बरेली बवाल: फिलहाल फतेहगढ़ सेंट्रल जेल ही रहेगा मौलाना तौकीर का ठिकाना, 11 नवंबर तक बढ़ी न्यायिक हिरासत
बरेली बवाल के मामले में मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा फिलहाल फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में ही रहेगा। कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत 11 नवंबर तक बढ़ा दी है। मौलाना तौकीर बवाल से संबंधित 14 मुकदमों में आरोपी है।
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बरेली में 26 सितंबर को हुए बवाल के मुख्य आरोपी इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। मौलाना का ठिकाना फिलहाल फतेहगढ़ सेंट्रल जेल ही रहेगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायिक हिरासत की अवधि को 11 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश दिया है। सुरक्षा कारणों से मौलाना को बरेली सीजेएम में पेश करने के लिए नहीं ले जाया गया।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मंगलवार को सीजेएम कोर्ट समेत स्थानीय चार कोर्ट में 14 मुकदमों की सुनवाई के दौरान फतेहगढ़ जेल में बंद मौलाना तौकीर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी कराई गई। सात अन्य को बरेली जिला जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। सभी की न्यायिक हिरासत 11 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश कोर्ट ने दिया है।
पुलिस ने तर्क दिया है कि मौलाना की जमानत से मुकदमों की विवेचना प्रभावित हो सकती है। अभी सभी मुकदमों के विवेचक मौलाना का बयान ही दर्ज नहीं कर सके हैं, इसलिए मौलाना को जमानत न दी जाए। वहीं मौलाना पक्ष के वकील ने आरोपों को निराधार बताकर बीमारी व स्वास्थ्य के मद्देनजर जेल से बाहर लाने की जरूरत बताई।
फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायिक हिरासत की अवधि को 11 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश दिया। फतेहगढ़ के सेंट्रल जेल अधीक्षक आशीष तिवारी ने बताया कि कोर्ट चाहेगा तो जेल में रहते हुए ट्रायल भी शुरू हो सकता है।
चार अदालतों में पेशी से 13 मुकदमों में बढ़ी रिमांड
मंगलवार को कोतवाली से संबंधित सात मुकदमों में सीजेएम कोर्ट में दोपहर दो बजे के बाद मौलाना तौकीर की वर्चुअल पेशी हुई। यहां सभी मामलों में मौलाना की न्यायिक अभिरक्षा रिमांड मंजूर कर ली गई। बारादरी थाने में बवाल के दिन दर्ज दो मुकदमों में एसीजेएम प्रथम के कोर्ट में मौलाना की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी हुई। प्रेमनगर थाने के एक मामले में एसीजेएम पंचम के यहां व कैंट थाने के एक मुकदमे में जेएम द्वितीय के यहां पेशी के बाद रिमांड मंजूर कर लिया गया। कुल 13 मामलों में अगली पेशी 11 नवंबर को होना तय हुई है।
फर्जी दस्तखत केस में भी माना आरोपी, पांच को पेशी
मौलाना के सबसे खास डॉ. नफीस पर वक्फ संपत्ति कब्जे का एक मुकदमा बाद में दर्ज किया गया। कोतवाली में आईएमसी नेता लियाकत खान ने रिपोर्ट कराई कि नफीस व नदीम ने मौलाना के कथित अपील पत्र पर उनके फर्जी दस्तखत कर लिए हैं। इसमें भी विवेचक बिहारीपुर चौकी प्रभारी शिवम कुमार ने फतेहगढ़ जेल में सोमवार को बी वारंट दाखिल कर मौलाना को साजिशकर्ता बताया। इसमें भी सुनवाई मंगलवार को हुई और पांच नवंबर को मौलाना की पेशी कराने का आदेश हुआ है। यह पेशी भी ऑनलाइन ही कराई जाएगी।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मौलाना तौकीर रजा व उसके साथियों के खिलाफ 14 मुकदमे दर्ज हैं। तौकीर रजा का नाम एक मामले में मुख्य आरोपी और बाकी में साजिशकर्ता के तौर पर शामिल है। सभी विवेचना एसआईटी कर रही है। फिलहाल आरोपियों के बयान दर्ज करने, अज्ञात आरोपियों की फुटेज के आधार पर पहचान व नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की प्राथमिकता है। मजबूती से चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में दाखिल की जाएगी।
बवाल के दिन ही पुलिस ने 10 मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें कोतवाली में दर्ज मुख्य मुकदमे में कोतवाल अमित पांडेय वादी थे, जिसमें मौलाना को बवाल, आगजनी, पुलिस पर हमले का मुख्य आरोपी माना गया था। चार अन्य मुकदमे कोतवाली में दर्ज हुए जिनमें मौलाना को नामजद नहीं किया गया था, लेकिन बाद में साजिशकर्ता के तौर पर नाम बढ़ाया था। पत्रकार राहुल की ओर से बवाल के दौरान आंख में चोट लगने व बाइक तोड़ने की रिपोर्ट कोतवाली में कराई गई। इसमें साजिशकर्ता के तौर पर मौलाना का नाम बढ़ा।
बवाल के ही दिन बारादरी थाने में दो, कैंट, किला व प्रेमनगर में एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया था जिनमें मौलाना का नाम बढ़ा। वर्ष 2019 में बवाल को लेकर कोतवाली में विवेचना प्रचलित थी, बवाल के बाद उसमें भी मौलाना का नाम बतौर साजिशकर्ता बढ़ाया गया। चूंकि बवाल के दिन दर्ज मुकदमे में लोक व्यवस्था प्रभावित होने का जिक्र है तो रासुका का आधार भी सुरक्षित है। अगर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई तो कम से कम एक साल तक मौलाना की रिहाई नहीं हो सकेगी।