बरेलीः फैसला आने से पहले ही सन्नाटे में डूबीं सड़कें-गलियां, अफसरों ने फोर्स के साथ किया फ्लैग मार्च
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले शहर में आम दिनों की तरह सुबह हुई लेकिन जैसे-जैसे फैसला सुनाने का वक्त करीब आया, सड़कों-गलियों में सन्नाटा पसरता चला गया। रोडवेज के दोनों बस अड्डों के साथ जंक्शन और सिटी स्टेशन पर भी इक्का-दुक्का यात्री ही दिखे। तमाम बसों को रद्द कर दिया गया, उधर ट्रेनों के डिब्बे भी खाली नजर आए। राशन और आम जरूरत के सामान की दुकानें खुलीं लेकिन बाकी बाजार में भी सन्नाटे का माहौल दिखाई दिया।
पुराना शहर के साथ मुस्लिम बहुल इलाकों की गलियों में भी शनिवार की सुबह रोज की तरह चहल-पहल नहीं थी। लोग घरों से बाहर कम निकले, अयोध्या प्रकरण पर बातचीत करने से भी गुरेज किया। हालांकि किला इलाके में कुछ हद तक माहौल सामान्य दिखाई दिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद यह सन्नाटा और गाढ़ा हो गया।
सराफा मार्केट में लटके रहे ताले
जिला प्रशासन ने मार्केट खोलने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई थी, फिर भी आलमगीरीगंज के सराफा मार्केट में दोपहर तक ताले लटके रहे। सिविल लाइंस में भी ज्वैलरी के बड़े शोरूम बंद रहे। सराफा के अलावा बाकी कुछ बड़े शोरूम खुले लेकिन उनमें रोज की तरह भीड़भाड़ तो दूर, दो-चार लोग भी नजर नहीं आए। इनका स्टाफ अपने जरूरी काम निपटाता रहा। मॉल में भी यही माहौल था।
दरगाह की गलियों में भी सन्नाटा
दरगाह आला हजरत की चहल-पहल में डूबी रहने वाली गलियों में शनिवार की सुबह कोई हलचल नहीं थी। सौदागरान की गलियों की तमाम दुकानें भी बंद थीं। आमतौर पर तड़के से ही दरगाह पर मुरीदों और अकीदतमंदों का तांता लग जाता था लेकिन शनिवार को इन गलियों में गिनेचुने लोग ही दिखाई दिए। दरगाह प्रबंधन से जुड़े लोगों और उलमा के घरों पर भी रोज की तरह मुरीदों की भीड़ नहीं दिखाई दी। इनमें से ज्यादातर लोगों ने अपने फोन भी स्विच ऑफ कर रखे थे।
फैसला आने से पहले ही कर लिया कुल
शाह शराफत मियां के उर्स का कुल शनिवार की दोपहर को होना था लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही दरगाह और उर्स का इंतजाम देखने वालों ने कुल की सारी रवायतें पूरी करा दीं। पिछले सालों में उर्स के कुल में उमड़ने वाली भीड़ से सड़कें पट जाती थीं। इस बार पहले से ही जायरीन से उर्स के कुल में न आने की अपील की गई थी। इसके बाद शनिवार को समय से पहले कुल करके भीड़ इकट्ठी होने की बाकी गुंजाइश भी खत्म कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई एतराज नहीं है। मुझे लगता है कि यह फैसला सभी को मानना चाहिए। हमने तो पहले ही कहा था कि जो फैसला आएगा उसका सम्मान करेंगे। हिंदुस्तान में भाईचारा कायम रहे यह जरूरी है। कोई किसी को उकसाने का काम न करे जिससे भाईचारगी पर आंच आए।
- मुफ्ती खुर्शीद आलम रजवी, बरेली शाही जामा मस्जिद के शहर इमाम
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हर देशवासी के लिए मान्य है। इस ऐतिहासिक फैसले से उम्मीद करता हूं कि हर धर्म, हर जात ने इस तहेदिल से कुबूल किया है। यह फैसला मुल्क की बेहतरी, सुकून और शांति के लिए बेहतर कदम साबित होगा।
- अलहाज मुमताज मियां, खानकाह शराफत मियां
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है। यह फैसला बहुत संतुलित है। दोनों संप्रदाय के हितों में है। इससे दोनों पक्षों की जीत हुई है और सालों से चले आ रहे विवाद का खात्मा भी हुआ है। मुझे लगता है कि अब इसमें कोई अपील भी नहीं की जानी चाहिए।
- मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, राष्ट्रीय महासचिव तंजीम उलमा इस्लाम