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बरेली वालों! आपकी हरकतों पर केंद्र सरकार भी फिक्रमंद है

Tue, 03 Sep 2019 03:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2019 03:04 AM IST
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बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताने के बाद बढ़ती आबादी की रफ्तार पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र के जिम्मेदार अफसर सक्रिय हुए तो सबसे पहले बरेली ही निशाने पर आ गया। समीक्षा हुई तो पता चला कि बरेली में आबादी स्थिर रहने या घटने के बजाय अप्रत्याशित तेजी से बढ़ती जा रही है। परिवार नियोजन की तमाम योजनाओं के बावजूद बरेली के इन हालात पर चिंता जताते हुए इस जिले को उच्च प्रजनन दर श्रेणी वाले चुनिंदा जिलों में शामिल कर दिया गया है। शासन से निर्देश आए हैं कि परिवार नियोजन पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं। योजनाओं का ठीक ढंग से क्रियान्वयन न करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी संदेह जताया गया है।
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परिवार नियोजन के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर रही है लेकिन फिर जिले में उच्च प्रजनन दर होना इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य विभाग इन योजनाओं पर सिर्फ कागजों में काम कर रहा है। दूसरी ओर अफसर जिले में मातृ और शिशु मूत्यु दर भी कम होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उच्च प्रजनन दर खुद ब खुद उनके दावों और आंकड़ों पर सवालिया निशान लगा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक उच्च प्रजनन दर यानी प्रसव की संख्या ज्यादा होने से महिलाओं माताओं को प्रजनन के लिए आवश्यक अंतराल न मिल पाना स्वाभाविक है जो उनका स्वास्थ्य प्रभावित करता है। ऐसे में शिशुओं में भी पोषक तत्वों की कमी होना लाजिमी है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग का मातृ और शिशु मृत्यु दर कम होने का दावा काबिले यकीन नहीं हो सकता।
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डेढ़ लाख का बजट उड़ाया पुरुष नसबंदी सिर्फ एक
परिवार नियोजन मिशन निदेशक पंकज कुमार की ओर से जारी पत्र में प्रदेश के कई जिलों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे परिवार नियोजन के कार्यक्रमों पर संदेह जताया गया है। संकेत दिया गया है कि स्वास्थ्य विभाग ‘जनरथ यात्रा’ और ‘परिवार नियोजन रैली’ जैसे अभियानों की शुरुआत तो बड़े जोरशोर से करता है लेकिन फिर ज्यादातर क्रियान्वयन कागजों पर ही होता है। लिहाजा इन अभियानों का कोई नतीजा नहीं निकल रहा। पिछले दिनों करीब डेढ़ लाख रुपये का बजट खर्च करने के बाद भी सिर्फ एक पुरुष की नसबंदी को स्वास्थ्य विभाग की इस कार्यप्रणाली की मिसाल माना जा रहा है।
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‘ज्यादा आय.. ज्यादा लोग’ की
धारण सबसे बड़ी समस्या
नए दंपती परिवार कल्याण के संसाधनों को मांगने में शरमाते हैं। पुरुष नसबंदी नहीं कराते, कंडोम मांगने में भी झिझकते हैं। ‘ज्यादा लोग ज्यादा आय’ की मानसिक ता से भी लोग नहीं निकल पा रहे। जब तक जनभागीदारी नहीं होगी जनसंख्या वृद्धि रोकने में सफलता नहीं मिलेगी। उच्च प्रजनन दर का टैग हटाने के लिए शहरवासियाें को परिवार नियोजन के साधनों को अपनाना ही होगा। - डॉ. साधना अग्रवाल, नोडल अधिकारी, परिवार नियोजन कार्यक्रम
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