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पुलिस नहीं दे रही साथ, इसलिए ‘खूनी’ मांझा काट रहा गर्दने
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बरेली। रक्षाबंधन पर लोगों को ‘खूनी’ मांझे से बचाने में सरकारी सिस्टम नाकामयाब रहा। कई लोग चाइनीज मांझे की चपेट में आकर जख्मी हो गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार ने इसका ठीकर पुलिस पर फोड़ा है। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि कड़े निर्देश के बावजूद पुलिस कर्मियों ने न तो पुलों के पास पतंगबाजी पर शिकंजा कसा और न ही मांझे की बिक्री करने वालों को पकड़ने के लिए एक भी छापामार कार्रवाई की। पुलिस का सहयोग न मिलने के कारण चाइनीज मांझे पर रोक नहीं लग पा रही है। उन्होंने शहर के सभी थाना पुलिस को कार्रवाई के लिए फिर से नोटिस जारी किया है।
रक्षाबंधन के दिन अशरफ खां छावनी निवासी जरी कारोबारी अलताफ हुसैन हार्टमन पुल पर मांझे की चपेट में आए गए। इससे उनका नाक और गाल कट गया। बानखाना निवासी साठ वर्षीय हरप्यारी देवी भी इस मांझे की चपेट आ गई थीं। उनकी गर्दन कट गई थी। डॉक्टरों को कई टांके लगाने पड़े। इस घटनाओं को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार का कहा, हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रक्षाबंधन के दिन और न ही उससे पहले मांझा विक्रेताओं और पतंगबाजों को पकड़ने की एक भी कार्रवाई नहीं हुई। सिटी मजिस्ट्रेट ने शनिवार को फिर से कोतवाली, प्रेमनगर, किला, बारादरी, सुभाषनगर, सीबीगंज और इज्जतनगर प्रभारी निरीक्षकों को नोटिस भेजा है। इसमें मांझे से लोगों के घायल होने की घटनाओं का हवाला देते हुए कार्रवाई के लिए फिर से निर्देश दिए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने आदेश दिए हैं कि जहां भी प्रतिबंधित मांझे का भंडारण हो रहा है, उसका गोपनीय तरीके से सुराग लगाकर कार्रवाई की जाए। अगर कोई चाइनीज मांझे का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे पकड़कर विक्रेता तक पहुंचा जाए।
‘गिल्टा’ और ‘कोन’ के नाम से बिक रहा मांझा
सराय खाम, बांस मंडी, बाकरगंज सहित कई इलाकों में चाइनीज मांझे की बिक्री हो रही है। दुकानदारों ने इसका कोड वर्ल्ड नाम गिल्टा और कोन दिया है। इसकी बिक्री इतनी गुपचुप तरीके से हो रही है कि सिटी मजिस्ट्रेट के कई बार छापामार कार्रवाई से मांझा बरामद नहीं हो सका है।
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‘मांझे की बिक्री और इसके प्रयोग को रोकने के लिए पुलिस को कड़े कदम उठाने चाहिए। जबकि ऐसी कोई कड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। थानाध्यक्षों को कार्रवाई के लिए फिर से लिखा गया है।’
- मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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रक्षाबंधन के दिन अशरफ खां छावनी निवासी जरी कारोबारी अलताफ हुसैन हार्टमन पुल पर मांझे की चपेट में आए गए। इससे उनका नाक और गाल कट गया। बानखाना निवासी साठ वर्षीय हरप्यारी देवी भी इस मांझे की चपेट आ गई थीं। उनकी गर्दन कट गई थी। डॉक्टरों को कई टांके लगाने पड़े। इस घटनाओं को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार का कहा, हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रक्षाबंधन के दिन और न ही उससे पहले मांझा विक्रेताओं और पतंगबाजों को पकड़ने की एक भी कार्रवाई नहीं हुई। सिटी मजिस्ट्रेट ने शनिवार को फिर से कोतवाली, प्रेमनगर, किला, बारादरी, सुभाषनगर, सीबीगंज और इज्जतनगर प्रभारी निरीक्षकों को नोटिस भेजा है। इसमें मांझे से लोगों के घायल होने की घटनाओं का हवाला देते हुए कार्रवाई के लिए फिर से निर्देश दिए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने आदेश दिए हैं कि जहां भी प्रतिबंधित मांझे का भंडारण हो रहा है, उसका गोपनीय तरीके से सुराग लगाकर कार्रवाई की जाए। अगर कोई चाइनीज मांझे का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे पकड़कर विक्रेता तक पहुंचा जाए।
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‘गिल्टा’ और ‘कोन’ के नाम से बिक रहा मांझा
सराय खाम, बांस मंडी, बाकरगंज सहित कई इलाकों में चाइनीज मांझे की बिक्री हो रही है। दुकानदारों ने इसका कोड वर्ल्ड नाम गिल्टा और कोन दिया है। इसकी बिक्री इतनी गुपचुप तरीके से हो रही है कि सिटी मजिस्ट्रेट के कई बार छापामार कार्रवाई से मांझा बरामद नहीं हो सका है।
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‘मांझे की बिक्री और इसके प्रयोग को रोकने के लिए पुलिस को कड़े कदम उठाने चाहिए। जबकि ऐसी कोई कड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। थानाध्यक्षों को कार्रवाई के लिए फिर से लिखा गया है।’
- मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट