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ऐसा पाठ्यक्रम बनाएं, जिससे विद्यार्थी स्वयं को रोजगार से जोड़ सकें: कुलपति
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बरेली। दुनिया के जितने विकसित देश हैं। वह सभी पढ़ाई के साथ जीविकोपार्जन के लिए युवाओं को तैयार करते हैं। उनके व्यक्तित्व में कौशल विकास के गुणों को जोड़ते हैं। इसको देखते हुए विवि व कॉलेज अपने पाठ्यक्रम को इस प्रकार बनाएं कि विद्यार्थी स्वयं को रोजगार से जोड़ सकें। यह बातें कुलपति प्रो. केपी सिंह ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कहीं।
विवि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कानपुर शिक्षुता प्रशिक्षण बोर्ड के सह निदेशक विवेक कुमार ने एप्रेंटिसशिप कार्यक्रम के बारे में बताया। कहा कि योजना में पढ़ाई पूरी करके विद्यार्थी पंजीकरण कर सकते हैं। एक से लेकर तीन वर्ष तक किसी भी विवि, उद्योग या संस्थान से जुड़ सकते हैं। इसके लिए स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पांच वर्ष से अधिक का समय न बीता हो।
इसमें 50 प्रतिशत का व्यय केंद्र सरकार वहन करती है। वहीं शेष संस्थान या कंपनी की ओर से वहन किया जाता है। इससे इंडस्ट्री को कौशल युक्त युवा मिल सकेंगे। साथ ही अनुभवी लोगों के साथ कार्य करते हुए कौशल को निखारा जा सकेगा। योजना के नोडल अधिकारी विमल कुमार ने कहा कि सभी संस्थान विद्यार्थियों के मध्य योजना के प्रति जागरूकता फैलाएं। डॉ. राम बाबू सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान आईआईए से दिनेश गोयल, प्रो. पीबी सिंह, प्रो. एके सिंह, डॉ. आशुतोष प्रिय, डॉ. रश्मि रंजन, डॉ. कीर्ति प्रजापति आदि उपस्थित रहे। संवाद
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विवि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कानपुर शिक्षुता प्रशिक्षण बोर्ड के सह निदेशक विवेक कुमार ने एप्रेंटिसशिप कार्यक्रम के बारे में बताया। कहा कि योजना में पढ़ाई पूरी करके विद्यार्थी पंजीकरण कर सकते हैं। एक से लेकर तीन वर्ष तक किसी भी विवि, उद्योग या संस्थान से जुड़ सकते हैं। इसके लिए स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पांच वर्ष से अधिक का समय न बीता हो।
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इसमें 50 प्रतिशत का व्यय केंद्र सरकार वहन करती है। वहीं शेष संस्थान या कंपनी की ओर से वहन किया जाता है। इससे इंडस्ट्री को कौशल युक्त युवा मिल सकेंगे। साथ ही अनुभवी लोगों के साथ कार्य करते हुए कौशल को निखारा जा सकेगा। योजना के नोडल अधिकारी विमल कुमार ने कहा कि सभी संस्थान विद्यार्थियों के मध्य योजना के प्रति जागरूकता फैलाएं। डॉ. राम बाबू सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान आईआईए से दिनेश गोयल, प्रो. पीबी सिंह, प्रो. एके सिंह, डॉ. आशुतोष प्रिय, डॉ. रश्मि रंजन, डॉ. कीर्ति प्रजापति आदि उपस्थित रहे। संवाद
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