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.. कहीं स्मैक की मंडी में छिड़ी गैंगवार के शिकार तो नहीं हुए असलम
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फतेहगंज पश्चिमी। प्रदेश में फतेहगंज पश्चिमी कस्बा स्मैक तस्करी की बड़ी मंडी के तौर पर जाना जाने लगा है। यहां कई सफेदपोश भी इस धंधे से जुड़े हैं। दूसरे प्रांतों की पुलिस और एजेंसियां अक्सर दबिश देकर तस्करों को पकड़ ले जाती हैं। रबड़ फैक्ट्री से हो रही कबाड़ चोरी ने भी थाने को महत्वपूर्ण बना दिया है। सूत्र बताते हैं कि इंस्पेक्टरों में सर्वाधिक होड़ यहां तैनाती को लेकर रहती है। अब सपा के पूर्व नगराध्यक्ष की हत्या इसी धंधे का साइड इफेक्ट बताई जा रही है तो यहां गैंगवार छिड़ने का अंदेशा भी बन गया है।
सपा सरकार में असलम खान पार्टी के नगराध्यक्ष होने के साथ ही काफी प्रभावशाली शख्सियत थे। पुलिस में अच्छी पैठ की वजह से हर तरीके के लोग उनके संपर्क में आ गए थे। तब सपा से ही जुड़े हरीश कातिब से भी उनके अच्छे संबंध थे। दो साल पहले नगरपंचायत चुनाव में दोनों के बीच दूरी बढ़ गई। भाजपा सरकार आई तो हरीश ने बिना सपा छोड़े सत्तापक्ष से नजदीकी बढ़ा ली। इससे असलम के कई समर्थक उनके खेमे में आ गए। इससे दोनों में तनाव काफी बढ़ गया। दोनों गुट एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। करीब पांच माह पहले असलम पर दुष्कर्म की रिपोर्ट हुई। इसमें महिला के बयान न देने पर पुलिस ने एफआर लगा दी। उसके बाद उनके भाई अकरम खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ। इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच कर रही है। इसमें वादी महिला ने एक दरोगा पर असलम की मदद का आरोप लगया था। इस बीच असलम की समर्थक बताई जा रही एक महिला ने हरीश कातिब और उसके एक साथी के खिलाफ दुष्कर्म की तहरीर दी थी। इसमें किसी जरिये से हरीश ने महिला से समझौता कर लिया। इससे दोनों पक्षों में और ठन गई।
दो दिन पहले हरीश कातिब ने कोर्ट में 156 (3) के तहत अर्जी देकर असलम और उनके समर्थक अशोक और उनके बेटे आदि से जान का खतरा होने का संदेह जताया था। इसकी रिपोर्ट पुलिस से मांगी गई थी, इस बीच असलम की हत्या हो गई। चर्चा है कि पांच माह पहले एक स्मैक तस्कर को दिल्ली पुलिस ले गई थी। छूटने के बाद तस्कर से असलम की नोकझोंक हुई थी। दो पक्षों के झगड़े में एक की मदद करने से भी कई लोग उनसे रंजिश मानते थे। ऐसे में संदेह यह भी है कि हत्या किसी तीसरे गैंग ने तो नहीं कर दी। हालांकि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही सच सामने आ सकेगा। कस्बे में भारी पुलिस फोर्स और पीएसी तैनात है। सीओ जगमोहन बुटोला भी मौजूद रहे।
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थानेदारी को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी
फतेहगंज पश्चिमी कस्बे में खाकी और खादी के संरक्षण में स्मैक का धंधा फलफूल रहा है। कस्बे की नई पीढ़ी का बड़ा वर्ग इस नशे में बर्बाद हो चुका है। दिल्ली, रुड़की आईटीआई के छात्र भी यहां स्मैक खरीदने आते हैं जिन्हें कई बार पकड़ा जा चुका है। दिल्ली व दूसरे प्रांतों की पुलिस या एजेंसियां यहां से तस्करों को पकड़ने आती हैं जबकि स्थानीय पुलिस इन पर हाथ डालने से परहेज करती है। इसकी वजह राजनेताओं का धंधे को संरक्षण है। कुछ जनप्रतिनिधि या उनके करीबी इस धंधे से सीधे जुड़ाव रखते हैं। पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस थाने व चौकियों का प्रभार पाने को होड़ मची रहती है। इसके लिए तगड़ी सिफारिशें भी होती हैं। पिछले दिनों दिल्ली में नारकोटिक्स टीम ने एक स्थानीय तस्कर को अस्सी लाख की स्मैक के साथ दबोचा था, अभी मामले की परतें खुलनी बाकी हैं।
