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प्रेम विवाह की सजा : कृष्णा कब आएगा अपने अंगना
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बरेली। बुलंदशहर जिले में प्रेम विवाह करने की सजा प्रेमी युगल को किस्तों में मिली। लड़की के पिता के नाबालिग होने की रिपोर्ट दर्ज कराने पर वे पहले जेल और नारी निकेतन में रहे फिर मासूम बेटे की तलाश में भटके जिसे किसी ने अपनाया ही नहीं। दो साल पहले उन्हें पता लगा कि उनकी बेटा बरेली की संस्था में पल रहा है। अब उसे घर ले जाने की लिखापढ़ी तेज की है। जल्द ही बेटा मिलने की उम्मीद है। उससे मिलने की खातिर अक्सर यहां आते हैं।
बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाने के बदर खां गांव निवासी रवि और मीना यहां पुलिस लाइन के सामने बार्न बेबी फोल्ड संस्था के परिसर में आए थे। रवि ने बताया कि गांव की ही मीना से उसके प्रेम संबंध थे। उन्होंने घर से भागकर 13 जनवरी 2014 को शादी कर ली। इसके बाद मीना के पिता ने उसे नाबालिग बताते हुए रिपोर्ट करा दी। वे लोग काफी समय दूसरे शहरों में रहे। एक दिसंबर 2014 को बुलंदशहर के गुलावटी सीएचसी में मीना ने बेटे कृष्णा को जन्म दिया। इसके डेढ़ महीने बाद मीना के पिता की सूचना पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। तब उसे रवि को कुछ दिन जेल में और मीना को नारी निकेतन में रहना पड़ा। कृष्णा को लेने से उसके नाना ने इनकार कर दिया और ददिहाल पक्ष के लोग डर से सामने नहीं आए। तब वहां से लावारिस बतौर सीडब्ल्यूसी के जरिए बच्चे के बरेली की बार्न बेबी फोल्ड संस्था में भेज दिया गया। जेल और नारी निकेतन से निकलने के बाद वे लोग सुरक्षा के लिहाज से बाहरी शहरों में रहे। खोजबीन शुरू की तो दो साल बाद बेटे के यहां होने की जानकारी हो सकी। वे आए तो पता लगा कि बच्चे का एक पैर टेढ़ा है। संस्था उसका इलाज करा रही है। कहा गया कि कुछ समय इंतजार कर लें। अब हाईकोर्ट के जरिए लिखापढ़ी शुरू हुई है तो बच्चा मिलने के आसार बढ़े हैं। बताया कि बेटे को जल्द से जल्द घर ले जाना चाहते हैं।
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बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाने के बदर खां गांव निवासी रवि और मीना यहां पुलिस लाइन के सामने बार्न बेबी फोल्ड संस्था के परिसर में आए थे। रवि ने बताया कि गांव की ही मीना से उसके प्रेम संबंध थे। उन्होंने घर से भागकर 13 जनवरी 2014 को शादी कर ली। इसके बाद मीना के पिता ने उसे नाबालिग बताते हुए रिपोर्ट करा दी। वे लोग काफी समय दूसरे शहरों में रहे। एक दिसंबर 2014 को बुलंदशहर के गुलावटी सीएचसी में मीना ने बेटे कृष्णा को जन्म दिया। इसके डेढ़ महीने बाद मीना के पिता की सूचना पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। तब उसे रवि को कुछ दिन जेल में और मीना को नारी निकेतन में रहना पड़ा। कृष्णा को लेने से उसके नाना ने इनकार कर दिया और ददिहाल पक्ष के लोग डर से सामने नहीं आए। तब वहां से लावारिस बतौर सीडब्ल्यूसी के जरिए बच्चे के बरेली की बार्न बेबी फोल्ड संस्था में भेज दिया गया। जेल और नारी निकेतन से निकलने के बाद वे लोग सुरक्षा के लिहाज से बाहरी शहरों में रहे। खोजबीन शुरू की तो दो साल बाद बेटे के यहां होने की जानकारी हो सकी। वे आए तो पता लगा कि बच्चे का एक पैर टेढ़ा है। संस्था उसका इलाज करा रही है। कहा गया कि कुछ समय इंतजार कर लें। अब हाईकोर्ट के जरिए लिखापढ़ी शुरू हुई है तो बच्चा मिलने के आसार बढ़े हैं। बताया कि बेटे को जल्द से जल्द घर ले जाना चाहते हैं।
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