{"_id":"5e8b732b8ebc3e77a45bb330","slug":"corona-epidemic-act-implemented-for-the-first-time-in-uttar-pradesh-bareilly-news-bly4019091141","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना: उत्तर प्रदेश में पहली बार महामारी अधिनियम लागू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना: उत्तर प्रदेश में पहली बार महामारी अधिनियम लागू
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहली बार प्लेग से निपटने के लिए 1897 में बना था महामारी अधिनियम
विज्ञापन
बरेली। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने पहली बार महामारी अधिनियम 1897 लागू कर दिया है। राज्य सरकार ने 14 अप्रैल तक सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, धार्मिक, शैक्षणिक, खेल, पारिवारिक प्रकृति के किसी भी आयोजन पर प्रतिबंध लगाने के लिए यह अधिनियम लागू किया है। पहली बार यह कानून 1897 में अंगेजी हुकूमत ने मुंबई में प्लेग फैलने पर ये अधिनियम लागू किया था।
जानकारों के मुताबिक इस अधिनियम को तब लागू किया जाता है, जब राज्य या केंद्र सरकार को खतरनाक बीमारी के प्रवेश से दुष्प्रभाव की आशंका हो जिससे आम जनमानस को खतरा हो। इसी तरह कोरोना के संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस कानून के खंड दो को लागू करने का निर्देश दिया है। अधिनियम लागू होने पर अब सरकारी आदेश की अवहेलना अपराध है। लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर इस अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें आईपीसी की धारा-188 के तहत सजा का प्रावधान है।
विज्ञापन
किसी यात्री के संक्रमित होने की आशंका है तो उसे घर या अस्पताल में क्वारंटीन किया जा सकता है।
कोई व्यक्ति या समूह महामारी से ग्रसित है तो उन्हें किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रख सकते हैं।
सेक्शन तीन में सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा। छह माह की सजा और जुर्माना हो सकता है।
महामारी एक्ट में अफसरों को अधिनियम लागू करने के लिए कानूनी सुरक्षा का भी प्रावधान है।
जानकारों के मुताबिक इस अधिनियम को तब लागू किया जाता है, जब राज्य या केंद्र सरकार को खतरनाक बीमारी के प्रवेश से दुष्प्रभाव की आशंका हो जिससे आम जनमानस को खतरा हो। इसी तरह कोरोना के संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस कानून के खंड दो को लागू करने का निर्देश दिया है। अधिनियम लागू होने पर अब सरकारी आदेश की अवहेलना अपराध है। लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर इस अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें आईपीसी की धारा-188 के तहत सजा का प्रावधान है।
विज्ञापन
पहले भी लागू हो चुका है एक्ट
सन 1959 में हैजा के प्रकोप को देखते हुए पुरी में, साल 2009 में स्वाइन फ्लू फैलने पर पुणे मेें इस एक्ट का सेक्शन दो लागू हुआ था। 2018 में गुजरात के वडोदरा में कॉलरा के लक्षण मिलने पर यह एक्ट लागू हुआ था। साल 2015 में चंडीगढ़ में मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए एक्ट प्रभावी था। 2020 में कर्नाटक ने सबसे पहले कोरोना वायरस से निपटने के लिए महामारी अधिनियमख 1897 को लागू किया है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिनियम का अनुच्छेद
केंद्र और राज्य सरकारों को विशेष अधिकार देता है ताकि महामारी की रोकथाम का प्रचार हो सके।किसी यात्री के संक्रमित होने की आशंका है तो उसे घर या अस्पताल में क्वारंटीन किया जा सकता है।
कोई व्यक्ति या समूह महामारी से ग्रसित है तो उन्हें किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रख सकते हैं।
सेक्शन तीन में सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा। छह माह की सजा और जुर्माना हो सकता है।
महामारी एक्ट में अफसरों को अधिनियम लागू करने के लिए कानूनी सुरक्षा का भी प्रावधान है।