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सरेंडर अर्जी देकर भी हाजिर नहीं हुए पाताराम के हत्यारोपी
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बरेली। कैंट थाना क्षेत्र में बभिया के हिस्ट्रीशीटर पाताराम की हत्या के सभी छह आरोपियों को पुलिस तलाश कर रही है। इन लोगों ने कोर्ट में अर्जी देकर चार फरवरी को हाजिर होने की इच्छा जताई थी। कोर्ट ने इस बारे में कैंट थाने से जानकारी तलब की। इसके बावजूद आरोपी सोमवार शाम तक कोर्ट में हाजिर नहीं हुए।
18 जनवरी को सद्भावना कॉलोनी में पाताराम को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। उसकी हत्या के बाद बड़े भाई लालाराम ने बंटी, बंटू यादव, जट्टा उर्फ विवेक, हिम्मत सिंह के खिलाफ हत्या और नवल सिंह व रक्षपाल के खिलाफ हत्या की साजिश रचने की रिपोर्ट कैंट थाने में दर्ज कराई थी। आरोप है कि यह लोग पाताराम के पास मौजूद करीब सवा लाख रुपया और उसकी कार भी ले गए थे। तब से आज तक कैंट पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। हालांकि साजिश रचने के आरोपियों की गतिविधियां शहर और आसपास के इलाके में देखी गई हैं पर पुलिस का तर्क है कि सभी के घरों से फरार होने और मोबाइल बंद रखने की वजह से दिक्कत आ रही है। अब इन लोगों ने एक बार फिर पुलिस को गच्चा दिया है। पुलिस मान रही थी कि आरोपियों के सरेंडर होने के बाद वह इन्हें रिमांड पर लेकर हत्या के साक्ष्य जुटा लेगी पर वे आए ही नहीं। बताते हैं कि कोर्ट के बाहर पुलिस की गतिविधियों से घबराकर आरोपी नहीं पहुंचे। हालांकि इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने इसे गलत बताया। कहा कि कोर्ट के बाहर गिरफ्तारी का कोई इरादा नहीं था। वे सरेंडर कर देते तो उन्हें रिमांड पर लेते। कोर्ट ने केस के संबंध में जो सूचनाएं मांगी थीं वो दे दी गई थीं।
18 जनवरी को सद्भावना कॉलोनी में पाताराम को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। उसकी हत्या के बाद बड़े भाई लालाराम ने बंटी, बंटू यादव, जट्टा उर्फ विवेक, हिम्मत सिंह के खिलाफ हत्या और नवल सिंह व रक्षपाल के खिलाफ हत्या की साजिश रचने की रिपोर्ट कैंट थाने में दर्ज कराई थी। आरोप है कि यह लोग पाताराम के पास मौजूद करीब सवा लाख रुपया और उसकी कार भी ले गए थे। तब से आज तक कैंट पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। हालांकि साजिश रचने के आरोपियों की गतिविधियां शहर और आसपास के इलाके में देखी गई हैं पर पुलिस का तर्क है कि सभी के घरों से फरार होने और मोबाइल बंद रखने की वजह से दिक्कत आ रही है। अब इन लोगों ने एक बार फिर पुलिस को गच्चा दिया है। पुलिस मान रही थी कि आरोपियों के सरेंडर होने के बाद वह इन्हें रिमांड पर लेकर हत्या के साक्ष्य जुटा लेगी पर वे आए ही नहीं। बताते हैं कि कोर्ट के बाहर पुलिस की गतिविधियों से घबराकर आरोपी नहीं पहुंचे। हालांकि इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने इसे गलत बताया। कहा कि कोर्ट के बाहर गिरफ्तारी का कोई इरादा नहीं था। वे सरेंडर कर देते तो उन्हें रिमांड पर लेते। कोर्ट ने केस के संबंध में जो सूचनाएं मांगी थीं वो दे दी गई थीं।
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