UP: 'लव जिहाद के जरिये देश में पाकिस्तान जैसे हालात बनाने की साजिश', धर्मांतरण पर कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
बरेली में एडीजे रवि कुमार दिवाकर ने धर्म छिपाकर यौन शोषण करने व गर्भपात कराने के दोषी को उम्रकैद सजा सुनाई है। साथ ही अवैध धर्मांतरण को लेकर गंभीर टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने आदेश की प्रति मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली में पहचान छिपाकर शादी करने, संबंध बनाने और गर्भपात कराने मामले में फैसला सुनाते हुए एडीजे रवि कुमार दिवाकर ने गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि प्रश्नगत प्रकरण लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण का है। इसके तहत मुस्लिम पुरुष शादी के माध्यम से इस्लाम में धर्मांतरण के लिए हिंदू महिलाओं को निशाना बनाते हैं। इसके जरिये देश में पाकिस्तान-बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की साजिश रची जा रही है।
एडीजे (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) ने आरोपी देवरनिया इलाके के जादौपुर निवासी मोहम्मद आलिम को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। आलिम ने आनंद बनकर एक छात्रा के साथ कुकृत्य किया था। मामले के दोषी आलिम को एडीजे ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। छात्रा को धमकाने और पीटने के दोषी उसके पिता को भी दो वर्ष कैद की सजा सुनाई है।
संबंधित खबर- UP: धर्म छिपाकर शादी, गर्भपात कराने वाले को उम्रकैद, कोर्ट ने लव जेहाद पर की गंभीर टिप्पणी; एक लाख जुर्माना
धर्मांतरण में विदेशी फंडिंग की जताई आशंका
आदेश की प्रति मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया है। इस आदेश में कहा है कि मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर, लालच, शादी, नौकरी आदि का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। इसमें विदेशी फंडिंग की भी आशंका है। यह देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
प्रश्नगत मामले में मोहम्मद आलिम ने अपनी पहचान छिपाकर पीड़िता को धोखे में रखा। उससे शादी और यौन शोषण किया। कोर्ट ने कहा कि लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए ही प्रदेश सरकार ने उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 पारित किया है। संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, उसका प्रचार-प्रसार करने का मौलिक अधिकार देता है। धर्म की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण के रूप में नहीं बदला जा सकता।