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नदी को मिले पुनर्जीवन तो किसानों को मिले राहत
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बदायूं। बिसौली इलाके से जिले में आने वाली सोत नदी अपना अस्तित्व भले ही खो चुकी हो, लेकिन किसानों के लिए वरदान मानी जाने वाली ये नदी आज भी उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है, बशर्ते इसमें एक बार वही जल की अविरल धारा बह निकले। किसान भी यही चाहते हैं कि नदी को पुनर्जीवन मिले तो उनको सिंचाई कार्य में आ रही परेशानी दूर हो। इसके लिए उनकी मांग भी यही है कि प्रशासन इसे पुनर्जीवित करने के लिए पहल करे। कई क्षेत्रों के किसान तो इसके लिए श्रमदान करने को भी तैयार हैं।
सोत नदी के किनारे खेतीबाड़ी करने वाले किसान इसको लेकर बेहद परेशान हैं, क्योंकि पहले वे अपनी जरूरत के मुताबिक पानी खेतों में लगा लिया करते थे, जिससे उन्हें काफी राहत मिलती थी, लेकिन सोत के सूख जाने के बाद किसान एक-एक बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। अब जहां सिंचाई करने में बिजली के बिल में इजाफा हो रहा है, वहीं पहले की तुलना में अब डीजल के दाम भी काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में किसान चाहते हैं सोत नदी को पुनर्जीवित किया जाए। अमर उजाला द्वारा नदी के पुनर्जीवन के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद किसान भी इससे जुड़ रहे हैं। वे चाहते हैं कि नदी में अविरल जल की धारा बहे, इसके लिए सार्थक प्रयास करने होंगे। दबतोरी के किसानों से बात करने पर उन्होंने कहा कि पहल प्रशासन करे, हम सहयोग करने को तैयार हैं।
कब्जों ने बिगाड़ा सोत का नक्शा
-जिले में चार तहसीलों से होती सोत नदी निकली है। कभी ये अपनी निर्मल धारा से किसानों का भला करती थी, लेकिन जैसे जैसे इसके स्रोत सूखे, भूमाफिया ने इस पर कब्जा करना शुरू कर दिया। शहर में तो मैरिज लॉन और व्यावसायिक भवन तक बना लिए गए। इन्हीं अवैध कब्जों के कारण धीरे-धीरे सोत का नक्श बिगड़ता चला गया।
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किसानों को सोतनदी से बहुत आस रहती थी। इससे कम लागत में बहुत अच्छा उत्पादन मिलता था, लेकिन सोतनदी का अब अस्तिव ही खत्म होने के कगार पर है, जो किसानों के लिए बहुत बुरा है। प्रशासन यदि चाहे तो इसके पुनर्जीवन के प्रयास हो सकते हैं।
- रामकुमार
समय का पहिया कैसा घूमा है। जो नदी कभी किसानों को जीवन दान देती थी, आज वह अपने पुनर्जीवन के लिए आस लगाए बैठी है। ये जिले वासियों के लिए अत्यंत दुर्भाग्य की बात है। इसके लिए सभी को आगे आना होगा।
-खेमकरन मौर्य
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सोत नदी के किनारे खेतीबाड़ी करने वाले किसान इसको लेकर बेहद परेशान हैं, क्योंकि पहले वे अपनी जरूरत के मुताबिक पानी खेतों में लगा लिया करते थे, जिससे उन्हें काफी राहत मिलती थी, लेकिन सोत के सूख जाने के बाद किसान एक-एक बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। अब जहां सिंचाई करने में बिजली के बिल में इजाफा हो रहा है, वहीं पहले की तुलना में अब डीजल के दाम भी काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में किसान चाहते हैं सोत नदी को पुनर्जीवित किया जाए। अमर उजाला द्वारा नदी के पुनर्जीवन के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद किसान भी इससे जुड़ रहे हैं। वे चाहते हैं कि नदी में अविरल जल की धारा बहे, इसके लिए सार्थक प्रयास करने होंगे। दबतोरी के किसानों से बात करने पर उन्होंने कहा कि पहल प्रशासन करे, हम सहयोग करने को तैयार हैं।
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कब्जों ने बिगाड़ा सोत का नक्शा
-जिले में चार तहसीलों से होती सोत नदी निकली है। कभी ये अपनी निर्मल धारा से किसानों का भला करती थी, लेकिन जैसे जैसे इसके स्रोत सूखे, भूमाफिया ने इस पर कब्जा करना शुरू कर दिया। शहर में तो मैरिज लॉन और व्यावसायिक भवन तक बना लिए गए। इन्हीं अवैध कब्जों के कारण धीरे-धीरे सोत का नक्श बिगड़ता चला गया।
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किसानों को सोतनदी से बहुत आस रहती थी। इससे कम लागत में बहुत अच्छा उत्पादन मिलता था, लेकिन सोतनदी का अब अस्तिव ही खत्म होने के कगार पर है, जो किसानों के लिए बहुत बुरा है। प्रशासन यदि चाहे तो इसके पुनर्जीवन के प्रयास हो सकते हैं।
- रामकुमार
समय का पहिया कैसा घूमा है। जो नदी कभी किसानों को जीवन दान देती थी, आज वह अपने पुनर्जीवन के लिए आस लगाए बैठी है। ये जिले वासियों के लिए अत्यंत दुर्भाग्य की बात है। इसके लिए सभी को आगे आना होगा।
-खेमकरन मौर्य