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पॉकेट मनी से चॉकलेट खरीदकर पुलिस को खिलाई, कहा- थैंक यू
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पॉकेट मनी से चॉकलेट खरीदकर पुलिस को खिलाई, कहा- थैंक यू
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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हैदराबाद कांड के आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराने से पुलिस पर बढ़ा भरोसा
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बरेली। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले चारों आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराने के बाद शहर में भी बेटियों ने खुशी मनाते हुए पुलिस की हौसला अफजाई की। छात्राओं ने जगह-जगह पुलिस को चॉकलेट खिलाकर थैंक यू बोला। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे नेहा, सोनी, दिशा समेत कुछ छात्राएं पटेल चौराहे पर पहुंचीं। वहां इंस्पेक्टर गीतेश कपिल समेत अन्य पुलिसकर्मियों को चॉकलेट खिलाकर थैंक यू बोला। पुलिसकर्मी छात्राओं से चॉकलेट लेने में संकोच करने लगे तो छात्राएं बोलीं- हमने अपनी पॉकेटमनी से खरीदी हैं। पुलिस ने आज ऐतिहासिक काम किया है, इसलिए हम सब खुश हैं।
आरोपियों के एनकाउंटर पर जुदा रही लोगों की राय
बरेली। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्क र्म के बाद हत्या करने वाले चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। आरोपियों की मौत की सूचना मिलने पर डॉक्टर बिटिया के लिए इंसाफ की मांग कर रहे लोगों की जब पुलिस की इस कार्रवाई पर राय जानी गई तो लोग दो खेमों में बंटे दिखाई दिए। महिलाओं के एक पक्ष ने इस कार्रवाई को कानून की सालों साल चलने वाली लंबी प्रक्रिया से बेहतर बताया तो दूसरे पक्ष ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कहा- दोषियों को मौत मिलनी चाहिए थी, लेकिन यह सजा कानून को देनी चाहिए थी।
महिलाओं से बात
- हैदराबाद कांड के आरोपियों को मारकर पुलिस ने सही किया है। ऐसे अपराधियों के साथ यही होना चाहिए, ताकि लोग इससे सबक लें और इस तरह का जघन्य अपराध करने से पहले सौ बार सोचें। - नीलम सक्सेना, गृहणी
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- दोषी अगर कोर्ट पहुंचते तो इस मामले का हश्र भी निर्भया कांड जैसा ही होता। कानून के हिसाब से पुलिस ने भले ही गलत किया हो पर जनता यही चाहती थी और ठीक वैसा ही हुआ है। - सीमा, गृहणी
- आरोपियों का एनकाउंटर किया जाना प्रत्येक स्थिति में सही है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो निर्भया कांड की तरह ही डॉक्टर बिटिया के परिवार को भी इंसाफ के कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता। - आदर्श शर्मा, व्यवसायी
- दोषियों को और भी भयानक सजा मिलनी चाहिए थी, लेकिन अगर आरोपी कोर्ट पहुंचते तो बहस और सुबूतों को लेकर लंबी प्रकिया चलती और सजा भी उम्रकैद की मिलती, जो सही नहीं होता। - पदमासिनी पाठक, गृहणी
- आरोपियों को कानून के दायरे में रहकर सजा मिलनी चाहिए थी। एनकाउंटर करना संविधान का मखौल उड़ाना है। इससे पुलिस की अराजकता बढ़ेगी और समाज को ही पीड़ा होगी। - मनु नीरज, समाजसेविका
- जो भी हुआ वह एकबारगी के लिए सही कहा जा सकता है, लेकिन दोषियों को कानून का उल्लंघन कर सजा देना ठीक नहीं है। इससे सामाजिक ताना बाना पूरी तरह बिखर जाएगा। - मधु वर्मा, समाजसेविका
- दोषियों को मार डालने का निर्णय किन परिस्थतियों में हुआ यह तो नहीं पता लेकिन जो हुआ सही हुआ। सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए कि कोई ऐसी हरकत करने से पहले डरे। - सुषमा खंडेलवाल, गृहणी
- सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन एनकाउंटर किया जाना बेहद गलत है। पुलिस को कानून के दायरे में रहना चाहिए था, कोर्ट सजा देता तो वह संवैधानिक रूप से भी सही रहता। - शिवली खान, चित्रकार
- पुलिस ने जो किया, उसे अगर पब्लिक के नजरिए से देखें तो ठीक है लेकिन कानून के बाहर जाकर आवेश में आकर दोषियों को गोली मार देने की घटना भी सही नहीं कही जा सकती। - मोनिका, गृहणी
