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भुगतिए 15 करोड़... क्योंकि कानून सिर्फ जनता के लिए है अफसरों के लिए नहीं
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बरेली। महंगाई को लूट बताने का रोना छोड़िए और एकमुश्त 15 करोड़ भुगतने के लिए तैयार हो जाइए। यह रकम उन चालान की है जो न जाने किस राह से गुजरते हुए कट गए और आपको पता भी नहीं चला। जिन लोगों के चालान कटे हैं, उनकी संख्या भी छोटी-मोटी नहीं बल्कि डेढ़ लाख से ज्यादा है। इन चालानों का डाटा सर्वर पर सुरक्षित हो चुका है। बस लोगों को चालान भेजकर जुर्माने की वसूली करना बाकी है।
शहर में जिन लोगों को यह भ्रम था कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 166 करोड़ की लागत से इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईटी ट्रिपल सी) उनकी सुविधाओं से स्थापित किया गया है, शायद अगले कुछ दिनों में उनके जहन से धुंध छंटनी शुरू हो जाएगी। यातायात के नियम पूरी कड़ाई के साथ पब्लिक पर लागू किए जाएंगे और अतिक्रमण, जाम, टूटी-फूटी सड़कों जैसी समस्याओं अफसरों की पहले की तरह कोई जवाबदेही नहीं होगी। इसकी इससे बेहतर और कोई बानगी नहीं हो सकती कि पिछले चार दिनों के अंदर बगैर किसी पूर्व सूचना के शहर में दस स्थानों पर डेढ़ लाख चालान कर उन पर करीब 15 करोड़ का जुर्माना तय कर दिया गया है।
अब पुलिस पर दबाव... वसूलिए पैसा
आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के तहत शहर भर में स्मार्ट ट्रैफिक लाइट और सेंसरयुक्त कैमरे लगाकर दावा किया गया था यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। यातायात व्यवस्था कितनी बेहतर हुई, यह हर रोज चौराहों पर जाम में फंसे लोग बेहतर जानते हैं। हालात दुरुस्त करने पर न नगर निगम ने कोई काम किया न ट्रैफिक पुलिस ने, एकाएक चालान कटवाने शुरू कर दिए। चार अप्रैल से आई ट्रिपल सी ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का डाटा जुटाकर सर्वर पर स्टोर करना शुरू कर दिया। चार से सात अप्रैल तक डेढ़ लाख चालान हो गए। इसके बाद पुलिस को जुर्माने की रकम की वसूली करनी है लेकिन एसएसपी के इस पर सहमत न होने से कशमकश का माहौल बना हुआ है और फिलहाल चालान जारी नहीं हुए हैं।
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सदमे में न आ जाना... न्यूनतम एक हजार रुपये का है जुर्माना
बताया जा रहा है कि ये चालान बगैर हेलमेट और सीट बेल्ट लगाए गाड़ी चलाने, ओवर स्पीड, ट्रैफिक लाइट जंप करने, जेब्रा क्रॉसिंग पर गाड़ी खड़ी करने जैसे यातायात के नियमों के उल्लंघन पर हुए हैं। चालान की न्यूनतम राशि एक हजार रुपये है। यह भी मुमकिन है कि किसी एक रास्ते से एक दिन में कई बार गुजरने वाले किसी व्यक्ति के कई-कई चालान हुए, लिहाजा यह अंदाजा मुश्किल है कि अगर ये चालान जारी हुए तो किसी एक व्यक्ति की जेब से कितनी रकम निकलेगी। यातायात नियमों के उल्लंघन के सर्वाधिक मामले सेटेलाइट चौराहे और फिर सर्किट हाउस चौराहे के हैं। माना जा रहा है कि इसमें आम लोग तो बहुतायत में होंगे ही, संभव है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के वाहन भी कार्रवाई की जद में आ गए हों।
... इधर सिस्टम हर जिम्मेदारी से मुक्त
1- शहर में किसी भी सिग्नल पर जेब्रा क्रॉसिंग, स्टॉप लाइन और लेफ्ट टर्न क्लियर न होने की समस्याओं पर कोई काम नहीं किया गया। इस बारे में ट्रैफिक पुलिस ने भी स्मार्ट सिटी के अफसरों का ध्यान आकर्षित किया था।
2- शहर में मानकों से कई गुना टेंपो, ऑटो और ई रिक्शा की भरमार है। इसके अलावा डग्गामार गाड़ियों और बस-ट्रक जैसे भारी वाहनों के अड्डे भी शहर में बने हुए हैं। इनकी वजह से जाम रहता है और लोग फंसे रहते हैं। वाहनों की यूनियन वाले दावा करते हैं कि पुलिस और आरटीओ के लोग अवैध वाहनों से हफ्ता लेते हैं, इसी कारण इस समस्या पर कोई काम नहीं होता।
