{"_id":"61803e2a29529f43c31cd3f4","slug":"crime-bareilly-news-bly464909454","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व विधायक को उम्रकैद: हवा की रफ्तार से मुजफ्फरनगर पहुंच गई पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व विधायक को उम्रकैद: हवा की रफ्तार से मुजफ्फरनगर पहुंच गई पुलिस
Tue, 02 Nov 2021 01:04 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 01:04 AM IST
सार
पूर्व विधायक को उम्रकैद का मामला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बदायूं। सत्ता पक्ष के दबाव में पुलिस किस तरह काम करती है, छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म कांड से समझा जा सकता है। साल 2008 में जिले की पुलिस पूर्व विधायक योगेंद्र सागर के इशारे पर नाच रही थी। विवेचक हों या अफसर, सब यह भूल गए कि विवेचना की खामियां उनके गले की फांस भी बन सकती हैं। पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को सजा होने के बाद पीड़िता के परिवार और जनता को उम्मीद है कि चिह्नित पुलिस वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
बिल्सी की छात्रा के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म कांड की न्यायालय में जब सुनवाई और अधिवक्ताओं के बीच जिरह हुई तो इसमें पुलिस के कई झूठ सामने आए। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अरुण कुमार सक्सेना के मुताबिक पुलिस का पहला झूठ यह सामने आया है कि छात्रा को नाटकीय ढंग से मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन से बरामद दिखाया गया। दूसरा झूठ यह रहा कि पुलिस ने यह दर्शाया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि छात्रा मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर है। जब तक पुलिस करीब 265 किमी का सफर तय कर आठ घंटे में वहां पहुंची, तब तक छात्रा वहीं खड़ी रही जैसे कि वह पुलिस के आने का इंतजार कर रही थी। तीसरा झूठ यह था कि वह बुर्का पहने थी। बुर्का कहां गया, इसका जिक्र विवेचना में नहीं आया। पुलिस के रिकार्ड में जिक्र था कि छात्रा अपनी ननद के घर जाने के लिए निकली थी, पर उसके पास से न तो टिकट बरामद दिखाया गया और न ही कोई सामान और रुपया। यहां तक कि उसके पास कोई कपड़े भी नहीं दिखाए गए। जबकि आमतौर पर रिश्तेदारी में जाते वक्त लोग कुछ कपड़े साथ ले ही जाते हैं। चौथा झूठ यह था कि पुलिस ने दिखाया था कि वह ननद के घर अकेली ही जा रही थी। ननद कौन थी, बिना पते के वह अकेले कैसे जा रही थी, इसका जिक्र भी रिकार्ड में कभी नहीं आया।
पांचवा झूठा यह था कि छात्रा युवक से बात करती थी। उससे निकाह कर लिया पर पुलिस ने इस संबंध में कोई निकाहनामा विवेचना के पर्चे में दाखिल नहीं दिखाया। पुलिस यह भी पुष्ट नहीं कर पाई कि छात्रा ने उक्त लड़के से कब से कब तक बात की। कहा-उसने अपहरण के तीसरे दिन ही भागकर निकाह कर लिया। लड़का कौन था, उसकी अगली और पिछली क्या कहानी है इसका विवरण भी विवेचना में नहीं आया। न ही कभी उक्त युवक को न्यायालय में पेश किया गया। छठा झूठ यह था कि जिला महिला अस्पताल में जहां इमरजेंसी में चौबीस घंटे महिला रोग विशेषज्ञ तैनात रहतीं हैं वहां महिला डॉक्टर का गैर मौजूदगी दिखाकर उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छात्रा को ले जाया गया ? केवल यही नहीं सत्तापक्ष के दबाव में पुलिस ने कई और झूठ बोले। पीड़ित परिवार चाहता है कि दोषी पुलिस वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़िता के भाई ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी राय लेंगे।
