{"_id":"5d76b59e8ebc3e93de123df3","slug":"civic-amenities-bareilly-news-bly375495044","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश घटी, बिजली कटौती बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश घटी, बिजली कटौती बढ़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। इस बार बारिश कम होने से उमस और गर्मी बढ़ गई है। इसलिए बिजली मांग भी हर दिन बढ़ती जा रही है। इससे बिजली सप्लाई सिस्टम ओवरलोड होने से ट्रिपिंग और फाल्ट भी ज्यादा हो रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि जिले में पिछले वर्ष की अपेक्षा बमुश्किल एक तिहाई ही बारिश हो पाई है। छिटपुट बारिश होने से तापमान गिरा नहीं बल्कि उमस बढ़ गई है।
अगर मौसम वैज्ञानिकों की माने तो इस बार अगस्त में करीब सवा सौ एमएम ही बारिश हो पाई जबकि पिछले साल अगस्त में 310 एमएम बारिश रिकार्ड हुई थी। जुलाई 18 में इससे अधिक यानी 335 एमएम बारिश हुई थी। इस बार जुलाई में यह रिकार्ड भी काफी दूर है। वैज्ञानिक बताते हैं कि जुलाई-अगस्त में पिछले साल की अपेक्षा इस बार एक बमुश्किल एक तिहाई बारिश हो पाई है। इसका प्रभाव खेती पर पड़ रहा है। नहरों की सफाई नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था पहले से ही चौपट है। इसलिए किसान बिजली विभाग पर निर्भर हो गया। उमस और गर्मी बढ़ने से एयर कंडीशनरों का भी इस्तेमाल ज्यादा होने लगा। इससे बिजली सप्लाई सिस्टम पर जरूरत से ज्यादा भार आया है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पिछले से 37.45 प्रतिशत बिजली सप्लाई ज्यादा हुई है। यानी एक तिहाई बारिश होने से एक तिहाई बिजली ज्यादा सप्लाई दी गई। बिजली मांग बढ़ने से सिस्टम में ट्रिपिंग और फाल्ट ज्यादा हो रहे हैं। इसे लेकर बिजली अफसर परेशान हैं क्याेंकि बढ़ी ऊर्जा के अनुपात में राजस्व वसूली करना है। हालांकि पिछले साल से राजस्व वसूली 21.83 प्रतिशत तक बढ़ गई।
बढ़ती उमस और गर्मी और सिंचाई कार्य के चलते बिजली मांग बढ़ी है। विभाग बढ़ी मांग पूरी करने की हर संभव कोशिश में है। जिससे किसानों की जरूरतें पूरी हो जाएं। स्थिति सामान्य होते ही ऊर्जा सप्लाई के अनुपात में राजस्व वसूली अभियान भी चलेगा।
विज्ञापन
- तारिक मतीन, चीफ इंजीनियर
विज्ञापन
अगर मौसम वैज्ञानिकों की माने तो इस बार अगस्त में करीब सवा सौ एमएम ही बारिश हो पाई जबकि पिछले साल अगस्त में 310 एमएम बारिश रिकार्ड हुई थी। जुलाई 18 में इससे अधिक यानी 335 एमएम बारिश हुई थी। इस बार जुलाई में यह रिकार्ड भी काफी दूर है। वैज्ञानिक बताते हैं कि जुलाई-अगस्त में पिछले साल की अपेक्षा इस बार एक बमुश्किल एक तिहाई बारिश हो पाई है। इसका प्रभाव खेती पर पड़ रहा है। नहरों की सफाई नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था पहले से ही चौपट है। इसलिए किसान बिजली विभाग पर निर्भर हो गया। उमस और गर्मी बढ़ने से एयर कंडीशनरों का भी इस्तेमाल ज्यादा होने लगा। इससे बिजली सप्लाई सिस्टम पर जरूरत से ज्यादा भार आया है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पिछले से 37.45 प्रतिशत बिजली सप्लाई ज्यादा हुई है। यानी एक तिहाई बारिश होने से एक तिहाई बिजली ज्यादा सप्लाई दी गई। बिजली मांग बढ़ने से सिस्टम में ट्रिपिंग और फाल्ट ज्यादा हो रहे हैं। इसे लेकर बिजली अफसर परेशान हैं क्याेंकि बढ़ी ऊर्जा के अनुपात में राजस्व वसूली करना है। हालांकि पिछले साल से राजस्व वसूली 21.83 प्रतिशत तक बढ़ गई।
विज्ञापन
बढ़ती उमस और गर्मी और सिंचाई कार्य के चलते बिजली मांग बढ़ी है। विभाग बढ़ी मांग पूरी करने की हर संभव कोशिश में है। जिससे किसानों की जरूरतें पूरी हो जाएं। स्थिति सामान्य होते ही ऊर्जा सप्लाई के अनुपात में राजस्व वसूली अभियान भी चलेगा।
विज्ञापन
- तारिक मतीन, चीफ इंजीनियर