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इस्लामियां इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य को जेल
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बरेली। लाखों के गबन के मामले में क्राइम ब्रांच ने एफआर इस्लामियां इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य नजमुल हसन को मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। पिछले साल कोतवाली में मैनेजर और एक टीचर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में पूर्व प्रधानाचार्य का नाम भी सामने आया था।
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एफआर इस्लामियां इंटर कॉलेज में आडिट कराया गया था। ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई थी। आडिट रिपोर्ट 13 जुलाई 2018 को दी गई थी। इसके अगले दिन 14 जुलाई को कॉलेज प्रबंध समिति के मोहम्मद नफीस अंसारी की ओर से कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें इस्लामियां इंटर कॉलेज के प्रबंधक मो. ईसार अहमद और शिक्षक अहमद अली को नामजद किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक प्रबंधक मो. ईसार अहमद ने पद का दुरुपयोग करते हुए शिक्षक मो. अली से सांठगांठ कर बच्चों की संचायिका के 9.41 लाख रुपये निकाल लिए। इन रुपयों को विद्यालय में बिल्डिंग बनवाने के नाम पर फर्जी तरीके से खर्च करना दिखाया गया था। इसके अलावा विद्यालय की विकास निधि से भी 7.08 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह रकम विद्यालय की रंगाई पुताई एवं विद्यालय की मरम्मत पर खर्च करना दिखाया गया, जबकि कॉलेज में कहीं भी ऐसा कार्य नजर नहीं आया। कुछ दिनों बाद ही विवेचना क्राइम ब्रांच को भेज दी गई थी।
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सुरेंद्र यादव ने बताया कि गबन के दौरान एफआर इस्लामियां इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल नजमुल हसन थे। संचायिका और विकास निधि की नजमुल हसन के हस्ताक्षर से निकाली गई थी। वह गबन के मुख्य आरोपी हैं। क्राइम ब्रांच ने सबूत जुटाने के बाद आरोपी और इस्लामियां कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इंस्पेक्टर सुरेंद्र यादव ने बताया कि इस मुकदमे में नामजद कराए गए मो. ईसार अहमद ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। टीचर मो. अली की गिरफ्तार की कोशिश को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
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जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एफआर इस्लामियां इंटर कॉलेज में आडिट कराया गया था। ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई थी। आडिट रिपोर्ट 13 जुलाई 2018 को दी गई थी। इसके अगले दिन 14 जुलाई को कॉलेज प्रबंध समिति के मोहम्मद नफीस अंसारी की ओर से कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें इस्लामियां इंटर कॉलेज के प्रबंधक मो. ईसार अहमद और शिक्षक अहमद अली को नामजद किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक प्रबंधक मो. ईसार अहमद ने पद का दुरुपयोग करते हुए शिक्षक मो. अली से सांठगांठ कर बच्चों की संचायिका के 9.41 लाख रुपये निकाल लिए। इन रुपयों को विद्यालय में बिल्डिंग बनवाने के नाम पर फर्जी तरीके से खर्च करना दिखाया गया था। इसके अलावा विद्यालय की विकास निधि से भी 7.08 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह रकम विद्यालय की रंगाई पुताई एवं विद्यालय की मरम्मत पर खर्च करना दिखाया गया, जबकि कॉलेज में कहीं भी ऐसा कार्य नजर नहीं आया। कुछ दिनों बाद ही विवेचना क्राइम ब्रांच को भेज दी गई थी।
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क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सुरेंद्र यादव ने बताया कि गबन के दौरान एफआर इस्लामियां इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल नजमुल हसन थे। संचायिका और विकास निधि की नजमुल हसन के हस्ताक्षर से निकाली गई थी। वह गबन के मुख्य आरोपी हैं। क्राइम ब्रांच ने सबूत जुटाने के बाद आरोपी और इस्लामियां कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इंस्पेक्टर सुरेंद्र यादव ने बताया कि इस मुकदमे में नामजद कराए गए मो. ईसार अहमद ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। टीचर मो. अली की गिरफ्तार की कोशिश को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
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