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पराली जलाई तो अब लेखपाल खतौनी में दर्ज करेंगे ब्योरा
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बरेली। फसलों के अवशेष, पराली आदि खेतों में जलाने पर प्रभावी रोक के लिए अब लेखपालों को जवाबदेह बनाया जाएगा। इसके तहत उन्हें खतौनी में पराली जलाने वाले काश्तकारों का ब्योरा दर्ज करना होगा। शासन ने नया प्रोफार्मा सभी जिलों को उपलब्ध करा दिया है।
पिछले दिनों पराली जलाने से फैले प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसके तहत यूपी से मुख्य सचिव तलब किए गए थे। इसके बाद शासन खेतों में फसलों के अवशेष जलाने पर सख्त हो गया। इसके तहत आयुक्त राजस्व परिषद रजनीश गुप्ता ने गाइडलाइन और नया प्रारूप जारी किया है। इसमें कहा गया है कि लेखपाल अपने काम के साथ ही प्रत्येक सीजन में फसलों के अवशेषों की पड़ताल करेंगे। लेखपाल फसल कटाई के बाद सभी गाटा का सर्वेक्षण और इसका ब्योरा भी खसरे में दर्ज करेंगे। किसी तरह की हेराफेरी रोकने के लिए खसरा-खतौनी में क्षेत्रफल सर्वेक्षण सहित तिथि और टिप्पणी भी लिखना अनिवार्य होगा। आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि लेखपाल की सर्वेक्षण रिपोर्ट का सत्यापन मंडल और जिला स्तरीय राजस्व अधिकारी करेंगे। ताकि लेखपालों के स्तर पर कोई मनमानी न हो पाए।
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पिछले दिनों पराली जलाने से फैले प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसके तहत यूपी से मुख्य सचिव तलब किए गए थे। इसके बाद शासन खेतों में फसलों के अवशेष जलाने पर सख्त हो गया। इसके तहत आयुक्त राजस्व परिषद रजनीश गुप्ता ने गाइडलाइन और नया प्रारूप जारी किया है। इसमें कहा गया है कि लेखपाल अपने काम के साथ ही प्रत्येक सीजन में फसलों के अवशेषों की पड़ताल करेंगे। लेखपाल फसल कटाई के बाद सभी गाटा का सर्वेक्षण और इसका ब्योरा भी खसरे में दर्ज करेंगे। किसी तरह की हेराफेरी रोकने के लिए खसरा-खतौनी में क्षेत्रफल सर्वेक्षण सहित तिथि और टिप्पणी भी लिखना अनिवार्य होगा। आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि लेखपाल की सर्वेक्षण रिपोर्ट का सत्यापन मंडल और जिला स्तरीय राजस्व अधिकारी करेंगे। ताकि लेखपालों के स्तर पर कोई मनमानी न हो पाए।
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