Bareilly: ब्लैक लिस्ट फर्म को ठेका देने के मामले में लीपापोती शुरू, अधिकारियों को बचाने के प्रयास की भी चर्चा
आगरा की परमार कंस्ट्रक्शन को शहर के सभी डिवाइडरों, पार्कों और रोड किनारे पेड़-पौधों के रखरखाव के लिए 5.28 करोड़ का टेंडर दिया गया था। जबकि यह फर्म ब्लैक लिस्टेड है। इसका खुलासा एक साल बाद हुआ।
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नगर निगम सूत्रों की माने तो मामला खुलने के बाद अपर नगर आयुक्त ने नगर आयुक्त को एक बैठक में हवाला दिया है कि कोई भी फर्म सिर्फ दो साल के लिए ही ब्लैक लिस्ट रहती है। मुख्य अभियंता का तर्क है कि जब तक कागजी कार्रवाई पूरी कर किसी फर्म को ब्लैक लिस्ट से बाहर नहीं लाया जाता, तब तक वह ब्लैक लिस्ट ही रहती है। उन्होंने बैठक में ही कहा कि टेंडर निश्चित तौर पर गलत तरीके से हुआ है।
यह है मामला
आगरा की परमार कंस्ट्रक्शन ने अक्टूबर 2020 में स्मार्ट सिटी कंपनी में टेंडर डाला था। इसमें आगरा विकास प्राधिकरण के अनुभव प्रमाणपत्र लगाए गए थे। इसके बाद फर्म को तत्कालीन नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने ब्लैक लिस्ट कर दिया था। इसी फर्म को 2023 में दोबारा 5.28 करोड़ का ठेका दे दिया गया।
टेंडर कमेटी में अपर नगर आयुक्त, जांच उप नगर आयुक्त को
इस मामले में जांच टीम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, निविदा से पहले दस्तावेजों को परखने के लिए टेंडर कमेटी का गठन किया गया था। इसमें अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार यादव समेत सहायक लेखा अधिकारी हृदय नारायण और पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी शामिल थे। इस कमेटी में सबसे उच्च अधिकारी अपर नगर आयुक्त हैं, वहीं जांच कमेटी में सबसे उच्च अधिकारी उप नगर आयुक्त को रखा गया है।
कनिष्ठ अधिकारी, वरिष्ठ के खिलाफ जांच कैसे कर सकता है? यह भी बड़ा सवाल है। उप नगर आयुक्त पूजा त्रिपाठी का कहना है कि अभी तक एक ही बिंदु सामने आया है कि ब्लैक लिस्ट फर्म ने टेंडर लिया है। कोई अन्य बिंदु सामने आएगा तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।
महापौर उमेश गौतम ने बताया कि टेंडर से पहले फर्म के प्रपत्रों की जांच की जाती है। फर्म ने तथ्य छिपाकर ठेका लिया है, जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।