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सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों को 25 साल की कैद
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : डेमो
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दो साल पहले हुई थी घटना, पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
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बरेली। नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आरोप साबित होने के बाद अदालत ने मंगलवार को दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को 25 साल कैद की सजा सुनाई। घटना करीब दो साल पहले हुई थी। घर की छत पर सो रही किशोरी के मुंह में कपड़ा ठूंसकर आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया था।
फरीदपुर इलाके में हुई इस घटना की रिपोर्ट पीड़िता के पिता ने लिखाई थी, जिसमें उसने कहा था कि 30 मई 2016 को उसकी 14 साल की बेटी घर की छत पर सो रही थी। रात करीब 12 बजे उसके गांव में ही रहने वाले सोबरन और उसका भाई सुखबीर गांव के ही ब्रजेश और तिलहर के गांव मझारे में रहने वाले रामरहीम उसकी छत पर आ गए । इन लोगों ने उसकी बेटी के मुंह में जबरन कपड़ा ठूंस दिया और हथियारों के जोर पर उसे उठा ले गए। सुनसान जगह ले जाकर चारों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जब रात में तीन बजे वह उठा तो पाया कि बेटी छत पर नहीं थी। तब उसने परिवार के लोगों को जगाया। उसी दौरान उसने पड़ोस में सोबरन के घर से कुछ आवाजें सुनीं तो वे सब लोग वहां पहुंचे। चारों आरोपियों ने उन्हें हथियार दिखाकर धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी। शोर मचाने पर गांव के लोग इकट्ठे हो गए। चारों आरोपियों ने इसके बाद लड़की को घर से धक्का देकर बाहर निकाल दिया और हथियार लहराते हुए भाग गए। लड़की ने रोते हुए सबके सामने पूरा वाकया बताया।
अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में सरकारी वकील रीतराम राजपूत ने कुल नौ गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट सुनील कुमार यादव ने सोबरन, सुखबीर और रामरहीस को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए तीनों को 25-25 साल कैद की सजा सुनाई । तीनों अभियुक्तों में से प्रत्येक पर 1.10 लाख का जुर्माना भी लगाया। अभियुक्त ब्रजेश को चार साल कैद की सजा सुनाई और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
फरीदपुर इलाके में हुई इस घटना की रिपोर्ट पीड़िता के पिता ने लिखाई थी, जिसमें उसने कहा था कि 30 मई 2016 को उसकी 14 साल की बेटी घर की छत पर सो रही थी। रात करीब 12 बजे उसके गांव में ही रहने वाले सोबरन और उसका भाई सुखबीर गांव के ही ब्रजेश और तिलहर के गांव मझारे में रहने वाले रामरहीम उसकी छत पर आ गए । इन लोगों ने उसकी बेटी के मुंह में जबरन कपड़ा ठूंस दिया और हथियारों के जोर पर उसे उठा ले गए। सुनसान जगह ले जाकर चारों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जब रात में तीन बजे वह उठा तो पाया कि बेटी छत पर नहीं थी। तब उसने परिवार के लोगों को जगाया। उसी दौरान उसने पड़ोस में सोबरन के घर से कुछ आवाजें सुनीं तो वे सब लोग वहां पहुंचे। चारों आरोपियों ने उन्हें हथियार दिखाकर धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी। शोर मचाने पर गांव के लोग इकट्ठे हो गए। चारों आरोपियों ने इसके बाद लड़की को घर से धक्का देकर बाहर निकाल दिया और हथियार लहराते हुए भाग गए। लड़की ने रोते हुए सबके सामने पूरा वाकया बताया।
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अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में सरकारी वकील रीतराम राजपूत ने कुल नौ गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट सुनील कुमार यादव ने सोबरन, सुखबीर और रामरहीस को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए तीनों को 25-25 साल कैद की सजा सुनाई । तीनों अभियुक्तों में से प्रत्येक पर 1.10 लाख का जुर्माना भी लगाया। अभियुक्त ब्रजेश को चार साल कैद की सजा सुनाई और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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