3- शहर में हर सड़क पर बेतहाशा अतिक्रमण है। तमाम सड़कों पर अवैध बाजार और दुकानें लगी रहती हैं। कहा जाता है कि ये अवैध धंधे नगर निगम के स्टाफ के संरक्षण में चलते हैं, इसीलिए ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित रहने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
4- प्रमुख सड़कों पर डिवाइडरों की हालत खराब है और उन पर रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हुए। इस वजह से शहर में अक्सर हादसे होते रहते हैं। ईसाईयों की पुलिया से चौकी चौराहे होते हुए चौपुला तक डिप सड़क से छह इंच तक उठे हुए जिन पर अक्सर हादसे होते हैं।
5- कई पुरानी सड़कें तो टूटी हुई हैं ही, हाल ही में कमीशनखोरी की वजह से नई बनी सड़कें भी बुरी तरह उखड़ गई हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी उन पांच सड़कों को बनाने के लिए तैयार नहीं है जिन्हें कुछ ही समय पहले जल निगम ने बनवाया था और कुछ ही समय बाद वे उखड़ गई। इस मामले में किसी अफसर या जनप्रतिनिधि ने जांच कराने तक की पहल नहीं की।
कब कितने चालान
04 अप्रैल : 39 हजार
05 अप्रैल : 37 हजार
06 अप्रैल : 43 हजार
07 अप्रैल : 39 हजार
कंपनी की मनमानी से उलझन में अफसर
बताया जा रहा है कि ट्रैफिक लाइट की निगरानी करने वाली कंपनी ने अफसरों को जानकारी दिए बिना चालान के लिए वाहनों का डाटा जमा करके सर्वर पर अपलोड कर दिया। अब पुलिस को इन लोगों को चालान भेजने की प्रक्रिया पूरी करनी है। एक क्लिक भर करने से चालान जारी हो जाएंगे। अफसर उलझन में हैं कि एकसाथ इतने लोगों को चालान कैसे जारी कर दें। दूसरी समस्या यह है कि सर्वर पर अपलोड हुआ वाहनों का डाटा डिलीट भी नहीं हो सकता। इस वजह से सभी असमंजस की स्थिति में हैं।
बिना किसी पूर्व सूचना चालान की प्रक्रिया शुरू नहीं कराई जा सकती। यह गलत किया गया है, इस बारे में अफसरों से बात करके समस्या का समाधान निकलवाएंगे। जनता को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - उमेश गौतम, मेयर
चार दिन में एक-डेढ़ लाख वाहनों का डाटा कलेक्ट करने की बात मेरी जानकारी में आई है। एक साथ इतने लोगों को चालान नहीं जारी हो सकते और अभी ट्रैफिक लाइट संचालन की व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हैं। इस बारे में नगर आयुक्त से बात की जाएगी। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
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शहर में जिन लोगों को यह भ्रम था कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 166 करोड़ की लागत से इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईटी ट्रिपल सी) उनकी सुविधाओं से स्थापित किया गया है, शायद अगले कुछ दिनों में उनके जहन से धुंध छंटनी शुरू हो जाएगी। यातायात के नियम पूरी कड़ाई के साथ पब्लिक पर लागू किए जाएंगे और अतिक्रमण, जाम, टूटी-फूटी सड़कों जैसी समस्याओं अफसरों की पहले की तरह कोई जवाबदेही नहीं होगी। इसकी इससे बेहतर और कोई बानगी नहीं हो सकती कि पिछले चार दिनों के अंदर बगैर किसी पूर्व सूचना के शहर में दस स्थानों पर डेढ़ लाख चालान कर उन पर करीब 15 करोड़ का जुर्माना तय कर दिया गया है।
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अब पुलिस पर दबाव... वसूलिए पैसा
आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के तहत शहर भर में स्मार्ट ट्रैफिक लाइट और सेंसरयुक्त कैमरे लगाकर दावा किया गया था यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। यातायात व्यवस्था कितनी बेहतर हुई, यह हर रोज चौराहों पर जाम में फंसे लोग बेहतर जानते हैं। हालात दुरुस्त करने पर न नगर निगम ने कोई काम किया न ट्रैफिक पुलिस ने, एकाएक चालान कटवाने शुरू कर दिए। चार अप्रैल से आई ट्रिपल सी ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का डाटा जुटाकर सर्वर पर स्टोर करना शुरू कर दिया। चार से सात अप्रैल तक डेढ़ लाख चालान हो गए। इसके बाद पुलिस को जुर्माने की रकम की वसूली करनी है लेकिन एसएसपी के इस पर सहमत न होने से कशमकश का माहौल बना हुआ है और फिलहाल चालान जारी नहीं हुए हैं।
