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बहेड़ी में अवैध खनन- विधायक जी! इंस्पेक्टर ‘पाक-साफ’ तो फिर क्या आप..
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बरेली। अवैध खनन पर बहेड़ी के भाजपा विधायक छत्रपाल और इंस्पेक्टर के बीच शुरू हुई जंग अब ठंडी पड़ गई है। इंस्पेक्टर के खिलाफ बदसलूकी करने और खनन माफिया का साथ देने का आरोप लगाने वाले भाजपा विधायक ने उन्हें हटाने की मांग पर अपने कदम वापस खींच लिए तो उधर एसपी देहात ने भी अब इंस्पेक्टर को अपनी जांच में क्लीन चिट दे दी है। उधर, ईद के दिन पकड़े गए अवैध खनन में एक माननीय के भतीजे का हाथ बताने वाली बहेड़ी पुलिस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। अब सवाल उठ रहे हैं कि विधायक इस प्रकरण में एकाएक खामोश क्यों हो गए।
टियूला में उझानी के शंकर गुप्ता और संदीप गुप्ता के नाम खनन का पट्टा है। दो जून को थाना बहेड़ी में शंकर गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 31 मई की दोपहर भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह चौधरी ने तमाम लोगों के साथ शंकर गुप्ता के पास पहुंचकर खनन के बदले एक लाख रुपये महीना मांगा। महीना न देने पर उनके ट्रक और डंपर नहीं निकलने देने की धमकी दी थी। इंकार करने पर मोहन सिंह ने मजदूरों और ड्राइवरों से मारपीट की थी। तीन जून को भाजपाई विधायक को लेकर थाने गए तो इंस्पेक्टर से तनातनी हो गई। विधायक ने इसके बाद इंस्पेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर और अपने समर्थकों के साथ जाकर एडीजी से मिले थे। भाजपा नेताओं पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाते हुए इंस्पेक्टर को तुरंत हटाने की मांग की। एडीजी ने जांच एसपी देहात डॉ. संसार सिंह से कराई। एसपी देहात ने जांच में विधायक के आरोप खारिज करते हुए अपनी रिपोर्ट एडीजी को सौंप दी है।
एसपीआरए की जांच रिपोर्ट मिल गई है। इंस्पेक्टर पर अभद्रता करने का आरोप गलत पाया गया। थाने में भीड़ ले जाकर इंस्पेक्टर पर गलत तरीके से दबाव बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की गई थी। थाने पहुंची भीड़ में नामजद आरोपी भी शामिल थे, जो गलत तरीका था। इंस्पेक्टर ने वही किया जो एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को करना चाहिए। - अविनाश चंद्र, एडीजी
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टियूला में उझानी के शंकर गुप्ता और संदीप गुप्ता के नाम खनन का पट्टा है। दो जून को थाना बहेड़ी में शंकर गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 31 मई की दोपहर भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह चौधरी ने तमाम लोगों के साथ शंकर गुप्ता के पास पहुंचकर खनन के बदले एक लाख रुपये महीना मांगा। महीना न देने पर उनके ट्रक और डंपर नहीं निकलने देने की धमकी दी थी। इंकार करने पर मोहन सिंह ने मजदूरों और ड्राइवरों से मारपीट की थी। तीन जून को भाजपाई विधायक को लेकर थाने गए तो इंस्पेक्टर से तनातनी हो गई। विधायक ने इसके बाद इंस्पेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर और अपने समर्थकों के साथ जाकर एडीजी से मिले थे। भाजपा नेताओं पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाते हुए इंस्पेक्टर को तुरंत हटाने की मांग की। एडीजी ने जांच एसपी देहात डॉ. संसार सिंह से कराई। एसपी देहात ने जांच में विधायक के आरोप खारिज करते हुए अपनी रिपोर्ट एडीजी को सौंप दी है।
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एसपीआरए की जांच रिपोर्ट मिल गई है। इंस्पेक्टर पर अभद्रता करने का आरोप गलत पाया गया। थाने में भीड़ ले जाकर इंस्पेक्टर पर गलत तरीके से दबाव बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की गई थी। थाने पहुंची भीड़ में नामजद आरोपी भी शामिल थे, जो गलत तरीका था। इंस्पेक्टर ने वही किया जो एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को करना चाहिए। - अविनाश चंद्र, एडीजी
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