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रेल में चाचा और भतीजे ने कब्जाई दिव्यांग की सीट
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बरेली। साधारण कोच में जगह न मिलने पर चाचा भतीजा दिव्यांग कोच में चढ़ गए। आरोप है कि उन्होंने एक दिव्यांग को बर्थ से हटाकर उसकी सीट कब्जा ली। पीड़ित ने रेलवे कंट्रोल मुरादाबाद को मेसेज किया, जिसके बाद जंक्शन पर आरपीएफ ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
बिहार के रंजीत मंडल भतीजे अरुण के साथ अवध असम एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। मैरवा स्टेशन से रंजीत और अरुण ट्रेन में सवार हुए। पहले वह साधारण कोच में पहुंचे, लेकिन वहां तिल रखने की जगह नहीं थी। इसके बाद ट्रेन चलने को हुई तो वह दिव्यांग कोच में चढ़ गए। आरोप है कि दोनों ने एक सीट पर लेटे एक दिव्यांग यात्री को हटा दिया और दोनों उसकी सीट पर लेट गए। सुबह उसने रेलवे कंट्रोल को मेसेज करके घटना की जानकारी दी। मेसेज जंक्शन पहुंचा तो आरपीएफ अलर्ट हो गई। ट्रेन सुबह करीब दस बजे जंक्शन पहुंची। आरपीएफ ने दोनों को कोच से उतार लिया। आरोपी अरुण का कहना है कि वह इलाज कराने दिल्ली जा रहा था, लेकिन उसने किसी को बर्थ से नहीं उतारा, वह तो कोच के फर्श पर सो गया था। आरपीएफ ने दोनों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत दे दी गई।
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बिहार के रंजीत मंडल भतीजे अरुण के साथ अवध असम एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। मैरवा स्टेशन से रंजीत और अरुण ट्रेन में सवार हुए। पहले वह साधारण कोच में पहुंचे, लेकिन वहां तिल रखने की जगह नहीं थी। इसके बाद ट्रेन चलने को हुई तो वह दिव्यांग कोच में चढ़ गए। आरोप है कि दोनों ने एक सीट पर लेटे एक दिव्यांग यात्री को हटा दिया और दोनों उसकी सीट पर लेट गए। सुबह उसने रेलवे कंट्रोल को मेसेज करके घटना की जानकारी दी। मेसेज जंक्शन पहुंचा तो आरपीएफ अलर्ट हो गई। ट्रेन सुबह करीब दस बजे जंक्शन पहुंची। आरपीएफ ने दोनों को कोच से उतार लिया। आरोपी अरुण का कहना है कि वह इलाज कराने दिल्ली जा रहा था, लेकिन उसने किसी को बर्थ से नहीं उतारा, वह तो कोच के फर्श पर सो गया था। आरपीएफ ने दोनों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत दे दी गई।
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