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जेल में बीस बंदियों के साथ स्वामी ने गुजारी रात, मखमली गद्दों की जगह कंबल, चादर और दरी पर लेटे

Sun, 22 Sep 2019 02:37 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sun, 22 Sep 2019 02:37 AM IST
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स्वामी चिन्मयानंद - फोटो : अमर उजाला

मखमली गद्दों पर सोने वाले दुष्कर्म के आरोपी स्वामी चिन्मयानंद की जेल में पहली रात मुश्किलों से कटी। बैरक में कंबल, चादर, दरी के साथ लेेटे स्वामी रात भर करवटें बदलते रहे। शनिवार तड़के 3:30 बजे वह जाग गए। सुबह कुछ देर बैरक में टहले। इसके बाद ध्यान में बैठ गए। दूसरे दिन उनसे मिलने जेल में कोई नहीं पहुंचा। खास यह कि भक्तों से घिरे रहने वाले स्वामी ने रात अब बंदियों के साथ गुजरेगी। उनकी बैरक में बीस बंदी हैं।

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शनिवार को सुबह पांच बजे बंदियों के लिए बैरक खोली गई तो चिन्मयानंद भी सामान्य बंदियों की तरह फ्रेश हुए और फिर सुबह सात बजे सभी के साथ उन्हें भी नाश्ते में दलिया, चाय, गुड़ दिया गया। सुबह 11:30 बजे स्वामी ने जेल का बना हुआ खाना खाया। उन्हें जेल मीनू के हिसाब से अरहर की दाल, आलू की सब्जी और रोटियां दी गईं। उन्हें जिस बैरक में रखा गया हैं, उनमें बीस बंदी और रखे गए हैं। शाम को उनका मेडिकल चेकअप हुआ, जिसमें ब्लड प्रेशर, शुगर आदि नॉर्मल था।
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चेकअप करने मेडिकल कॉलेज के डॉ. केसी वर्मा, डॉ. एमएल अग्रवाल ने उन्हें पुरानी बीमारियों की वजह से नियमित रूप से दवा लेने की सलाह दी। इससे पहले शुक्रवार को जेल भेजे जाने के बाद उनसे मिलने के लिए उनके वकील ओम सिंह व पूजा पहुंचीं थीं।
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विश्वविद्यालय ने छात्रा को प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय को निर्देश दिए थे कि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म के आरोप लगाने वाली एलएलएम की छात्रा की पढ़ाई के लिए दूसरे लॉ कॉलेज में एडमिशन दिलाया जाए, लेकिन अब तक छात्रा ने एडमिशन के लिए कोई कार्यवाही नहीं की है। इस पर विश्वविद्यालय ने छात्रा को पत्र लिखकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि पीड़ित एलएलएम की छात्रा और उसके भाई का भविष्य महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने इस मामले में रुहेलखंड विश्वविद्यालय को निर्देश दिए थे कि छात्रा की मर्जी के मुताबिक रुहेलखंड विश्वविद्यालय उसकी और उसके भाई की पढ़ाई का इंतजाम कराए। मगर छात्रा या उसके भाई ने दूसरे कॉलेज में एडमिशन के लिए विश्वविद्यालय में अब तक आवेदन नहीं किया है। इससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो पाया है। अब विश्वविद्यालय ने छात्रा को पत्र लिखकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराने को लिखा गया है।

‘विश्वविद्यालय छात्रा को उसकी मर्जी के मुताबिक कॉलेज में एडमिशन दिलाने को तैयार है, लेकिन अभी तक छात्रा ने आवेदन नहीं किया है। हम छात्रा के आवेदन का इंतजार कर रहे हैं।

- प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति

चिन्यमयानंद की करतूत से संत समाज में रोष है। हरिद्वार के संतों ने उन्हें अपने समाज से बहिष्कृत कर दिया। तपोनिधि आनंद अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव और बरेली स्थिति अलखनाथ मंदिर के महंत कालू गिरी ने भी उन्हें गलत बताया। कहा कि सृष्टि का यही नियम है, जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। अपने कर्मों का फल मनुष्य हों या साधु संत सभी को भुगतना ही पड़ता है। स्वामी चिन्मयानंद ने गलत काम किया है। इसकी उन्हें सजा मिली है। ऐसे साधु संतों के साथ हम नहीं हैं।

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