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एसएसपी के आदेश पर भी नहीं लिखी बारादरी पुलिस ने रिपोर्ट
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बरेली। दो दिन पहले एक कारोबारी को आनंद आश्रम के पास ठग लिया गया। एसएसपी दफ्तर से फोन करने के बावजूद बारादरी पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। तब से वह थाना-चौकी के चक्कर लगा रहे हैं।
हरिशंकर लाल गुप्ता बारादरी कटरा चांद खां निवासी हैं। 17 जून को उन्हें कछला जाना था। सुबह ऑटो के इंतजार में मालियों की पुलिया चौराहा पर खड़े थे। तभी एक टेंपो आया, जिसमें चालक के अलावा एक व्यक्ति और था। हरिशंकर ऑटो में बैठ गए। वहां उन्हें दूसरे व्यक्ति ने बताया कि उसे कासगंज जाना था पर वहां की ट्रेन निरस्त हो गई है। आनंद आश्रम के पास पहुंचने पर चालक ने टेंपो खराब होने की कहकर दोनों को उतार दिया। तभी एक अन्य व्यक्ति पहुंचा। उसने खुद को सरकारी ड्राइवर बताकर कासगंज जाने की बात कही। दूसरे व्यक्ति ने हरिशंकर और अपना किराया तय किया। इसी दौरान उस व्यक्ति ने पीला लिफाफा देकर हरिशंकर से उनके गले में पड़ी सोने की चेन और अंगूठियां रखने को कहा, उनका ऐसा करने के बाद हस्ताक्षर करने के बहाने लिफाफा लिया और उनका ध्यान बंटने पर दूसरा दे दिया। फिर गाड़ी लाने की बात कहकर चला गया और नहीं लौटा। तभी वहां एक बाइक सवार पहुंचा, जिस पर दूसरा व्यक्ति भी बैठकर चला गया। हरिशंकर को ठगे जाने की जानकारी पुराने रोडवेज बस अड्डे पहुंचने पर हुई जब उन्होंने लिफाफा खोलकर देखा। उसमें गिट्टियां निकलीं।
हरिशंकर के मुताबिक उन्होंने उसी समय बारादरी थाने जाकर तहरीर दी, लेकिन उन्हें घर भेज दिया गया। अगले दिन वह एसएसपी से मिले। एसएसपी कार्यालय से बारादरी थाने फोन किया गया। वह वहां गए पर रिपोर्ट फिर भी नहीं लिखी गई। अगले दिन वहां गए तो शहामतगंज चौकी भेज दिया गया। वहां भी रिपोर्ट नहीं लिखी गई, तब से वह थाना-चौकी के चक्कर लगा रहे हैं।
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हरिशंकर लाल गुप्ता बारादरी कटरा चांद खां निवासी हैं। 17 जून को उन्हें कछला जाना था। सुबह ऑटो के इंतजार में मालियों की पुलिया चौराहा पर खड़े थे। तभी एक टेंपो आया, जिसमें चालक के अलावा एक व्यक्ति और था। हरिशंकर ऑटो में बैठ गए। वहां उन्हें दूसरे व्यक्ति ने बताया कि उसे कासगंज जाना था पर वहां की ट्रेन निरस्त हो गई है। आनंद आश्रम के पास पहुंचने पर चालक ने टेंपो खराब होने की कहकर दोनों को उतार दिया। तभी एक अन्य व्यक्ति पहुंचा। उसने खुद को सरकारी ड्राइवर बताकर कासगंज जाने की बात कही। दूसरे व्यक्ति ने हरिशंकर और अपना किराया तय किया। इसी दौरान उस व्यक्ति ने पीला लिफाफा देकर हरिशंकर से उनके गले में पड़ी सोने की चेन और अंगूठियां रखने को कहा, उनका ऐसा करने के बाद हस्ताक्षर करने के बहाने लिफाफा लिया और उनका ध्यान बंटने पर दूसरा दे दिया। फिर गाड़ी लाने की बात कहकर चला गया और नहीं लौटा। तभी वहां एक बाइक सवार पहुंचा, जिस पर दूसरा व्यक्ति भी बैठकर चला गया। हरिशंकर को ठगे जाने की जानकारी पुराने रोडवेज बस अड्डे पहुंचने पर हुई जब उन्होंने लिफाफा खोलकर देखा। उसमें गिट्टियां निकलीं।
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हरिशंकर के मुताबिक उन्होंने उसी समय बारादरी थाने जाकर तहरीर दी, लेकिन उन्हें घर भेज दिया गया। अगले दिन वह एसएसपी से मिले। एसएसपी कार्यालय से बारादरी थाने फोन किया गया। वह वहां गए पर रिपोर्ट फिर भी नहीं लिखी गई। अगले दिन वहां गए तो शहामतगंज चौकी भेज दिया गया। वहां भी रिपोर्ट नहीं लिखी गई, तब से वह थाना-चौकी के चक्कर लगा रहे हैं।
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