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एसएसपी से मिले पादरी, घर में प्रार्थना सभा की अनुमति मांगी
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बरेली। मढ़ीनाथ के एक घर में पिछले दिनों हो रही ईसाई धर्म की प्रार्थना सभा को धर्म परिवर्तन का मामला बताकर पुलिस और पार्षद ने बंद करा दिया था। गुरुवार को कई पादरी एसएसपी से मिले और प्रार्थना सभा को जारी रखने की मांग की। कहा कि भारत में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का हक है। इसलिए इस पर रोक लगाना सही नहीं है।
मढ़ीनाथ में अंबेडकर पार्क निवासी पादरी रेव्ह पवन कुमार कई पादरियों को लेकर गुरुवार दोपहर एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय से मिले। बताया कि अपने घर में 15 साल से प्रार्थना सभा कर प्रभु यीशु का गुणगान कर रहे हैं। रविवार को जब प्रार्थना सभा हो रही थी तो स्थानीय पार्षद अपने साथ चौकी प्रभारी को लेकर आ गए। इन्होंने प्रार्थना सभा बंद करा दी और कई आरोप लगाए। चौकी प्रभारी ने कहा कि इस तरह बिना अनुमति प्रार्थना सभा नहीं कर सकते। पहले इसकी अनुमति ली जाए। पादरी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का उदाहरण देकर अपनी धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने की मांग की। कहा कि सभा संचालन जारी रखने की व्यवस्था कराएं। एसएसपी ने जांच की बात कहकर भेज दिया। एसएसपी से मिलने वालों में पादरी पवन कुमार, रविंद्र दयाल, प्रेम गोयल, रतन पाल और दिलीप आदि शामिल थे। वहीं, प्रार्थना सभा का विरोध करने वाले पार्षद अभी भी अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना था कि प्रार्थना सभा में बड़ी भीड़ जुटती है। धर्म बदलने के लिए लोगों को उकसाया जाता है। घर में ऐसे कार्यक्रम की कोई तुक नहीं है।
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मढ़ीनाथ में अंबेडकर पार्क निवासी पादरी रेव्ह पवन कुमार कई पादरियों को लेकर गुरुवार दोपहर एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय से मिले। बताया कि अपने घर में 15 साल से प्रार्थना सभा कर प्रभु यीशु का गुणगान कर रहे हैं। रविवार को जब प्रार्थना सभा हो रही थी तो स्थानीय पार्षद अपने साथ चौकी प्रभारी को लेकर आ गए। इन्होंने प्रार्थना सभा बंद करा दी और कई आरोप लगाए। चौकी प्रभारी ने कहा कि इस तरह बिना अनुमति प्रार्थना सभा नहीं कर सकते। पहले इसकी अनुमति ली जाए। पादरी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का उदाहरण देकर अपनी धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने की मांग की। कहा कि सभा संचालन जारी रखने की व्यवस्था कराएं। एसएसपी ने जांच की बात कहकर भेज दिया। एसएसपी से मिलने वालों में पादरी पवन कुमार, रविंद्र दयाल, प्रेम गोयल, रतन पाल और दिलीप आदि शामिल थे। वहीं, प्रार्थना सभा का विरोध करने वाले पार्षद अभी भी अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना था कि प्रार्थना सभा में बड़ी भीड़ जुटती है। धर्म बदलने के लिए लोगों को उकसाया जाता है। घर में ऐसे कार्यक्रम की कोई तुक नहीं है।
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