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बताया जा रहा है कि ये चालान बगैर हेलमेट और सीट बेल्ट लगाए गाड़ी चलाने, ओवर स्पीड, ट्रैफिक लाइट जंप करने, जेब्रा क्रॉसिंग पर गाड़ी खड़ी करने जैसे यातायात के नियमों के उल्लंघन पर हुए हैं। चालान की न्यूनतम राशि एक हजार रुपये है। यह भी मुमकिन है कि किसी एक रास्ते से एक दिन में कई बार गुजरने वाले किसी व्यक्ति के कई-कई चालान हुए, लिहाजा यह अंदाजा मुश्किल है कि अगर ये चालान जारी हुए तो किसी एक व्यक्ति की जेब से कितनी रकम निकलेगी। यातायात नियमों के उल्लंघन के सर्वाधिक मामले सेटेलाइट चौराहे और फिर सर्किट हाउस चौराहे के हैं। माना जा रहा है कि इसमें आम लोग तो बहुतायत में होंगे ही, संभव है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के वाहन भी कार्रवाई की जद में आ गए हों।
... इधर सिस्टम हर जिम्मेदारी से मुक्त
1- शहर में किसी भी सिग्नल पर जेब्रा क्रॉसिंग, स्टॉप लाइन और लेफ्ट टर्न क्लियर न होने की समस्याओं पर कोई काम नहीं किया गया। इस बारे में ट्रैफिक पुलिस ने भी स्मार्ट सिटी के अफसरों का ध्यान आकर्षित किया था।
2- शहर में मानकों से कई गुना टेंपो, ऑटो और ई रिक्शा की भरमार है। इसके अलावा डग्गामार गाड़ियों और बस-ट्रक जैसे भारी वाहनों के अड्डे भी शहर में बने हुए हैं। इनकी वजह से जाम रहता है और लोग फंसे रहते हैं। वाहनों की यूनियन वाले दावा करते हैं कि पुलिस और आरटीओ के लोग अवैध वाहनों से हफ्ता लेते हैं, इसी कारण इस समस्या पर कोई काम नहीं होता।
3- शहर में हर सड़क पर बेतहाशा अतिक्रमण है। तमाम सड़कों पर अवैध बाजार और दुकानें लगी रहती हैं। कहा जाता है कि ये अवैध धंधे नगर निगम के स्टाफ के संरक्षण में चलते हैं, इसीलिए ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित रहने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
4- प्रमुख सड़कों पर डिवाइडरों की हालत खराब है और उन पर रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हुए। इस वजह से शहर में अक्सर हादसे होते रहते हैं। ईसाईयों की पुलिया से चौकी चौराहे होते हुए चौपुला तक डिप सड़क से छह इंच तक उठे हुए जिन पर अक्सर हादसे होते हैं।
5- कई पुरानी सड़कें तो टूटी हुई हैं ही, हाल ही में कमीशनखोरी की वजह से नई बनी सड़कें भी बुरी तरह उखड़ गई हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी उन पांच सड़कों को बनाने के लिए तैयार नहीं है जिन्हें कुछ ही समय पहले जल निगम ने बनवाया था और कुछ ही समय बाद वे उखड़ गई। इस मामले में किसी अफसर या जनप्रतिनिधि ने जांच कराने तक की पहल नहीं की।
कब कितने चालान
04 अप्रैल : 39 हजार
05 अप्रैल : 37 हजार
06 अप्रैल : 43 हजार
07 अप्रैल : 39 हजार
कंपनी की मनमानी से उलझन में अफसर
बताया जा रहा है कि ट्रैफिक लाइट की निगरानी करने वाली कंपनी ने अफसरों को जानकारी दिए बिना चालान के लिए वाहनों का डाटा जमा करके सर्वर पर अपलोड कर दिया। अब पुलिस को इन लोगों को चालान भेजने की प्रक्रिया पूरी करनी है। एक क्लिक भर करने से चालान जारी हो जाएंगे। अफसर उलझन में हैं कि एकसाथ इतने लोगों को चालान कैसे जारी कर दें। दूसरी समस्या यह है कि सर्वर पर अपलोड हुआ वाहनों का डाटा डिलीट भी नहीं हो सकता। इस वजह से सभी असमंजस की स्थिति में हैं।
बिना किसी पूर्व सूचना चालान की प्रक्रिया शुरू नहीं कराई जा सकती। यह गलत किया गया है, इस बारे में अफसरों से बात करके समस्या का समाधान निकलवाएंगे। जनता को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - उमेश गौतम, मेयर
चार दिन में एक-डेढ़ लाख वाहनों का डाटा कलेक्ट करने की बात मेरी जानकारी में आई है। एक साथ इतने लोगों को चालान नहीं जारी हो सकते और अभी ट्रैफिक लाइट संचालन की व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हैं। इस बारे में नगर आयुक्त से बात की जाएगी। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी