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फारेहा थोड़ा सब्र और.. अब दुबई में भी नहीं बचेगा जुहेब
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बरेली। गुजारा भत्ता पाने के लिए चार साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही फारेहा रहमान को इंसाफ दिलाने के लिए अदालत ने दुबई में नौकरी कर रहे उसके शौहर को तलब किया है। अदालत की ओर से जारी कई समन दुबई में उसके शौहर तक न पहुंचने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने इस बार उसे विदेश मंत्रालय के जरिये समन तामील कराने का आदेश दिया है।
घेर जाफर खां में रहने वाली फारेहा रहमान चार साल से अदालतों के चक्कर काट रही हैं। अदालत में फारेहा ने अर्जी दी है कि पुराना शहर चक महमूद में रहने वाले मोहम्मद जुहेब से उनकी शादी 14 अप्रैल 2012 को हुई थी। जुहेब दुबई में एचएसबीसी बैंक में नौकरी करता है। शादी में उनके पिता ने दस लाख रुपये खर्च किए थे। ससुराल वालों ने दहेज में कार की भी मांग की लेकिन उनके घर वाले कार नहीं दे पाए। शादी के कुछ समय बाद जुहेब दुबई चला गया तो ससुराल वालों ने उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया। फोन पर जुहेब को भी गुमराह करने लगे। इसके बाद जुहेब ने भी पांच लाख रुपये कैश और उनके पिता का मकान अपने नाम कराने का दबाव फारेहा पर डालना शुरू कर दिया। इसी बीच 12 जून 2012 को गर्भवती फारेहा के साथ मारपीट कर सास ने धक्का दे दिया। बेड का कोना पेट में लगने के बाद दर्द होने पर ससुराल वालों ने ऐसी दवा खिलाई जिससे उनका गर्भपात हो गया। वह थाना बारादरी गईं मगर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी।
ससुराल में लगातार उत्पीड़न से उनके मुंह से खून आने लगा और पूरा शरीर सूज गया। इसी हाल में ही उन्हें मायके भेज दिया गया। कुछ लोगों के बीच में पड़ने के बाद जुहेब उन्हें दुबई ले गया। वहां गर्भवती हुई तो उन्हें अपने मां-बाप के पास छोड़ गया जहां उन्हें फिर परेशान किया जाने लगा। इसी बीच उसने एक बेटी को जन्म दिया। ज्यादा परेशान करने पर उनकी मां उन्हें अपने घर ले गई। फारेहा का कहना है कि वह 2013 से अपने अंधे मां-बाप के पास रह रही हैं जिनकी आमदनी का कोई साधन नहीं है। गुजारा भत्ता का मामला कोर्ट में होने के बाद भी वह कई साल से चक्कर काट रही हैं क्योंकि शौहर को भेजे गए समन तामील ही नहीं हो पाते।
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दुबई भेजे समन में हिंदी में लिखा पता, वापस आ गया
इससे पहले अदालत ने फारेहा रहमान के पति मोहम्मद जुहेब को सीधे दुबई समन भेजने का आदेश दिया लेकिन यह समन हिंदी में पता लिखा होने के कारण वापस लौट आया। अदालत के आदेश के मुताबिक अब समन पहले विदेश मंत्रालय भेजा जाएगा जहां से दुबई में इसे भारतीय दूतावास के जरिये तामील कराया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में आगे सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
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घेर जाफर खां में रहने वाली फारेहा रहमान चार साल से अदालतों के चक्कर काट रही हैं। अदालत में फारेहा ने अर्जी दी है कि पुराना शहर चक महमूद में रहने वाले मोहम्मद जुहेब से उनकी शादी 14 अप्रैल 2012 को हुई थी। जुहेब दुबई में एचएसबीसी बैंक में नौकरी करता है। शादी में उनके पिता ने दस लाख रुपये खर्च किए थे। ससुराल वालों ने दहेज में कार की भी मांग की लेकिन उनके घर वाले कार नहीं दे पाए। शादी के कुछ समय बाद जुहेब दुबई चला गया तो ससुराल वालों ने उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया। फोन पर जुहेब को भी गुमराह करने लगे। इसके बाद जुहेब ने भी पांच लाख रुपये कैश और उनके पिता का मकान अपने नाम कराने का दबाव फारेहा पर डालना शुरू कर दिया। इसी बीच 12 जून 2012 को गर्भवती फारेहा के साथ मारपीट कर सास ने धक्का दे दिया। बेड का कोना पेट में लगने के बाद दर्द होने पर ससुराल वालों ने ऐसी दवा खिलाई जिससे उनका गर्भपात हो गया। वह थाना बारादरी गईं मगर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी।
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ससुराल में लगातार उत्पीड़न से उनके मुंह से खून आने लगा और पूरा शरीर सूज गया। इसी हाल में ही उन्हें मायके भेज दिया गया। कुछ लोगों के बीच में पड़ने के बाद जुहेब उन्हें दुबई ले गया। वहां गर्भवती हुई तो उन्हें अपने मां-बाप के पास छोड़ गया जहां उन्हें फिर परेशान किया जाने लगा। इसी बीच उसने एक बेटी को जन्म दिया। ज्यादा परेशान करने पर उनकी मां उन्हें अपने घर ले गई। फारेहा का कहना है कि वह 2013 से अपने अंधे मां-बाप के पास रह रही हैं जिनकी आमदनी का कोई साधन नहीं है। गुजारा भत्ता का मामला कोर्ट में होने के बाद भी वह कई साल से चक्कर काट रही हैं क्योंकि शौहर को भेजे गए समन तामील ही नहीं हो पाते।
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दुबई भेजे समन में हिंदी में लिखा पता, वापस आ गया
इससे पहले अदालत ने फारेहा रहमान के पति मोहम्मद जुहेब को सीधे दुबई समन भेजने का आदेश दिया लेकिन यह समन हिंदी में पता लिखा होने के कारण वापस लौट आया। अदालत के आदेश के मुताबिक अब समन पहले विदेश मंत्रालय भेजा जाएगा जहां से दुबई में इसे भारतीय दूतावास के जरिये तामील कराया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में आगे सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख निर्धारित की है।