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मेरठ में तैनात इंस्पेक्टर बरेली में चलवा रहे टेंपो
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बरेली। मेरठ में तैनात बरेली निवासी एक इंस्पेक्टर यहां टेंपो चलवा रहे हैं। उनका रिश्तेदार ड्राइवर पुलिस का लोगो लगाकर टेंपो चलाता मिला तो एसपी ट्रैफिक ने टेंपो पकड़कर पुलिस लाइन में खड़ा करा दिया। बाद में उस पर अधिकतम जुर्माना डालने के आदेश दिए।
एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार शुक्रवार को सेटेलाइट चौराहे पर वाहनों की चेकिंग करा रहे थे। उन्हें एक टेंपो दिखाई दिया जिस पर पुलिस का लोगो लगा था। ये देखकर वे हैरत में पड़ गए। उन्होंने टेंपो को पुलिस लाइन में खड़ा करा दिया। शनिवार को उनके पास टेंपो छोड़ने की सिफारिशें आनी शुरू हो गईं। भुता निवासी मुन्नालाल टेंपो छुड़ाने एसपी ट्रैफिक के दफ्तर आया। उनसे कहा कि उनके मौसेरे भाई मेरठ में पुलिस इंस्पेक्टर हैं। वह शहर के जगतपुर के निवासी हैं और उनकी पत्नी के नाम पर ये टेंपो निकाला गया है। भाई ने ये टेंपो उन्हें चलाने को दे रखा है। पुलिस का लोगो लगाने के बारे में जब एसपी ट्रैफिक ने नाराजगी जताई तो मुन्नालाल ने बचाव किया कि भाई ने नहीं कहा था, ये लोगो उसने खुद ही लगवा लिया। इसकी वजह से उसे पुलिस बेवजह नहीं रोकती, पार्किंग आदि का खर्चा भी बच जाता है। एसपी ट्रैफिक ने टीआई परवेज अली को निर्देश दिए कि लोगो हटाकर ही टेंपो को रिलीज किया जाए और इस पर अधिकतम जुर्माना डाला जाए।
बीस फीसदी टेंपो पुलिसवालों के
शहर में बेहिसाब टेंपो चल रहे हैं। लाइसेंस से करीब दोगुने टेंपो यहां संचालित हैं। इनमें भी करीब बीस फीसदी टेंपो पुलिसकर्मियों के हैं। शहर में बस गए कई रिटायर पुलिसकर्मी व दूसरे शहरों में तैनात वर्दी वाले किराये पर अपने टेंपो चलवा रहे हैं। अधिकांश ने पत्नी तो कई ने बेटों व रिश्तेदारों के नाम से टेंपो निकलवा रखे हैैं। पुलिसकर्मियों को टेंपो चलवाने से दोहरा लाभ होता है। उनका फालतू का खर्च नहीं होता। कई जगह स्टाफ वाले रियायत देते हैं तो टेंपो यूनियन वाले भी कोई टैक्स नहीं वसूलते।
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पुलिस लिखा टेंपो पकड़ा गया था। उसका लोगो हटवाकर उस पर अधिकतम जुर्माना डाला जा रहा है। टेंपो मेरठ में तैनात इंस्पेक्टर का बताया जा रहा है। ड्राइवर को लोगो न लगाने के बारे में चेतावनी दे दी गई है। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी ट्रैफिक
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एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार शुक्रवार को सेटेलाइट चौराहे पर वाहनों की चेकिंग करा रहे थे। उन्हें एक टेंपो दिखाई दिया जिस पर पुलिस का लोगो लगा था। ये देखकर वे हैरत में पड़ गए। उन्होंने टेंपो को पुलिस लाइन में खड़ा करा दिया। शनिवार को उनके पास टेंपो छोड़ने की सिफारिशें आनी शुरू हो गईं। भुता निवासी मुन्नालाल टेंपो छुड़ाने एसपी ट्रैफिक के दफ्तर आया। उनसे कहा कि उनके मौसेरे भाई मेरठ में पुलिस इंस्पेक्टर हैं। वह शहर के जगतपुर के निवासी हैं और उनकी पत्नी के नाम पर ये टेंपो निकाला गया है। भाई ने ये टेंपो उन्हें चलाने को दे रखा है। पुलिस का लोगो लगाने के बारे में जब एसपी ट्रैफिक ने नाराजगी जताई तो मुन्नालाल ने बचाव किया कि भाई ने नहीं कहा था, ये लोगो उसने खुद ही लगवा लिया। इसकी वजह से उसे पुलिस बेवजह नहीं रोकती, पार्किंग आदि का खर्चा भी बच जाता है। एसपी ट्रैफिक ने टीआई परवेज अली को निर्देश दिए कि लोगो हटाकर ही टेंपो को रिलीज किया जाए और इस पर अधिकतम जुर्माना डाला जाए।
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बीस फीसदी टेंपो पुलिसवालों के
शहर में बेहिसाब टेंपो चल रहे हैं। लाइसेंस से करीब दोगुने टेंपो यहां संचालित हैं। इनमें भी करीब बीस फीसदी टेंपो पुलिसकर्मियों के हैं। शहर में बस गए कई रिटायर पुलिसकर्मी व दूसरे शहरों में तैनात वर्दी वाले किराये पर अपने टेंपो चलवा रहे हैं। अधिकांश ने पत्नी तो कई ने बेटों व रिश्तेदारों के नाम से टेंपो निकलवा रखे हैैं। पुलिसकर्मियों को टेंपो चलवाने से दोहरा लाभ होता है। उनका फालतू का खर्च नहीं होता। कई जगह स्टाफ वाले रियायत देते हैं तो टेंपो यूनियन वाले भी कोई टैक्स नहीं वसूलते।
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पुलिस लिखा टेंपो पकड़ा गया था। उसका लोगो हटवाकर उस पर अधिकतम जुर्माना डाला जा रहा है। टेंपो मेरठ में तैनात इंस्पेक्टर का बताया जा रहा है। ड्राइवर को लोगो न लगाने के बारे में चेतावनी दे दी गई है। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी ट्रैफिक