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आर्य समाज अनाथालय में मिली लापता बच्ची सोफिया
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बरेली। आठ दिन से लापता पांच साल की सोफिया आखिरकार मिल ही गई। अलीगढ़ के ट्विंकल कांड से सहमी बारादरी पुलिस ने उसे खोज निकाला। अब सीडब्ल्यूसी के जरिये विधिक प्रक्रिया के बाद बच्ची परिवार को सौंपी जाएगी। बच्ची के मिलने से परिजन खुश हैं तो पुलिस की भी बड़ी टेंशन दूर हुई है।
करेंगी निवासी इकरार की बेटी सोफिया कुछ दिन पहले मां के साथ नाना शौकत के घर आई थी। तीन जून को जब सोफिया की मां और नानी जिला अस्पताल में दवा लेने गई तब वह घर के बाहर से लापता हो गई। इंस्पेक्टर बारादरी कृष्णवीर सिंह और दरोगा नसीम अहमद ने आर्य समाज अनाथालय में जाकर पूछताछ की तो पता लगा कि एक बच्ची तीन जून से वहां है। देखा तो वह सोफिया निकली। सूचना पर परिवार वाले भी पहुंचे। दरोगा नसीम खां ने बताया कि घरवालों ने पुलिस को भ्रमित किया। बच्ची मां और नानी के साथ जिला अस्पताल आई थी और यहीं से खेलते हुए भटक गई। वे लोग उसकी ननिहाल के आसपास सीसीटीवी कैमरे देखकर परेशान थे। यहां से गायब होना बताया जाता तो वह पहले ही मिल जाती।
सिस्टम में फाल्ट न होता तो पहले मिल जाती बच्ची
तीन जून को अस्पताल के बाहर भटकती सोफिया को एक ऑटो ड्राइवर ने प्रेमनगर थाने पहुंचा दिया। वहां से प्रेमनगर पुलिस ने उसे बाल संरक्षण समिति के जरिये अनाथालय को सौंप दिया। पूरे घटनाक्रम में पुलिस विभाग से लेकर अन्य संस्थाओं तक समन्वय का खासा अभाव रहा। अखबारों से लेकर सोशल मीडिया तक पर सोफिया के लापता होने की चर्चा थी पर प्रेमनगर पुलिस ने इसका जिक्र नहीं किया। वहीं चाइल्ड लाइन और अनाथालय प्रबंधन ने भी बारादरी पुलिस को सूचना नहीं दी।
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करेंगी निवासी इकरार की बेटी सोफिया कुछ दिन पहले मां के साथ नाना शौकत के घर आई थी। तीन जून को जब सोफिया की मां और नानी जिला अस्पताल में दवा लेने गई तब वह घर के बाहर से लापता हो गई। इंस्पेक्टर बारादरी कृष्णवीर सिंह और दरोगा नसीम अहमद ने आर्य समाज अनाथालय में जाकर पूछताछ की तो पता लगा कि एक बच्ची तीन जून से वहां है। देखा तो वह सोफिया निकली। सूचना पर परिवार वाले भी पहुंचे। दरोगा नसीम खां ने बताया कि घरवालों ने पुलिस को भ्रमित किया। बच्ची मां और नानी के साथ जिला अस्पताल आई थी और यहीं से खेलते हुए भटक गई। वे लोग उसकी ननिहाल के आसपास सीसीटीवी कैमरे देखकर परेशान थे। यहां से गायब होना बताया जाता तो वह पहले ही मिल जाती।
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सिस्टम में फाल्ट न होता तो पहले मिल जाती बच्ची
तीन जून को अस्पताल के बाहर भटकती सोफिया को एक ऑटो ड्राइवर ने प्रेमनगर थाने पहुंचा दिया। वहां से प्रेमनगर पुलिस ने उसे बाल संरक्षण समिति के जरिये अनाथालय को सौंप दिया। पूरे घटनाक्रम में पुलिस विभाग से लेकर अन्य संस्थाओं तक समन्वय का खासा अभाव रहा। अखबारों से लेकर सोशल मीडिया तक पर सोफिया के लापता होने की चर्चा थी पर प्रेमनगर पुलिस ने इसका जिक्र नहीं किया। वहीं चाइल्ड लाइन और अनाथालय प्रबंधन ने भी बारादरी पुलिस को सूचना नहीं दी।
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