{"_id":"5dd2f00a8ebc3e54a009001b","slug":"civic-amenities-bareilly-news-bly3845397139","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमिश्नर ने सभी डीएम से मांगी फटे, क्षतिग्रस्त भू-मानचित्रों की रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमिश्नर ने सभी डीएम से मांगी फटे, क्षतिग्रस्त भू-मानचित्रों की रिपोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। कई गांवों के भूमि संबंधी मानचित्र नष्ट हो जाने से वहां जमीनों का कोई अतापता नहीं लग पा रहा है। जमीनों के मालिकों को काफी मशक्कत के बाद भी यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनकी जमीन का गाटा नंबर क्या है और उसका क्षेत्रफल कितना है। ये मामला सामने आने के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मंडल के सभी जिलों के डीएम से यह रिकार्ड मांगा है कि उनके राजस्व अभिलेखागार में जमीनों के नक्शों की स्थिति क्या है?
भू-मानचित्रों को लेकर शासन के पास शिकायतें पहुंची हैं कि राजस्व अभिलेखागारों में रखा जमीनों का रिकार्ड नष्ट हो गया है। इससे तमाम जमीनों का गाटा नंबर और सीमा रेखाओं की ठीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। आम लोग तो अपनी जमीनों की जानकारी लेने के लिए तहसीलों के चक्कर काट ही रहे हैं, इस गड़बड़ी से सरकारी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। शासन ने पहले यह निर्देश दिए थे कि ऐसे मानचित्रों का ब्योरा राजस्व परिषद को उपलब्ध करा दिया जाए ताकि उसके पास उपलब्ध मानचित्र के आधार पर नया रिकार्ड राजस्व अभिलेखागार को उपलब्ध कराया जा सके लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ है।
अक्तूबर में भी राजस्व परिषद आयुक्त की तरफ से डीएम को निर्देश जारी किए गए थे कि जिला और तहसील स्तर पर रिकार्ड रूम की जांच कराकर यह ब्योरा तैयार करा लिया जाए कि ऐसे कितने गांव हैं जहां भूमानचित्रों के नष्ट होने से दिक्कत पैदा हो रही है, ताकि इस समस्या का निदान तलाश किया जा सके, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। शासन के आदेश के बाद कमिश्नर इस मामले में मंडल के सभी डीएम से भूमानचित्रों की स्थिति के बारे में रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भू-मानचित्रों को लेकर शासन के पास शिकायतें पहुंची हैं कि राजस्व अभिलेखागारों में रखा जमीनों का रिकार्ड नष्ट हो गया है। इससे तमाम जमीनों का गाटा नंबर और सीमा रेखाओं की ठीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। आम लोग तो अपनी जमीनों की जानकारी लेने के लिए तहसीलों के चक्कर काट ही रहे हैं, इस गड़बड़ी से सरकारी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। शासन ने पहले यह निर्देश दिए थे कि ऐसे मानचित्रों का ब्योरा राजस्व परिषद को उपलब्ध करा दिया जाए ताकि उसके पास उपलब्ध मानचित्र के आधार पर नया रिकार्ड राजस्व अभिलेखागार को उपलब्ध कराया जा सके लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ है।
विज्ञापन
अक्तूबर में भी राजस्व परिषद आयुक्त की तरफ से डीएम को निर्देश जारी किए गए थे कि जिला और तहसील स्तर पर रिकार्ड रूम की जांच कराकर यह ब्योरा तैयार करा लिया जाए कि ऐसे कितने गांव हैं जहां भूमानचित्रों के नष्ट होने से दिक्कत पैदा हो रही है, ताकि इस समस्या का निदान तलाश किया जा सके, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। शासन के आदेश के बाद कमिश्नर इस मामले में मंडल के सभी डीएम से भूमानचित्रों की स्थिति के बारे में रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन