{"_id":"5babb50e867a552c9418b384","slug":"151537979662-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उमरिया वाले बोले - खजुरिया वालों से हमें क्या दिक्कत, ये तो आज भी यही से जाते हैं","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
उमरिया वाले बोले - खजुरिया वालों से हमें क्या दिक्कत, ये तो आज भी यही से जाते हैं
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 26 Sep 2018 10:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांवड़ निकालने के विरोध से शुरू हुए विवाद ने कब सियासी रूप ले लिया, ये न खजुरिया वाले समझ सके न उमरिया में रहने वाले। चौपाल चाहे उमरिया गांव की हो या खजुरिया की... दो महीने से पुलिस दबिश और गिरफ्तारियों के बाद दोनों गांव के लोग आपसी सौहार्द की बात कहते सुने जा रहे हैं।
बुधवार को भी उमरिया का बाजार बंद रहा। गांव की करीब 70 फीसदी आबादी पुलिस की दबिश से घबराकर भागी हुई है। दरअसल, बलवा के बाद पुलिस ने खजुरिया में लाठी भांजकर 16 ग्रामीणों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इसके बाद उमरिया गांव की घेराबंदी करके ताबड़तोड़ दबिशें दी गईं। आईएमसी नेता हाजी शराफत सहित 37 बवाल के आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। अभी भी दर्जनों आरोपी फरार हैं। जिनको पकड़ने के लिए पुलिस सक्रिय है।
उमरिया में एक जगह इकट्ठा लोग आपस में बात करते सुने गए कि खजुरिया के लोग आज भी इन्हीं रास्तों से होकर जाते हैं। तनाव होता तो क्या कोई निकल पाता। अब ये पुलिस वाले ही तनाव का माहौल बनाए हुए हैं। वहीं खजुरिया के लोगों ने बातचीत में बताया कि हमारे गांवों के बीच आज तक कभी विवाद नहीं हुआ।
विज्ञापन
कहीं पति तो कहीं बेटे का इंतजार
खजुरिया में पसरे सन्नाटे में दरवाजे की ओट से कुछ बच्चे और महिलाएं झांकती दिखीं। रास्तों पर आहट होती तो उनकी निगाहें अपनों को तलाशने लगती। किसी को पति का इंतजार है तो किसी को बेटे का। मासूम यह नहीं समझ पा रहे कि अचानक उनके पिता कहां चले गए। इन सबके बीच गांव में होने वाले कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।
खजुरिया के रास्तों को ताकते दिखे उमरिया के लोग
खजुरिया में घुसने की कोशिश करने वाले उमरिया के लोग अब भी पुलिस की मौजूदगी से खौफजदा है। पुलिस कार्रवाई के खौफ में उमरिया में हर जगह लोगों की निगाह खजुरिया के रास्ते को ताकती हुई नजर आई।
विज्ञापन
बुधवार को भी उमरिया का बाजार बंद रहा। गांव की करीब 70 फीसदी आबादी पुलिस की दबिश से घबराकर भागी हुई है। दरअसल, बलवा के बाद पुलिस ने खजुरिया में लाठी भांजकर 16 ग्रामीणों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इसके बाद उमरिया गांव की घेराबंदी करके ताबड़तोड़ दबिशें दी गईं। आईएमसी नेता हाजी शराफत सहित 37 बवाल के आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। अभी भी दर्जनों आरोपी फरार हैं। जिनको पकड़ने के लिए पुलिस सक्रिय है।
विज्ञापन
उमरिया में एक जगह इकट्ठा लोग आपस में बात करते सुने गए कि खजुरिया के लोग आज भी इन्हीं रास्तों से होकर जाते हैं। तनाव होता तो क्या कोई निकल पाता। अब ये पुलिस वाले ही तनाव का माहौल बनाए हुए हैं। वहीं खजुरिया के लोगों ने बातचीत में बताया कि हमारे गांवों के बीच आज तक कभी विवाद नहीं हुआ।
विज्ञापन
कहीं पति तो कहीं बेटे का इंतजार
खजुरिया में पसरे सन्नाटे में दरवाजे की ओट से कुछ बच्चे और महिलाएं झांकती दिखीं। रास्तों पर आहट होती तो उनकी निगाहें अपनों को तलाशने लगती। किसी को पति का इंतजार है तो किसी को बेटे का। मासूम यह नहीं समझ पा रहे कि अचानक उनके पिता कहां चले गए। इन सबके बीच गांव में होने वाले कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।
खजुरिया के रास्तों को ताकते दिखे उमरिया के लोग
खजुरिया में घुसने की कोशिश करने वाले उमरिया के लोग अब भी पुलिस की मौजूदगी से खौफजदा है। पुलिस कार्रवाई के खौफ में उमरिया में हर जगह लोगों की निगाह खजुरिया के रास्ते को ताकती हुई नजर आई।