- दोषियों की मौत से जनता को शांति मिली है। अब यह एनकाउंटर पब्लिक को शांत करने के लिए किया गया या फिर दोषियों को सजा देने के लिए, दोनों ही परिस्थितियों में सही है। - उषा गोयल, गृहणी
- ऐसे दरिंदोे को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए थी। हैदराबाद पुलिस ने डॉक्टर बिटिया के साथ इंसाफ किया है। एनकाउंटर से दरिंदों में खौफ होगा और हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित रहेंगी। - पम्मी खान वारसी, समाजसेवी
आरोपियों के एनकाउंटर पर जुदा रही लोगों की राय
बरेली। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्क र्म के बाद हत्या करने वाले चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। आरोपियों की मौत की सूचना मिलने पर डॉक्टर बिटिया के लिए इंसाफ की मांग कर रहे लोगों की जब पुलिस की इस कार्रवाई पर राय जानी गई तो लोग दो खेमों में बंटे दिखाई दिए। महिलाओं के एक पक्ष ने इस कार्रवाई को कानून की सालों साल चलने वाली लंबी प्रक्रिया से बेहतर बताया तो दूसरे पक्ष ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कहा- दोषियों को मौत मिलनी चाहिए थी, लेकिन यह सजा कानून को देनी चाहिए थी।
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महिलाओं से बात
- हैदराबाद कांड के आरोपियों को मारकर पुलिस ने सही किया है। ऐसे अपराधियों के साथ यही होना चाहिए, ताकि लोग इससे सबक लें और इस तरह का जघन्य अपराध करने से पहले सौ बार सोचें। - नीलम सक्सेना, गृहणी
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- दोषी अगर कोर्ट पहुंचते तो इस मामले का हश्र भी निर्भया कांड जैसा ही होता। कानून के हिसाब से पुलिस ने भले ही गलत किया हो पर जनता यही चाहती थी और ठीक वैसा ही हुआ है। - सीमा, गृहणी
- आरोपियों का एनकाउंटर किया जाना प्रत्येक स्थिति में सही है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो निर्भया कांड की तरह ही डॉक्टर बिटिया के परिवार को भी इंसाफ के कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता। - आदर्श शर्मा, व्यवसायी
- दोषियों को और भी भयानक सजा मिलनी चाहिए थी, लेकिन अगर आरोपी कोर्ट पहुंचते तो बहस और सुबूतों को लेकर लंबी प्रकिया चलती और सजा भी उम्रकैद की मिलती, जो सही नहीं होता। - पदमासिनी पाठक, गृहणी
- आरोपियों को कानून के दायरे में रहकर सजा मिलनी चाहिए थी। एनकाउंटर करना संविधान का मखौल उड़ाना है। इससे पुलिस की अराजकता बढ़ेगी और समाज को ही पीड़ा होगी। - मनु नीरज, समाजसेविका
- जो भी हुआ वह एकबारगी के लिए सही कहा जा सकता है, लेकिन दोषियों को कानून का उल्लंघन कर सजा देना ठीक नहीं है। इससे सामाजिक ताना बाना पूरी तरह बिखर जाएगा। - मधु वर्मा, समाजसेविका
- दोषियों को मार डालने का निर्णय किन परिस्थतियों में हुआ यह तो नहीं पता लेकिन जो हुआ सही हुआ। सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए कि कोई ऐसी हरकत करने से पहले डरे। - सुषमा खंडेलवाल, गृहणी
- सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन एनकाउंटर किया जाना बेहद गलत है। पुलिस को कानून के दायरे में रहना चाहिए था, कोर्ट सजा देता तो वह संवैधानिक रूप से भी सही रहता। - शिवली खान, चित्रकार
- पुलिस ने जो किया, उसे अगर पब्लिक के नजरिए से देखें तो ठीक है लेकिन कानून के बाहर जाकर आवेश में आकर दोषियों को गोली मार देने की घटना भी सही नहीं कही जा सकती। - मोनिका, गृहणी
- दोषियों की मौत से जनता को शांति मिली है। अब यह एनकाउंटर पब्लिक को शांत करने के लिए किया गया या फिर दोषियों को सजा देने के लिए, दोनों ही परिस्थितियों में सही है। - उषा गोयल, गृहणी
- ऐसे दरिंदोे को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए थी। हैदराबाद पुलिस ने डॉक्टर बिटिया के साथ इंसाफ किया है। एनकाउंटर से दरिंदों में खौफ होगा और हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित रहेंगी। - पम्मी खान वारसी, समाजसेवी