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पुलिसकर्मी नहीं छोड़ते जानलेवा आवास, विभाग नहीं कराता मरम्मत

Mon, 23 Sep 2019 02:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2019 02:00 AM IST
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Civic Amenities
बरेली। चौकी प्रभारी के बेटे की मौत के बाद पुलिसकर्मियों के सरकारी आवासों की दुर्दशा फिर चर्चा में है। पुलिस लाइन से लेकर थानों और अग्निशमन स्टाफ तक के अधिकांश आवास जर्जर हैं। आवासों की जर्जर वायरिंग से बिजली के तार लटक रहे हैं, पानी की पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त है। विभाग मरम्मत के लिए सीमित बजट देता है और पुलिसकर्मी निजी खर्च से काम कराना नहीं चाहते। आवास भत्ता न्यूनतम होने और उसमें बिजली, पानी और सफाईकर्मी का व्यय शामिल होने की वजह से ऐसा होता है। अमर उजाला टीम ने रविवार को पुलिस के आवासों का जायजा लिया तो ऐसे ही हालात सामने आए।
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कोतवाली के आवासों का हालत सबसे खराब है। अधिकांश इमारत आजादी से पहले अंग्रेजों के जमाने की है। छतें टूटी हुई हैं और बिजली की वायरिंग उखड़ी पड़ी है। पुलिस कर्मियों के परिवार जान जोखिम में डालकर यहां रहने को मजबूर हैं। अक्सर छतों से प्लास्टर टूटकर गिरता है। महिलाओं ने अपने आवासों की दुर्दशा बताई लेकिन कैमरा देखकर पीछे हट गईं। किला थाने का भवन भी कुछ ऐसा ही है। यहां के आवास भी बेहद जर्जर हालत में हैं। बिहारीपुर और शाहबाद चौकी के भवन भी बरसों पुराने हैं। पुलिस लाइन के आवासों की बदहाली किसी से छुपी नहीं है। यहां कुल 708 आवास हैं, इनमें से आधे से ज्यादा काफी पुराने हैं। करीब सौ आवास बेहद जर्जर हैं। कुछ को कंडम घोषित करने के बाद भी पुलिस खाली नहीं करा सकी है। खाली कराने के लिए तहसीलदार की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। बरेली कॉलेज के पास अग्निशमन विभाग के परिसर में भी आवास बने हैं। जर्जर आवासों में खुले तारों के बीच कपड़े सुखाना बड़ा जोखिम है। बरसात के दिनों में ये आवास तालाब बन जाते हैं। बावजूद स्टाफ इन्हें खाली नहीं करता।
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सस्ते की वजह से नहीं छोड़ता स्टाफ
पुलिस विभाग की ओर से इन आवासों को टाइप वन, टू और थ्री श्रेणी में रखा गया है। वन श्रेणी सिपाही व निचले स्तर के स्टाफ के लिए और बाकी उससे ऊपर के स्टाफ को हैं। इसमें श्रेणी वन का मासिक किराया 680 रुपये, टू का किराया 1320 रुपये और इंस्पेक्टर व दरोगा रैंक वालों के लिए टाइप थ्री का किराया एकमुश्त 1960 रुपये तय है। इसी किराये में बिजली, पानी और सफाईकर्मी का व्यय शामिल है। आमतौर पर शहर में इतनी जगह वाले आवास, बिजली और पानी की सुविधा कम से कम छह हजार रुपये प्रतिमाह में मिलती है। इसीलिए पुलिसकर्मी इन्हें नहीं छोड़ते। पिछले दिनों ट्रांसफर के बाद भी आवास खाली न करने वाले करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट तक हो चुकी है।
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