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ठग कंपनी के चेक भी हो गए बाउंस
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:06 AM IST
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पीलीभीत और बरेली के करीब 500 लोगों को एक करोड़ का चूना लगाकर फरार हुई रियल इंडिया ठग कंपनी के लोगों ने मामला सुलझाने के बहाने पीड़ितों के साथ एक और फर्जीवाड़ा कर दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कंपनी के तीन डायरेक्टरों ने पीड़ितों को 75 लाख रुपये के चेक दिए थे लेकिन ये सभी चेक बाउंस हो गए।
बारादरी की क्रिस्टल कॉलोनी में विजय प्रताप सिंह के मकान में सात दिसंबर 2015 को रियल इंडिया का ऑफिस खोला गया था। बरेली और पीलीभीत के करीब 500 लोगों ने कंपनी में करीब एक करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बाद कंपनी के लोग फरार हुए तो विजय प्रताप सिंह ने पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आलमबाग लखनऊ के सोमनाथ अग्रहरि, संतप्रसाद मिश्रा उर्फ एसपी मिश्रा जोनल मैनेजर, रामपुर के सफाखाना निवासी प्रदीप गुप्ता, उनकी पत्नी ज्योति गुप्ता, जलालाबाद (शाहजहांपुर) के गुनारा गांव निवासी सुष्मिता सक्सेना, आलमबाग लखनऊ निवासी पंकज श्रीवास्तव, सिविल लाइंस नार्थ पीलीभीत निवासी प्रतीक मिश्रा, एलडीए कॉलोनी कानपुर के नितिन श्रीवास्तव को नामजद किया गया। विजय ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कंपनी के डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता, प्रतीक मिश्रा और सुष्मिता सक्सेना ने उनसे संपर्क कर रिपोर्ट वापस लेने पर निवेशकों का एक-एक पैसा लौटाने की बात कहीं। इसके बाद प्रदीप ने 30 लाख, प्रतीक ने 20 लाख और सुष्मिता ने 25 लाख रुपये के चेक दिए। मगर तीनों चेक बाउंस हो गए। विजय का आरोप है कि इस मामले में सुनगढ़ी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
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बारादरी की क्रिस्टल कॉलोनी में विजय प्रताप सिंह के मकान में सात दिसंबर 2015 को रियल इंडिया का ऑफिस खोला गया था। बरेली और पीलीभीत के करीब 500 लोगों ने कंपनी में करीब एक करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बाद कंपनी के लोग फरार हुए तो विजय प्रताप सिंह ने पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आलमबाग लखनऊ के सोमनाथ अग्रहरि, संतप्रसाद मिश्रा उर्फ एसपी मिश्रा जोनल मैनेजर, रामपुर के सफाखाना निवासी प्रदीप गुप्ता, उनकी पत्नी ज्योति गुप्ता, जलालाबाद (शाहजहांपुर) के गुनारा गांव निवासी सुष्मिता सक्सेना, आलमबाग लखनऊ निवासी पंकज श्रीवास्तव, सिविल लाइंस नार्थ पीलीभीत निवासी प्रतीक मिश्रा, एलडीए कॉलोनी कानपुर के नितिन श्रीवास्तव को नामजद किया गया। विजय ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कंपनी के डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता, प्रतीक मिश्रा और सुष्मिता सक्सेना ने उनसे संपर्क कर रिपोर्ट वापस लेने पर निवेशकों का एक-एक पैसा लौटाने की बात कहीं। इसके बाद प्रदीप ने 30 लाख, प्रतीक ने 20 लाख और सुष्मिता ने 25 लाख रुपये के चेक दिए। मगर तीनों चेक बाउंस हो गए। विजय का आरोप है कि इस मामले में सुनगढ़ी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
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