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पंचायत चुनाव में कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन
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बरेली। पंचायत चुनाव के बाद कोरोना की रफ्तार गांवों में भी बढ़ने का अंदेशा जताया जाने लगा है। दरअसल मतदान केंद्रों पर कोविड नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती दिखीं। वोट डालने आए तमाम मतदाताओं के चेहरे पर मास्क तक नहीं था। लाइनों में आपसी दूरी के बजाय लोग एक-दूसरे से सटे दिखाई दिए।
वोट डालना जरूरी था, इसलिए मतदाता घरों से निकल कर बूथों पर पहुंच कतार में लग गए। लेकिन, तेज धूप के कारण सामाजिक दूरी का पालन करना भूल गए। लाइन में लगे हुए उन्हें जहां भी थोड़ी सी छाया दिखी, वहीं इकट्ठा हो लिए। अधिकतर मतदाता मास्क भी पहने हुए नहीं थे। महिलाएं पेड़ों के नीचे और मतदान केंद्र के बरामदों में घेरा बनाकर अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। बूथों के बाहर बस्ता लगाए बैठे प्रत्याशियों के समर्थक भी बिना मास्क के घेरा बनाकर बैठे नजर आए। न मतदाता और न ही समर्थकों ने कोविड नियमों का पालन किया। अधिकारियों की गाड़ियों के सायरन और मीडिया कर्मियों के कैमरे देखने पर ही मास्क लगाते दिखाई दिए।
माना जा रहा है कि यह बड़े स्तर की लापरवाही हुई है। बूथों तक पहुंचे मतदाताओं में से यदि दो फीसदी में भी कोरोना के लक्षण हुए तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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वोट डालना जरूरी था, इसलिए मतदाता घरों से निकल कर बूथों पर पहुंच कतार में लग गए। लेकिन, तेज धूप के कारण सामाजिक दूरी का पालन करना भूल गए। लाइन में लगे हुए उन्हें जहां भी थोड़ी सी छाया दिखी, वहीं इकट्ठा हो लिए। अधिकतर मतदाता मास्क भी पहने हुए नहीं थे। महिलाएं पेड़ों के नीचे और मतदान केंद्र के बरामदों में घेरा बनाकर अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। बूथों के बाहर बस्ता लगाए बैठे प्रत्याशियों के समर्थक भी बिना मास्क के घेरा बनाकर बैठे नजर आए। न मतदाता और न ही समर्थकों ने कोविड नियमों का पालन किया। अधिकारियों की गाड़ियों के सायरन और मीडिया कर्मियों के कैमरे देखने पर ही मास्क लगाते दिखाई दिए।
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माना जा रहा है कि यह बड़े स्तर की लापरवाही हुई है। बूथों तक पहुंचे मतदाताओं में से यदि दो फीसदी में भी कोरोना के लक्षण हुए तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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