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सपा सरकार में असलम खान पार्टी के नगराध्यक्ष होने के साथ ही काफी प्रभावशाली शख्सियत थे। पुलिस में अच्छी पैठ की वजह से हर तरीके के लोग उनके संपर्क में आ गए थे। तब सपा से ही जुड़े हरीश कातिब से भी उनके अच्छे संबंध थे। दो साल पहले नगरपंचायत चुनाव में दोनों के बीच दूरी बढ़ गई। भाजपा सरकार आई तो हरीश ने बिना सपा छोड़े सत्तापक्ष से नजदीकी बढ़ा ली। इससे असलम के कई समर्थक उनके खेमे में आ गए। इससे दोनों में तनाव काफी बढ़ गया। दोनों गुट एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। करीब पांच माह पहले असलम पर दुष्कर्म की रिपोर्ट हुई। इसमें महिला के बयान न देने पर पुलिस ने एफआर लगा दी। उसके बाद उनके भाई अकरम खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ। इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच कर रही है। इसमें वादी महिला ने एक दरोगा पर असलम की मदद का आरोप लगया था। इस बीच असलम की समर्थक बताई जा रही एक महिला ने हरीश कातिब और उसके एक साथी के खिलाफ दुष्कर्म की तहरीर दी थी। इसमें किसी जरिये से हरीश ने महिला से समझौता कर लिया। इससे दोनों पक्षों में और ठन गई।
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दो दिन पहले हरीश कातिब ने कोर्ट में 156 (3) के तहत अर्जी देकर असलम और उनके समर्थक अशोक और उनके बेटे आदि से जान का खतरा होने का संदेह जताया था। इसकी रिपोर्ट पुलिस से मांगी गई थी, इस बीच असलम की हत्या हो गई। चर्चा है कि पांच माह पहले एक स्मैक तस्कर को दिल्ली पुलिस ले गई थी। छूटने के बाद तस्कर से असलम की नोकझोंक हुई थी। दो पक्षों के झगड़े में एक की मदद करने से भी कई लोग उनसे रंजिश मानते थे। ऐसे में संदेह यह भी है कि हत्या किसी तीसरे गैंग ने तो नहीं कर दी। हालांकि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही सच सामने आ सकेगा। कस्बे में भारी पुलिस फोर्स और पीएसी तैनात है। सीओ जगमोहन बुटोला भी मौजूद रहे।
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फतेहगंज पश्चिमी कस्बे में खाकी और खादी के संरक्षण में स्मैक का धंधा फलफूल रहा है। कस्बे की नई पीढ़ी का बड़ा वर्ग इस नशे में बर्बाद हो चुका है। दिल्ली, रुड़की आईटीआई के छात्र भी यहां स्मैक खरीदने आते हैं जिन्हें कई बार पकड़ा जा चुका है। दिल्ली व दूसरे प्रांतों की पुलिस या एजेंसियां यहां से तस्करों को पकड़ने आती हैं जबकि स्थानीय पुलिस इन पर हाथ डालने से परहेज करती है। इसकी वजह राजनेताओं का धंधे को संरक्षण है। कुछ जनप्रतिनिधि या उनके करीबी इस धंधे से सीधे जुड़ाव रखते हैं। पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस थाने व चौकियों का प्रभार पाने को होड़ मची रहती है। इसके लिए तगड़ी सिफारिशें भी होती हैं। पिछले दिनों दिल्ली में नारकोटिक्स टीम ने एक स्थानीय तस्कर को अस्सी लाख की स्मैक के साथ दबोचा था, अभी मामले की परतें खुलनी बाकी हैं।