विज्ञापन
-
हवा की रफ्तार से मुजफ्फरनगर पहुंच गई पुलिस
वैसे तो नियम के मुताबिक दूसरे जिले में दबिश देने के लिए पुलिस को उच्चाधिकारियों का आदेश लेना पड़ा है लेकिन इस मामले में न तो उच्चाधिकारियों का आदेश लिया गया और न ही मुजफ्फरनगर के संबंधित थाने में जाकर आमद दर्ज कराई गई। 265 किमी का सफर पुलिस ने कुछ घंटों में पूरा कर लिया जैसे मुजफ्फरनगर नहीं बिल्सी का कोई मोहल्ला हो। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। खुद पीड़िता ने कहा था कि उसे तेजेंद्र व अन्य ने गाड़ी से मुजफ्फरनगर में जहां छोड़ा था, वहां बिल्सी और मुजफ्फरनगर पुलिस पहले से ही खड़ी थी।
-
सवाल तब भी उठे, अफसर पर्दा डालते रहे
छात्रा के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म कांड के मामले में आज जो सवाल उठ रहे हैं वह पहले भी उठे थे लेकिन उस समय माहौल अलग था। नीचे से ऊपर तक पुलिस सत्तापक्ष के दबाव में थी। पुलिस से मीडिया ने भी सवाल किए थे लेकिन वह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी।
-
छात्रा प्रकरण को पहले से नजरअंदाज करती रही बिल्सी पुलिस
छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म कांड को थाना पुलिस पहले से ही नजरअंदाज कर रही थी। छात्रा 23 अप्रैल 2008 को अगवा हुई थी। परिवारवालों ने उसी दिन पुलिस को सूचना दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। परिवार वालों ने 29 अप्रैल को फिर तहरीर दी। इस पर पुलिस ने केवल गुमशुदगी दर्ज की। फिर एक मई को तहरीर दी गई, उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। चार मई को पुलिस ने गुमशुदगी को अपहरण की धारा में तरमीम किया।
-
हाईकोर्ट ने भी की पुलिस पर टिप्पणी
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अरुण कुमार सक्सेना के मुताबिक सागर की जमानत याचिका खारिज करने के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर टिप्पणी की थी। लिखा था कि पुलिस जनप्रतिनिधि के इशारों पर काम करती प्रतीत हो रही है। इस वजह से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में अवरोध आ रहा है। सक्सेना के मुताबिक पीड़ित पक्ष चाहे तो वह इस मामले में पुलिसवालों के खिलाफ कोर्ट में अलग से शिकायत कर सकता है।
विज्ञापन
बिल्सी की छात्रा के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म कांड की न्यायालय में जब सुनवाई और अधिवक्ताओं के बीच जिरह हुई तो इसमें पुलिस के कई झूठ सामने आए। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अरुण कुमार सक्सेना के मुताबिक पुलिस का पहला झूठ यह सामने आया है कि छात्रा को नाटकीय ढंग से मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन से बरामद दिखाया गया। दूसरा झूठ यह रहा कि पुलिस ने यह दर्शाया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि छात्रा मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर है। जब तक पुलिस करीब 265 किमी का सफर तय कर आठ घंटे में वहां पहुंची, तब तक छात्रा वहीं खड़ी रही जैसे कि वह पुलिस के आने का इंतजार कर रही थी। तीसरा झूठ यह था कि वह बुर्का पहने थी। बुर्का कहां गया, इसका जिक्र विवेचना में नहीं आया। पुलिस के रिकार्ड में जिक्र था कि छात्रा अपनी ननद के घर जाने के लिए निकली थी, पर उसके पास से न तो टिकट बरामद दिखाया गया और न ही कोई सामान और रुपया। यहां तक कि उसके पास कोई कपड़े भी नहीं दिखाए गए। जबकि आमतौर पर रिश्तेदारी में जाते वक्त लोग कुछ कपड़े साथ ले ही जाते हैं। चौथा झूठ यह था कि पुलिस ने दिखाया था कि वह ननद के घर अकेली ही जा रही थी। ननद कौन थी, बिना पते के वह अकेले कैसे जा रही थी, इसका जिक्र भी रिकार्ड में कभी नहीं आया।
