यदि ऐसा मामला पकड़ में आया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेंद्र कुमार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी आंवला