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Bareilly News: बगैर अनुमति अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की जमीन खरीदने पर फंसा मुआवजा

Sat, 05 Apr 2025 02:49 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 05 Apr 2025 02:49 AM IST
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Compensation stuck on buying land of scheduled caste people without permission
बरेली। डीएम की अनुमति के बगैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन खरीदने वाले बीस भूखंड स्वामियों का रिठौरा में मुआवजा फंस गया। दो भूखंडों पर बनाए गए मकानों का मुआवजा मिला, लेकिन जमीन का मुआवजा नहीं मिला। राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में जमीन अनुसूचित जाति के व्यक्ति के ही नाम दर्ज है। क्रेता के नाम दाखिल खारिज नहीं हुआ था।
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एनएचएआई ने ऐसे मामलों में भू-स्वामियों का मुआवजा विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय भेज दिया था, लेकिन जब विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की पड़ताल में खुलासा हुआ कि जमीन अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम है। इसके बाद ही मुआवजा रोक दिया गया। इस जमीन पर जिन लोगों के भवन (या कोई अन्य स्ट्रक्चर) बनाए थे उनको स्ट्रक्चर का मुआवजा मिल चुका है लेकिन जमीन का मुआवजा उन्हें भी नहीं मिल सका। अब जमीन राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसलिए जमीन खरीदते समय सतर्कता दिखाएं।
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ऐसे गई जेब की पूंजी अब भागदौड़ की मजबूरी...मुआवजा फिर भी नहीं
विनीता गुप्ता ने अपने गांव की जमीन बेचकर रिठौरा के कृष्णानगर की नई बस्ती में एक बिल्डर से सौ-सौ गज के दो भूखंड खरीदे। दोनों पर करीब दस लाख रुपये लगाए। इसी बीच यह कॉलोनी हाईवे के चौड़ीकरण की जद में आई। उम्मीद उन्हें थी कि चार गुना मुआवजा मिलेगा लेकिन जब स्पष्ट हुआ कि बिल्डर ने प्लाटिंग करते वक्त इसे आबादी घोषित नहीं कराया था और न ही अनुसूचित जाति के व्यक्ति ने डीएम से अनुमति ली थी। नतीजा मुआवजा अटक गया। अब दोनों भूखंडों की राज्य सरकार में निहित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। मुआवजे की उम्मीद पर पानी फिर गया। विनीता गुप्ता के बेटे विक्की का कहना था कि मुआवजा में देरी का मुद्दा वह कई बार उठा चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। ग्राम वारगोंच निवासी दर्शन देवी ने साल 2017 में कृष्णा नगर में 100 वर्ग गज प्लाॅट खरीदा था। एनएचएआई ने इस पर कब्जा ले लिया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। ब्यूरो
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जमीन खरीदने के वक्त बरतें सावधानी

सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति से जमीन खरीदने के वक्त सावधानी बरतें। अन्यथा घाटा उठाना पड़ सकता है। जैसा कि रिठौरा के मामले में हो रहा है। रिठौरा में जिन लोगों ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति से भूखंड खरीदे और मुआवजा नहीं मिला। ऐसे लोग अपने मामले में विधिक राय लें और इसके बाद अदालत जाएं तो हो सकता है कि उनके हक में कोई फैसला सामने आए।



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डीएम की अनुमति के बगैर सामान्य वर्ग के किसी व्यक्ति ने अगर अनुसूचित जाति के व्यक्ति से जमीन खरीदी है तो ऐसी जमीन उसके नाम राजस्व अभिलेखों में नहीं दर्ज होती। बैनामे के दिन से ही जमीन राज्य सरकार में निहित हो जाती है। ऐसे कुछ मामले रिठौरा के हैं जो मेरे कार्यकाल से पहले के हैं। इसलिए इनका मुआवजा नहीं दिया गया। - देशदीपक सिंह, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी
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