विज्ञापन
पांचवा झूठा यह था कि छात्रा युवक से बात करती थी। उससे निकाह कर लिया पर पुलिस ने इस संबंध में कोई निकाहनामा विवेचना के पर्चे में दाखिल नहीं दिखाया। पुलिस यह भी पुष्ट नहीं कर पाई कि छात्रा ने उक्त लड़के से कब से कब तक बात की। कहा-उसने अपहरण के तीसरे दिन ही भागकर निकाह कर लिया। लड़का कौन था, उसकी अगली और पिछली क्या कहानी है इसका विवरण भी विवेचना में नहीं आया। न ही कभी उक्त युवक को न्यायालय में पेश किया गया। छठा झूठ यह था कि जिला महिला अस्पताल में जहां इमरजेंसी में चौबीस घंटे महिला रोग विशेषज्ञ तैनात रहतीं हैं वहां महिला डॉक्टर का गैर मौजूदगी दिखाकर उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छात्रा को ले जाया गया ? केवल यही नहीं सत्तापक्ष के दबाव में पुलिस ने कई और झूठ बोले। पीड़ित परिवार चाहता है कि दोषी पुलिस वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़िता के भाई ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी राय लेंगे।
विज्ञापन
-
हवा की रफ्तार से मुजफ्फरनगर पहुंच गई पुलिस
वैसे तो नियम के मुताबिक दूसरे जिले में दबिश देने के लिए पुलिस को उच्चाधिकारियों का आदेश लेना पड़ा है लेकिन इस मामले में न तो उच्चाधिकारियों का आदेश लिया गया और न ही मुजफ्फरनगर के संबंधित थाने में जाकर आमद दर्ज कराई गई। 265 किमी का सफर पुलिस ने कुछ घंटों में पूरा कर लिया जैसे मुजफ्फरनगर नहीं बिल्सी का कोई मोहल्ला हो। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। खुद पीड़िता ने कहा था कि उसे तेजेंद्र व अन्य ने गाड़ी से मुजफ्फरनगर में जहां छोड़ा था, वहां बिल्सी और मुजफ्फरनगर पुलिस पहले से ही खड़ी थी।
-
सवाल तब भी उठे, अफसर पर्दा डालते रहे
छात्रा के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म कांड के मामले में आज जो सवाल उठ रहे हैं वह पहले भी उठे थे लेकिन उस समय माहौल अलग था। नीचे से ऊपर तक पुलिस सत्तापक्ष के दबाव में थी। पुलिस से मीडिया ने भी सवाल किए थे लेकिन वह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी।
-
छात्रा प्रकरण को पहले से नजरअंदाज करती रही बिल्सी पुलिस
छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म कांड को थाना पुलिस पहले से ही नजरअंदाज कर रही थी। छात्रा 23 अप्रैल 2008 को अगवा हुई थी। परिवारवालों ने उसी दिन पुलिस को सूचना दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। परिवार वालों ने 29 अप्रैल को फिर तहरीर दी। इस पर पुलिस ने केवल गुमशुदगी दर्ज की। फिर एक मई को तहरीर दी गई, उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। चार मई को पुलिस ने गुमशुदगी को अपहरण की धारा में तरमीम किया।
-
हाईकोर्ट ने भी की पुलिस पर टिप्पणी
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अरुण कुमार सक्सेना के मुताबिक सागर की जमानत याचिका खारिज करने के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर टिप्पणी की थी। लिखा था कि पुलिस जनप्रतिनिधि के इशारों पर काम करती प्रतीत हो रही है। इस वजह से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में अवरोध आ रहा है। सक्सेना के मुताबिक पीड़ित पक्ष चाहे तो वह इस मामले में पुलिसवालों के खिलाफ कोर्ट में अलग से शिकायत कर सकता है।